मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवां बनता गया.

यह पंक्तियाँ बिहार के युवा उद्यमी पर सटीक बैठती हैं. एक सर्वे के मुताबिक देश के 90 % से ज्यादा इंजीनियर नौकरी पाने के लायक नहीं हैं. उनके पास डिग्री तो हैं लेकिन इंडस्ट्री के लायक स्किल नहीं हैं. इसके साथ ही डिमांड और सप्लाई में भी बहुत अंतर हैं जिसके चलते कई इंजीनियरिंग के छात्र नौकरी नहीं कर पाते हैं. इसके बाद वो चपरासी और क्लर्क की नौकरी के लिए आवेदन करते हैं. यह खबर फिर सुर्ख़ियों में तब्दील हो जाती हैं लेकिन धरातल पर कोई काम नहीं होता हैं. इसी समस्या से गुजरने वाले युवा उद्यमी ने इन परिस्थितियों को बदलने का बीड़ा उठाया हैं. अपने संस्थान स्किल माइंडस फाउंडेशन के जरिये छात्रों को नौकरी करने के लायक बना रहे हैं विपुल शरण श्रीवास्तव.

विपुल शरण श्रीवास्तव न केवल छात्रों को नौकरी के लिए तैयार कर रहे हैं बल्कि बिहार प्रदेश में एक स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बना रहे हैं. जिसके जरिये उद्यमियों को खुद का उपक्रम शुरू करने के लिए प्रेरित किया जाता हैं और जरूरी मदद भी की जाती हैं. अब तक उनसे 10 से ज्यादा संस्थान जुड़ चुके हैं और 150 से ज्यादा छात्रों को नौकरी लग चुकी हैं जिनमे कई बच्चे बहुराष्ट्रीय कम्पनीज में काम कर रहे हैं. ग्रामीण प्रतिभाओं के विकास के लिए भी विपुल शरण काम कर रहे हैं.

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स्किल माइंडस फाउंडेशन से ट्रेनिंग के बाद लाभार्थी

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में विपुल शरण श्रीवास्तव बताते हैं कि बिहार में ही बचपन बीता और शुरुआती पढाई के बाद इंजीनियरिंग की. इंजीनियरिंग में पुराने पाठ्यक्रम और स्किल के अभाव में नौकरी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी. एक दर्जन से ज्यादा इंटरव्यू में ना सुनने के बाद एक कंपनी में जॉब लगी. जॉब करने के दौरान महसूस हुआ कि मेरे जैसे कितने ही इंजीनियरिंग और अन्य ग्रेजुएट्स को स्किल्स के अभाव में नौकरी ढूढने में दिक्कते होती होगी और इसके बाद वो चपरासी एवं क्लर्क की सरकारी नौकरी के लिए आवेदन करने के लिए मजबूर होते हैं.

विपुल आगे बताते हैं कि नौकरी के दौरान ही एक बार बिहार के कई गांवों मे घूमने का मौका मिला और जब जमीनी स्तर पर देखा तो पाया कि अभिभावकों एवं बच्चों की एक ही शिकायत मिली और वो थी “सही शिक्षा और कौशल की कमी“.

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एक कार्यक्रम के दौरान विपुल शरण श्रीवास्तव

अभिभावक कहते हैं कि आप लोग तो बन गए और हमारे बच्चों का क्या? जो ठीक से पढ़ भी नहीं पा रहे हैं? हमारे पास तो उतने पैसे भी नहीं हैं कि इन्हे बाहर कहीं रख कर पढ़ा सके? क्या कभी ये सब ठीक हो पाएगा? क्या कभी गाँव और देहात मे भी सही गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और कौशल हमारे बच्चों को भी मिल पाएगा? आप लोग आते हैं और चले जाते हैं, लेकिन कब तक ऐसा चलेगा. क्या हमारे बच्चे पढ़ने के लिए भी आश्रित ही रहेंगे? क्या आप लोग अपने स्तर से कुछ नहीं कर सकते? क्या सब काम सरकार के भरोसे ही हो पाएगा?”

इस घटना के बाद मैंने नौकरी छोड़ कर उन सभी अभिभावकों के सारे सवालो का जवाब देने की कोशिश में लगा . शुरुआती कुछ दिनों में फ्रीलांसिंग का काम किया और टीम बनातेहुए अपने प्रोजेक्ट्स पर लग गया. मैंने पटना आने का निर्णय लिया और सामाजिक उद्यमिता की तरफ अपना पहला कदम बढ़ाने को निकल पड़ा.

हमने मुलभुत समस्याए जानने के लिए सर्वे किया जिनमे तीन मुख्य बाते सामने आयी. पहली : प्राथमिक से लेकर माध्यमिक स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी, दूसरी : अच्छे कॉलेज से पढ़ने के बाद भी स्किल की कमी और
तीसरी : उद्यमिता को लेकर मन में संशय. हमने योजना के तहत इन तीनों समस्याओं पर गहन रिसर्च करना शुरू किया और इसी तरह स्किल माइण्ड्स फ़ाउंडेशन का जन्म हुआ. जुलाई 2017 मे हमने इसे पंजीकृत किया और और इस तरह हमारी कहानी आगे बढ़ी.

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विपुल शरण श्रीवास्तव कई सामाजिक कार्यों में लगे हुए हैं

स्किल माइण्ड्स फ़ाउंडेशन के जरिये हमने GET – SET – GO नाम से एक प्लेटफार्म शुरू किया जो इन तीनों समस्याओं को हल कर सकता हैं.

GET – इस प्लैटफ़ार्म के माध्यम से हम गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा सब के लिए पहुंचाने का काम करते हैं . इस प्लैटफ़ार्म के लिए Get deals with getting quality education ( सबके लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा) हमारा टैग लाइन बना.

SET – प्लैटफ़ार्म स्किल सींखने के लिए बनाया गया. इस प्लैटफ़ार्म के लिए Set deals with Set up with desired skill हमारा टैग लाइन बना.

GO – का मतलब आप अब तैयार हो रणक्षेत्र मे कूदने के लिए चाहे वो नौकरी पाने का रणक्षेत्र हो या उद्यमिता का रणक्षेत्र हो. इस प्लैटफ़ार्म के लिए GO for employment / Entrepreneurship हमारा टैगलाइन बना.

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‘शिक्षा पर चर्चा’ कार्यक्रम के संयोजक हैं विपुल शरण श्रीवास्तव

2017 मे हमने अपने संस्थान के जरिये कई प्रोजेक्ट्स के बीज बोने शुरू कर दिये. समाज में बदलाव लाने के लिए शिक्षा दूत (Education Messenger), SOL – School of Open Learning, ABCD – Any Body Can Do, Skill Guru, iJobIndia – Jobs for Everyone, Utthan – An Independent You, SMART Cell – Skill Minds Advanced Research & Training Cell (proposed) जैसे प्रोजेक्ट्स चल रहे हैं. इसके साथ ही सोशल मीडिया के प्रयोग से नौकरी संबधित जानकारिया दी जाती हैं.

मिसाल प्रोजेक्ट के तहत कई लोगों ने कम्प्युटर बेसिक लर्निंग और ई-गवर्नेंस की ट्रेनिंग ली. अब मिसाल फ़ेलो बन कर वो देश भर के अलग-अलग कोनों मे (खास कर के ग्रामीण इलाकों मे) ई-गवर्नेंस प्रोजेक्ट्स के बारे मे जागरूकता फैलाने के लिए कार्यरत हैं.

शिक्षा दूत एवं ABCD – Anybody can do के जरिये स्किल ट्रेनिंग के साथ ही ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए काम कर रहे हैं. इसके अलावा स्टार्ट-अप शुरू करने वाले उद्यमियों को इकोसिस्टम और जरूरी संसाधन प्रदान करने मे मदद करते हैं.

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एक अवार्ड समारोह के दौरान विपुल शरण

विपुल शरण श्रीवास्तव के कार्यों की कई मंचो से सराहा गया हैं. देश एवं विदेशों में प्रतिष्ठित सेमिनार एवं कॉन्फ्रेंस में प्रतिनिधित्व का मौका मिला हैं. जिनमें बिहार एक्सेलेंसी अवार्ड – पटना, भारत लीडरशिप अवार्ड – पटना, यंग अचीवर अवार्ड – मोतिहारी, इंडियाज़ युथ आइकॉन अवार्ड – पुणे, इंटरनेशनल पीपल्स चॉइस लीडर अवार्ड – कोलंबो, श्रीलंका, उत्कृष्ट उपलब्धि सम्मान – प्रयागराज, एजुकेशन एवेंजलिस्ट ऑफ़ द ईयर अवार्ड – दिल्ली, एहसास प्रेरक अवार्ड – दिल्ली, राष्ट्र प्रेरणा अवार्ड – इंदौर और इंडिया युथ अवार्ड शामिल हैं.

अगर आप विपुल शरण श्रीवास्तव या स्किल माइंडस फाउंडेशन से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, विपुल शरण श्रीवास्तव के कार्यों की सराहना करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश के युवा उद्यमिता क्षेत्र में कदम रखेंगे.

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