जीवन में वही करिये जिससे आप स्वयं संतुष्ट हो !

इसी विचारधारा के तहत समाज को स्वावलम्बी बनाने के लिए एक संस्थान ओडिशा और बंगाल के आदिवासी इलाकों में काम कर रहा हैं. एक सशक्त एवं समृद्ध राष्ट्र की प्रथम इकाई समाज होता हैं और जब आप उच्च शिक्षित या एलिट ग्रुप से आते हो तो आपकी जिम्मेदारी बढ़ जाती हैं. आपका समाज के प्रति दायित्व और कर्तव्य और महत्वपूर्ण हो जाता हैं. ग्रामीण भारत को सम्बल बनाने के लिए आईआईटी (IIT) के चार छात्रों ने मिलकर एक संस्थान बनाया हैं जिसके केंद्र में ‘समग्र ग्रामोदय एवं सर्व स्वावलम्बन हैं.

कैवल्य विचार सेवा समिति (KVSS) की स्थापना 2012 में आई आई टी खड़गपुर के चार पूर्व छात्रों ने मिलकर की. संस्था के संस्थापक विशाल सिंह एवं सह – संस्थापक हेमंत, संतोष एवं अजय. इस संस्था का मुख्य उद्देश्य समग्र ग्राम उत्थान एवं स्वरोज़गार सृजन हैं, यह संस्था ओडिशा, पश्चिम बंगाल एवं उत्तर प्रदेश में कार्य कर रही हैं. गांव से शहरों की ओर पलायन रोकने के लिए उचित कदम उठाये गए हैं.

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कैवल्य विचार विमर्श समिति के सदस्य

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में विशाल सिंह बताते हैं कि 2011 में जब उच्च शिक्षा के लिए आईआईटी खड़गपुर पहुंचा तो ज्ञान अर्जित करने के सभी साधनों की उपलब्धता को देखकर आश्चर्य और हर्ष का मिश्रित अनुभव मिला.

जब हमने देखा की जिन गांवों में आज से तीन-चार दशक पहले तक खूब चहल-पहल हुआ करती थी. किसानों के लोक-गीत खूब गाये जाते थे, गांवों की कम से कम दो पीढ़ियां शाम को एक साथ बैठकर अपने कार्यों एवं अनुभवों का आदान-प्रदान करती थी. इस प्रकार हर तबके के लोगो का एक दूसरे से सामंजस्य समाज को स्थायित्व प्रदान करता था. लेकिन आज स्थितियां इसके एकदम उलट हैं. गाँवो पर शहरीकरण भारी पड़ रहा हैं जिसका सबसे ज्यादा दुष्प्रभाव खेती-किसानी पर पड़ा हैं ओर लोग शहरों की तरफ पलायन करने के लिए मजबूर हुए.

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‘अन्न-दानम’ मुहिम के जरिये भोजन उपलब्ध करवाया जाता है

आज फिर से इन्ही स्वावलम्बी ओर कल्याणकारी परम्पराओं को जीवित करने के लिए हम अपने भविष्य और वर्तमान को किसान समाज के उत्थान के लिए समर्पित करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. जिसके अंतर्गत हमने वंचित एवं गरीब समाज के बच्चों की अच्छी शिक्षा एवं उनके समुचित विकास के लिए ओडिशा राज्य के परलाखेमुंडी एवं पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में ‘अन्न-दानम‘, ‘शिक्षा-दानम‘, ‘स्वास्थ्य-दानम‘ एवं ‘वस्त्र-दानम‘ नामक अभियान चलाये जिसके अंतर्गत मार्च 2019 तक लगभग 7500 से ज्यादा बच्चे लाभान्वित हो चुके हैं.

इस सेवा कार्य की सराहना आईआईटी खड़गपुर के परिसर में भी बहुत ज्यादा हुई और लगभग 150 से ज्यादा बी.टेक, एम् टेक एवं पीएचडी के छात्रों ने हमारे साथ स्वयंसेवी के रूप में काम किया. 2014 के आते-आते हमें आभास हो गया कि समाज को समृद्ध बनाने के लिए उपरोक्त पहल काफी नहीं हैं. किसानो की दुर्दशा देख मन विचलित था, हाड़-तोड़ मेहनत करने वाले अन्नदाताओं की कष्टदायी परिस्थिति से मन खिन्न था.

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आदिवासियों को जागरूक करना का काम कर रहे है विशाल

अतः हमने अपनी एक और मुहिम चलायी जिसका मुख्य उद्देश्य ‘समग्र ग्रामोदय एवं सर्व स्वावलम्बन‘ हैं. इस मुहिम के अंतर्गत हमने ओडिशा के मयूरभंज, क्योंझर, झारसुगुड़ा, बरगढ़, सम्बलपुर एवं कंधमाल जैसे जिलों के छोटे एवं मध्यम वर्गीय आदिवासी किसानों को प्राथमिकता से जैविक कृषि के गुर सींखाने शुरू किये जिससे की कृषि लागत न्यूनतम की जा सके.

हमने कृषि विकास एवं स्वावलम्बन योग्य शिक्षा पर बल देते हुए ओडिशा के लगभग हर जिले में जैविक कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए प्रशिक्षित सदस्यों के समूहों का गठन किया. इन्ही के माध्यम से जैविक कृषि के द्वारा स्वावलम्बन को पुरे प्रदेश में फ़ैलाने का कार्य शुरू किये जिसमे ‘एक लाख फ्रॉम एक एकड़‘, ‘मिनिमम इनपुट मैक्सिमम आउटपुट‘ और ‘समन्वित जैविक कृषि‘ जैसे सिद्धांतों से किसानों का रुख परिवर्तित कर उनको लाभान्वित किया. मार्च 2019 तक लगभग 27,500 किसानों ने हमारे कार्यक्रम का फायदा उठाते हुए रासायनिक खेती को छोड़कर समन्वित जैविक खेती करना शुरू किया हैं.

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दिव्यांगों को जैविक खेती की ट्रेनिंग देती KVVS टीम

आज हमारे द्वारा प्रशिक्षित किसान स्वावलम्बी और आर्थिक रूप से सुदृढ़ जीवन शैली की आधारशिला रख हमें गौरान्वित कर रहे हैं. प्रति वर्ष हमारी संस्था से विभिन्न प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों के सैंकड़ों विद्यार्थी प्रशिक्षण प्राप्त कर हमारे समृद्ध ग्रामोदय के सपने को पंख लगा रहे हैं.

वर्तमान में हमारी संस्था कैवल्य विचार सेवा समिति के साथ प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी मुंबई, एनआईटी जमशेदपुर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय, उत्कल यूनिवर्सिटी और OUAT के लगभग 430 स्वयंसेवी काम कर रहे हैं. जिनके माध्यम से ओडिशा के पांच जिलों, पश्चिम बंगाल तथा उत्तर-प्रदेश के 1 जिले में हमने किसानों के समग्र उत्थान की पृष्ठभूमि रखने का काम कर रहे हैं.

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जैविक खेती के साथ ही खाद्य प्रसंस्करण की ट्रेनिंग देती KVVS टीम

कृषि के विभिन्न आयामों जैसे औषधीय खेती, प्रसंस्करण केंद्र, जैविक खाद निर्माण संयत्र, जैविक फल एवं सब्जी उत्पादन संयत्र, जैविक धुप-बत्ती निर्माण संयत्र एवं आहार मंडल जैसी इकाइयों में लगभग 100 से ज्यादा युवाओं को रोज़गार दिया जा चिका हैं, जिन्हे सतत प्रशिक्षण देकर भविष्य के कृषि उद्यमी बनाने का लक्ष्य हैं. हम भविष्य में अपने सेवा कार्यों को और विस्तार देते हुए ज्यादा से ज्यादा गाँवो तक अपनी पहुँच बनाना चाहते हैं.

हमारे संस्थान का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक परिवार को स्वावलम्बी बनाना, गांव के प्रत्येक बच्चे को शिक्षित एवं कुपोषण से मुक्त करना, ग्रामवासियों को स्वरोजगार देना, शहरी पलायन रोकना, मिट्टी को जहरीले रसायनों से मुक्त करना और गांव के हर घर में देशी गाय रखना और गांव को समृद्ध बनाना हैं.

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महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में काम कर रही है KVVS टीम

विशाल आगे बताते हैं कि किसान पिता ने अपना सर्वस्व लगाकर मुझे अच्छी शिक्षा देने का प्रयत्न किया. उनके आशीर्वाद से उत्तर-प्रदेश के चंदौली जिले के छोटे से गांव रंगोली से आईआईटी खड़गपुर तक का सफर किया. सफलतापूर्वक आईआईटी की पढाई समाप्त कर ओडिशा के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के डीन तक का सफर तय करने के बाद भी मन संतुष्ट नहीं हुआ.

कृषि क्षेत्र और ग्रामीणों की कठिनाइयों से अच्छी तरह परिचित होने के कारण जमीनी स्तर पर कार्य करने की जिज्ञासा सदैव मन में रहती थी लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण नौकरी छोड़ने की हिम्मत नहीं होती थी परन्तु समाज के उत्थान के लिए कार्य करने के लिए अच्छी-खासी नौकरी से त्यागपत्र दे दिया.

अगर आप भी विशाल सिंह या कैवल्य विचार विमर्श समिति(KVSS) से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, विशाल सिंह और कैवल्य विचार विमर्श समिति के सभी सदस्यों के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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