छोटी समस्याओं को ऐसे हल कीजिये की वो कभी बड़ी बन ही ना पाए !

मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे इस युवा को जन्म के समय ही दिव्यांग घोषित कर दिया गया. उसके जीने के लिए 9 वर्ष की उम्र तय कर दी गयी लेकिन न केवल उसने अपनी व्यक्तिगत समस्याओं को हल किया बल्कि देश के 25 राज्यों में वो देश की आम समस्याओं को अपनी कला के जरिये लोगो के सामने रख चूका है.

नोबेल पुरुस्कार विजेता समाजसेवी से लेकर यूनिसेफ जैसी बड़ी संस्था हो या मध्यप्रदेश के दूरस्थ गांव के आम ग्रामीण के साथ काम कर चूका है. बाल विवाह, भिक्षावृति, बालिका-अपहरण और वैश्यावृति जैसे संगीन अपराधों से लेकर शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी मुलभुत जरूरतों के लिए अपनी आवाज़ दे चूका है. 960 से ज्यादा नुक्कड़ नाटक करने वाले ‘घुमन्तु कलाकार‘ का नाम है विपुल सिंह (Vipul Singh Tapas).

मध्यप्रदेश के भोपाल शहर में रहने वाले विपुल सिंह देश के जाने-माने नुक्कड़-नाटक कलाकार है. देश के 25 राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों में अपनी कला के जरिये मुलभुत मुद्दों को उठा चुके है. समाज में महिला बाल अधिकारों एवं माहवारी जैसी समस्याओं के लिए भोपाल से लेकर जम्मू तक पैदल यात्रा कर चुके है. बच्चियों अपहरण से बचाने के लिए कलकत्ता से दिल्ली तक पैदल यात्रा की है. कई सामाजिक संस्थाओं के साथ जुड़े विपुल सिंह लगातार नुक्कड़ नाटकों के जरिये समाज में समस्याओं को हल करने का सन्देश दे रहे है.

vipul singh tapas performing
नुक्कड़ नाटक के दौरान विपुल सिंह

विपुल सिंह अभी ‘तपस (TAPAS)‘ नाम से संस्था चलाते है जो कि विभिन्न सामाजिक संस्थानों को कैंपेन, फिल्म, नुक्कड़ नाटक, डॉक्यूमेंट्री, डॉक्यूमेंटेशन के साथ ही डिजिटल मार्केटिंग में मदद करती है. प्रोफेशनल के साथ मिलकर हर कैंपेन को लोगो तक पहुंचाने के लिए उनकी टीम कई NGO एवं संस्थाओं के साथ काम कर चुके है. उनकी टीम जमीनी स्तर पर सन्देश पहुंचाने में सक्षम है जिससे कि लोगो की समस्याओं का हल हो सके.

विपुल सिंह नोबेल पुरुस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की ‘भारत यात्रा‘ सहित यूनिसेफ एवं फ्रांस की संस्था के साथ काम कर चुके है.

बी पॉजिटिव इंडिया के साथ बातचीत में विपुल सिंह (Vipul Singh Tapas) बताते है कि मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के बनारस में जौनपुर में हुआ. जब मै तीन साल का था तब पिताजी परिवार समेत भोपाल शिफ्ट हो गए. पिताजी प्राइवेट कोचिंग पढ़ाते है जबकि माता गृहणी है. मेरे भाई मर्चेंट नेवी में काम कर रहे है.

मेरे जन्म के समय ही मुझे दिव्यांग घोषित कर दिया गया था. मै सिर्फ सुन सकता था लेकिन न चल सकता हूँ और न ही बोल सकता था. डॉक्टर्स ने परिवारवालों को बोला कि मै 9 वर्ष से ज्यादा नहीं जी पाउँगा लेकिन चमत्कार ही कहिये कि मै अभी आपके सामने हूँ.

vipul singh with kids
गांव के बच्चों के साथ विपुल सिंह

शुरुआत से ही मेरा मन पढाई में कम लगता था लेकिन प्ले और डिबेट के साथ ही अच्छा फूटबाल खेलता था. स्कूल के समय में ही फुटबॉल की कई प्रतियोगिताएं में हिस्सा लिया था. जब मै बारहवीं में था तब तक मुझे नहीं पता था कि मुझे क्या करना है लेकिन पढाई मेरे बस की बात नहीं थी. इसके बाद मैंने थियेटर ज्वाइन किया जहाँ पर मुझे अपने हुनर को निखारने में मदद मिली.

इसके बाद मैंने इंजीनियरिंग में दाखिला लिया लेकिन चार साल की पढाई पूरी करने में छह साल लग गए. स्कूल के समय से ही मैंने नुक्कड़ नाटक करने शुरू कर दिए और यह सिलसिला अब तक बदस्तूर जारी है. मैंने शुरुआत में सेक्स एजुकेशन पर अवेयरनेस के लिए नुक्कड़ नाटक करने शुरू किये और देखते ही देखते पुरे भोपाल शहर में मुझे लोग जानने लग गए.

इसके बाद मैंने देश के अन्य शहरों में अवेयरनेस के लिए यात्रा प्रारंभ की. जेब में केवल 380 रुपये थे लेकिन मैंने महाराष्ट्र, गुजरात और गोवा तक की यात्रा की. रस्ते में पड़ने वाले शहर एवं गांवों में मैंने नुक्कड़ नाटक किये और वही पर नुक्कड़ नाटक के बाद फण्ड के लीये टोपी रख देता था. कोई भिखारी समझ कर खाने के लिए कुछ दे देता था तो कोई पैसे के रूप में मदद करता था. इसके लिए मैंने ट्रक के जरिये सफर किया और उनकी समस्याओं को करीब से महसूस किया.

Vipul Singh with villagers
ग्रामीणों के साथ विपुल सिंह

कई बार मैंने ट्रैन के जनरल डिब्बे से लेकर बस, ट्रक, बैलगाड़ी और पैदल यात्रा की लोगो से बात करते हुए और उनकी समस्या जानते हुए मैंने महसूस किया कि समस्याए बहुत है और पुरे देश की है तो देश व्यापी काम करना चाहिए.

इसके बाद मैंने घर लौटकर बच्चो को एजुकेशन, घरेलू हिंसा और माहवारी के साथ ही सेक्स एजुकेशन को लेकर भोपाल से जम्मू तक की यात्रा शुरू की. देश के कई शहरों एवं राज्यों से होते हुए मैंने यह सफर तय किया. इसके बाद मैंने सेव मिसिंग गर्ल (SAVE MISSING GIRL) संस्था के साथ मिलकर चाइल्ड ट्रैफिकिंग के लिए कलकत्ता से लेकर दिल्ली का पैदल सफर तय किया.

विपुल आगे बताते है कि अब तक लगभग 960 नुक्कड़ नाटक किये है और लगभग 10 लाख से ज्यादा लोगो से बातचीत करके उनके मुद्दे और समस्याए जान चुके है. सेक्स एजुकेशन और माहवारी के बारे में जागरूक करना मेरे दिल के करीब रहा है. नुक्कड़ नाटक में मै अकेला परफॉर्म करता हु और अलग-अलग जगह जाकर लोगो को सन्देश देने की कोशिश रहती है.

विपुल सिंह (Vipul Singh Tapas) अब तक कई मंचो पर से अपनी आवाज़ और मिशन लोगो तक पहुंचाने में सफल रहे है. TEDx के साथ ही BITS में कांग्रेस के कद्दावर नेता शशि थरूर के साथ मंच साझा कर चुके है. इसके साथ ही विपुल सोशल मीडिया के माध्यम से लोगो तक अपनी बार पंहुचा रहे है.

Vipul Singh Tapas TEDx Talk
TEDx टॉक के दौरान विपुल सिंह

विपुल सिंह के साथ तपस में अलीजा अंजुम, स्नेहदीप बिस्वास और रक्षंधा भट्ट के साथ ही 15 लोगो कि टीम है जो कैंपेन डिज़ाइन से लेकर सोशल मार्केटिंग तक का काम करती है. तपस के जरिये विपुल कई सामाजिक संस्थाओं एवं कॉर्पोरेट ग्रुप्स के साथ काम कर चुके है. ग्राउंड लेवल पर काम करते है जिससे कि समस्यायों की समझ एवं इम्पैक्ट ज्यादा पड़े.

अगर आप भी किसी सामाजिक संस्था से जुड़े हुए है और सोशल कैंपेन के बारे में योजना बना रहे है तो विपुल सिंह (Vipul Singh Tapas)और तपस से जरूर जुड़े.

बी पॉजिटिव इंडिया, विपुल सिंह और ‘तपस‘ के सभी साथियों के कार्य की सराहना करता है और उम्मीद है कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में हम जरूर कामयाब होंगे.

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