एक 19 साल का लड़का अपने पिता की सलाह को नजरअंदाज करते हुए एक नए बिज़नेस क्षेत्र में कदम रखता है । इसी असंगठित क्षेत्र को अपने दूरदर्शी भरे निर्णयों एवं जोखिम उठाने की अद्भुत क्षमता के बलबूते भारत का नंबर एक लोजिस्टिक्स कंपनी के रूप में स्थापित कर देता है । एक नए व्यापार क्षेत्र में उतरने के अपने किशोर बेटे के निर्णय के बारे में एक पिता की चिंता को गलत साबित करते हुए , यह किशोर आज ट्रांसपोर्ट किंग बन चूका है , ऐसे दिलचस्प सफर को मुकाम तक पहुंचाने वाले उद्यमी का नाम है डॉ विजय संकेश्वर (Vijay Sankeshwar)

उनके पिता को पता ही नहीं था कि उनके 1 9 वर्षीय बेटे के परिवहन कारोबार में प्रवेश किसी दिन उन्हें एक उद्योगपति बनवाएगा। विजय, जिन्होंने 1 9 76 में विजय परिवहन नाम की एक कंपनी शुरू की जिसमे शुरुआत में केवल एक ट्रक था लेकिन अब यह एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का रूप ले चुकी है और सालाना लगभग 2000 करोड़ का टर्नओवर होता है । विजय अब VRL लॉजिस्टिक्स (VRL Logistics) लिमिटेड के सीएमडी हैं तथा उनके बेटे आनंद भी अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बटा रहे है ।

यह भी पढ़ेनौकरी छोड़ चाय बेचकर करोड़ो कमाने वाले दोस्तों का दिलचस्प सफर

विजय ने अपने क़स्बे गडग जो कि उत्तर कर्नाटक के औद्योगिक नगर हुबली के पास स्तिथ है, में 1976 में एक ट्रक ख़रीदा। उस समय परिवहन क्षेत्र बहुत ही ज्यादा असंगठित था और सब लोग अपने हिसाब से लोजिस्टिक्स का काम देख रहे थे । इस नए क्षेत्र में विजय को अपार संभावनाए नजर आयी और आज लगभग 4500 वाहनों के साथ प्राइवेट क्षेत्र की सबसे बड़ी लॉजिस्टिक कंपनी बना डाली ।

vrl_group
VRL Group’s Logistic division

15,000 से अधिक कर्मचारियों के साथ, वीआरएल समूह परिवहन, कूरियर सेवा, प्रकाशन, पवन मिलों और हवाई चार्टर व्यवसाय में है।1976 में दो लाख कमाई करने वाले विजय ने अब एक उद्योग समूह खड़ा कर दिया है जिसमे केवल 300 करोड़ का तो VRL मीडिया हाउस ही है ।

यह विश्वास करना मुश्किल है कि उत्तर कर्नाटक के गडग में से इस विनम्र आदमी ने परिवार के पुश्तैनी व्यवसाय से कुछ अलग करते हुए एक नए क्षेत्र में क्रांति ला दी । 1976 में, उसने 1.20 लाख रुपये उधार लेकर एक ट्रक के साथ विजय परिवहन शुरू किया ।

यह भी पढ़ेलाखों के कर्जे के बाद देश की बड़ी डिजिटल मीडिया कंपनी बनाने वाले शख़्स का सफर

अपने शुरुआती संघर्ष को याद करते हुए विजय ने बताया कि

मैंने एक बड़ा जोखिम लिया तथा इस असंगठित क्षेत्र में मेरी किस्मत को आजमने की कोशिश करना मेरे लिए बहुत कठिन था। कई बार मुझे इस व्यापार में गंभीर नुकसान उठाना पड़ा और मेरे माता-पिता के साथ ही मेरी पत्नी मुझे पारिवारिक व्यवसाय करने के लिए कहते थे।

विजय अपने परिवार में सात भाइयों के बीच चौथी संतान था। उनका परिवार किताबों के प्रकाशन और मुद्रण कारोबार में था। उनके पिता ने आज से लगभग 90 साल पहले गडग में ही एक प्रकाशन हाउस खोला था और उनके परिवार का इस व्यापार में खासी पहचान थी । उनके पब्लिशिंग हाउस से कन्नड़ डिक्शनरी के साथ ही अन्य साहित्य एवं पत्रिकाए छपती थी ,अब भी वे हर वर्ष शब्दकोश की पांच से छह लाख प्रतियां प्रकाशित करते हैं, जो कि विजय के भाइयों द्वारा उस का संचालन किया जाता है ।

यह भी पढ़ेक्रिकेट में छोटे से करियर के बाद हिंदी कमेंट्री में धमाल मचाते पूर्व भारतीय क्रिकेटर

विजय के पिता भी यही चाहते थे कि वो उनका प्रकाशन का व्यापार देखे लेकिन विजय न तो कुछ और ही ठान रखा था । 16 साल की उम्र में उनके पिता ने उनको विजय प्रिंट हाउस नाम से एक प्रिंटिंग प्रेस बना के दी जिसमे उस वक्त दो कर्मचारी काम करते थे और एक प्रिंटिंग मशीन हुआ करती थी । इसी बीच उन्होंने अपनी प्रेस का आधुनिकीकरण करने के लिए लगभग एक लाख रुपये खर्च करके नयी मशीन लगवाई तथा इंटरनेशनल ब्रांड की पत्रिकाओं का मुद्रण भी शुरू कर दिया लेकिन वो हमेशा एक ऐसा बिज़नेस करने का प्लान बना रहे थे जिसमे शुरुआती निवेश दो लाख रुपये से जायदा न हो ।

अपनी रिसर्च के दौरान उन्होंने पाया कि ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में अपार संभावनाए है तथा काम निवेश में इस क्षेत्र में कार्य किया जा सकता है । उनका यह विचार रूपी बीज आज वट वृक्ष का रूप ले चूका है तथा हुबली के साथ ही बैंगलोर, बेलगावी और मैसूर में भी VRL के मुख्यालय है ।आठ भरी वाहनों के साथ उन्होंने विजयानन्द रोडलाइन्स के नाम से 1983 में कंपनी शुरू की और 1990 के अंत तक उन्होंने लगभग चार करोड़ रुपये का टर्नओवर कमा लिया ।

यह भी पढ़ेबिहार के इस लाल ने लैटिन अमेरिकी देश कोस्टा रिका की फिल्मों में मचाया धमाल

ट्रांसपोर्ट बिज़नेस में मिली सफलता के बाद उन्होंने कर्नाटक में कुरियर सर्विस शुरू करने का फैसला किया जो कि उनके ट्रांसपोर्ट बिज़नेस का ही पूरक उद्योग था । इसके कुछ सालों बाद उन्होंने पैसेंजर बस सर्विस का काम 4 बसों के साथ प्रारम्भ किया जो आज 75 रुट्स के साथ आठ राज्यों को कवर करता है और इनके बड़े में आज 400 से ज्यादा बस है ।

VRL_Logistics
VRL Group’s Buses

VRL ग्रुप आज कुरियर के साथ ही पार्सल , परिवहन एवं पैसेंजर सर्विस में नंबर वन बना हुआ है और विजय के नाम लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स में भी दर्ज है । विजय की कंपनी के पास दुनिया में सबसे ज्यादा व्हीकल्स है जिनमे ट्रक , बस , कार , मिनी ट्रक तथा भारी वहां शामिल है ।

यह भी पढ़ेटीम इंडिया के इस कप्तान में दिखती है सचिन तेंदुलकर की झलक

विजय के बेटे आनंद ने अगले तीन साल में अपना एयरलाइन ब्रांड खोलने का फैसला किया है तथा 1300 करोड़ के शुरुआती निवेश से उन्होंने काम करना शुरू कर दिया है । 16 साल की उम्र में एक प्रिंटिंग प्रेस चलाकर अपनी उद्यमी यात्रा शुरू करने वाले 66 साल की उम्र में विजय आज 2000 करोड़ की कंपनी के मालिक बन चुके है । उन्होंने अपनी उद्यम यात्रा में कई पड़ाव पर किये और लगातार जोखिम उठाने के बाद आज सफलता के नए आयाम स्थापित कर रहे है ।

यह भी पढ़ेNCC कैडेट्स से टीवी धारावाहिक की सुपरस्टार बनने का सफर

Comments

comments