दौड़भाग भरी ज़िन्दगी में किसी व्यक्ति के पास समय नहीं है लेकिन कुछ लोग होते है जो अपने व्यस्ततम दिनचर्या में से कुछ समय निकालकर अन्य जरूरतमंद लोगों की सेवा करते है. इन्ही लोगों के कारण अभी तक मानवता बची हुई है और इंसान को लगता है कि कोई न कोई उसकी मदद जरूर करेगा.

सूरत के रहने वाले वेनीलाल मालवाला (VeniLal Malwala) जो कि जरी (एक प्रकार के कपड़े) का व्यापार करते है लेकिन इनकी पहचान एक व्यवसायी के रूप में नहीं है अपितु एक मानवसेवी के रूप में है.

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार पचपन वर्षीय वेनीलाल मालवाला अनजान लोगों के अंतिम संस्कार के लिए जाने जाते है. अब तक पिछले बीस वर्षों में लगभग 7000 मृत लोगों का अंतिम संस्कार कर चुके है.

सालाना लगभग 400 से ज्यादा मृत शरीर वेनीलाल मालवाला के पास आते है जिनका वो सभी रीति-रिवाजों के साथ अंतिम संस्कार करते है. इतना ही नहीं नासिक में स्थित नदी पर जाकर पिंडदान भी करते है. साथ ही मान्यताओं के अनुसार ब्राह्मणों को भोजन एवं दान-दक्षिणा भी देते है.

इस क्रम को सतत प्रयास में बदलने के लिए उन्होंने मालवाला अग्नि दाह सेवा केंद्र (Malwala’s Agni Dah Seva Kendra) के नाम से ट्रस्ट बना रखा है. ट्रस्ट में जुड़े लोगों और अन्य लोगों से मिले दान से वेनीलाल मालवाला अपना सारा काम छोड़कर अनजान व्यक्तियों के दाह-संस्कार में जुट जाते है. एक दाह-संस्कार में लगभग 505 रुपये का खर्चा आता है.

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वेनीलाल को पुलिस या अस्पताल के जरिये किसी अनजान व्यक्ति की मृत्यु के बारे में सूचना मिलती है तो वो अस्पताल पहुँच कर मृत शरीर को सूरत के कतारग्राम स्थित अश्विनी कुमार दाह-संस्कार केंद्र पर लाते है. मृत शरीर को पहले नहलाया जाता है और उसके बाद वैदिक मंन्त्राचार के साथ दाह संस्कार किया जाता है.

वेनीलाल ने 1997 में घटित हुई एक घटना के बाद यह पुण्य काम शुरू किया. वेनीलाल कहते है कि 1997 में मेरे सामने एक व्यक्ति की दुर्घटना के कारण हालत गंभीर हो गयी. उसे हॉस्पिटल ले जाने के दौरान पुलिस और अन्य विभागों की देरी के कारण नहीं बचाया जा सका.

पुलिस ने कई बार उस व्यक्ति के सगे-सम्बन्धियों को ढूढने की कोशिश की लेकिन अंत में थक हार कर उन्होंने शव मुझे सौंप दिया. मैंने पुरे विधि-विधान के साथ उसका अंतिम संस्कार किया और इस घटना के बाद अनजान व्यक्ति के दाह संस्कार करने प्रण किया.

उनकी संस्था विगत 18 वर्षों से सेवा में लगी हुई है. इसी के साथ वो हर वर्ष सूरत में प्रदर्शनी लगाते है जिनमे पिछले साल मृत लोगों की फोटो होती है जिससे कि उनके जान-पहचान के लोगों को पता चल सके कि वो अब इस दुनिया में नहीं है.

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