कलाकार का कोई धर्म नहीं होता है. कला ही उसका धर्म और कर्म होता है. देश में एक तरफ जहाँ धर्म का चश्मा लगाकर चीज़ो और घटनाओं को परखा जाता है लेकिन असम के एक शिल्पकार ने दुनिया की सबसे ऊंची दुर्गा प्रतिमा बनाकर अपना नाम न केवल “लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्डस रिकॉर्ड” में दर्ज करवाया बल्कि देश में सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल कायम की है.

इस 61 वर्षीय कलाकार का नाम नूरूद्दीन अहमद है, जो गुवाहाटी के काहिलीपाड़ा इलाके के रहने वाले हैं. अहमद ने इस प्रतिमा को सितंबर 2017 में दुर्गा पूजा पर बिश्नुपुर (गुवाहाटी) पंडाल के लिए बनाया था.

विश्व की सबसे ऊँची दुर्गा प्रतिमा । तस्वीर साभार : इंटरनेट

इस प्रतिमा की ऊंचाई 98 फीट है, जिसे बांस की मदद से बनाया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस विशाल प्रतिमा का निर्माण हिंदू-मुसलमान, दोनों ही समुदाय के 40 लोगों ने मिलकर किया है. आपको बता दे कि इस क्षेत्र में दुर्गा पूजा उत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है.

अहमद बताते हैं कि इस प्रतिमा के निर्माण में 40 दिन लगे थे. 17 सितंबर के दिन मूर्ति तैयार हो गई थी. लेकिन तूफान की वजह से दुर्गा पूजा के हफ्ते भर पहले ही वो तबाह हो गई. इसके बाद उन्होंने फिर से शुरुआत की और महज 7 दिन में प्रतिमा दोबारा बना ली.

वर्ल्ड रिकॉर्ड के प्रशस्ति पत्र के साथ नूरूद्दीन अहमद । तस्वीर साभार : इंटरनेट

अहमद को इस प्रतिमा के लिए ‘लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ की तरफ से पिछले महीने एक पत्र मिला. लेकिन उन्होंने बुधवार के दिन इस खुशखबरी को फेसबुक के जरिए सबके साथ शेयर किया. बता दें, अहमद गुवाहाटी के सबसे बड़े दुर्गा पंडालों के आर्ट डायरेक्शन का भी काम देखते हैं.

अहमद के इस काम की लोग खूब तारीफ कर रहे हैं. हालांकि, कुछ लोग अक्सर उनसे पूछते हैं कि क्या उनका धर्म उनके काम में रोड़ा नहीं बनता? इस पर वह कहते हैं कि इस काम में धर्म की बात कहां से आ जाती है. अहमद मानते हैं कि शिल्पियों (कलाकारों) का कोई धर्म नहीं होता.

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