मुनाफ पटेल (Munaf Patel). नाम तो याद ही होगा. भूला भी नहीं जा सकता है. जब नए-नए इंडियन क्रिकेट में आए थे, तो मुनाफ के बारे में एक बात काफी फैली थी। वो ये कि मुनाफ और ऑस्ट्रेलिया के ग्लेन मैक्ग्राथ का बॉलिंग एक्शन तो मिलता-जुलता है ही, मुनाफ पिच पर एक रुपए के सिक्के पर लगातार बिना चूके गेंद फेंक सकते हैं। यानी अपनी स्पीड और लाइन-लेंथ पर वो कंट्रोल था कि बड़े से बड़ा बल्लेबाज भी संभल कर खेलता था।

गांव से आया तेज गेंदबाज जिससे दुनिया डरती थी..

इंग्लैण्ड के खिलाफ 2005 में मोहाली टेस्ट से डेब्यू करने वाले मुनाफ ने अपने पहले ही मैच में 97 रन देकर सात विकेट लिए थे और अपनी रफ्तार से सनसनी मचा दी थी।

मुनाफ उस समय 145 से अधिक की रफ्तार से गेंद डालते थे। उन्हें ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजों का जवाब माना गया। लेकिन एक साल के अंदर ही चोटों के चलते उन्हें अपनी रफ्तार कम करनी पड़ी और फिर वे पहले जैसे बॉलर नहीं रहे।

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अपनी गेंदबाजी से तहलका मचाया था मुनाफ पटेल

उन्होंने सिर्फ 70 वनडे और 13 टेस्ट मैच खेले जिनमें क्रमश: 86 और 35 विकेट लिए। उन्होंने दो वर्ल्ड कप खेले और एक बार विजेता टीम के सदस्य भी रहे लेकिन 2011 वर्ल्ड कप के बाद बाहर होने के बाद उन्हें टीम में नहीं लिया गया।

गरीब परिवार में हुआ जन्म , दोस्त की मदद से खेलने पहुंचे अकडेमी में..

मुनाफ का जन्म गुजरात के भरूच जिले के इकहर गांव में 12 जुलाई 1983 को हुआ। उनका परिवार काफी गरीब था और मुनाफ को कई बार तो भूखा सोना पड़ता था। उनके पिता कपास के खेतों में मजदूरी करते थे। मुनाफ ने खेतों में खेलते-खेलते अपनी गेंदबाजी को तराशा और सबसे तेज गेंदबाज बने।

कुछ साल बाद उनके एक दोस्त युसूफ ने उन्हें 400 रूपये में जूते दिलाए और बड़ौदा खेलने के लिए ले गए। मुनाफ आज भी उस एहसान को याद रखते हैं और जब भी युसूफ ब्रिटेन से आते हैं तो मुनाफ सबसे पहले मिलने जाते हैं।

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आज भी रहते है अपने गांव में

लेकिन उस समय घर में पैसों की कमी के चलते उनके पिता क्रिकेट छोड़ने को कहते और अफ्रीका जाकर काम करने को कहते लेकिन उनकी मां कहती कि उसे खेलने दो।

गौरतलब है कि इकहर गांव में ज्यादातर लोग अफ्रीका में ही काम करते हैं। यहां से लोग जांबिया, मोजाम्बिक, दक्षिण अफ्रीका और जिम्बाब्वे जाते हैं और वहां पर फैक्ट्री या दुकान में काम करते हैं।

वर्ल्डकप का गुमनाम हीरो, चोट की वजह से रहा परेशान ..

वे 2011 वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे और उस समय टीम इंडिया के बॉलिंग कोच इरिक सिमंस ने उन्हें जीत का “गुमनाम हीरो” कहा था। इस वर्ल्ड कप ने जहीर खान और युवराज सिंह के बाद सबसे ज्यादा 11 विकेट लिए थे। 2009 से लेकर 2011 के बीच उनके बिना टीम इंडिया अधूरी थी। लेकिन वर्ल्ड कप के कप के बाद वे पांच-छह बार चोटिल हो गए और जब फिट होकर लौटे तो चयन समिति बदल चुकी थी।

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2011 वर्ल्डकप के गुमनाम हीरो थे मुनाफ पटेल

वे कहते हैं कि वे लोग मेरे और नेहरा के अलावा अन्य लोगों को सामने लाना चाहते थे। अपने बचपन के बारे में वे बताते हैं कि दुख ही दुख था लेकिन झेलने की आदत हो गई थी। पैसे नहीं थे तो क्या कर सकते हैं? अब्बू अकेले काम कर रहे थे और मैं स्कूल में था

2007 की हार के बाद मुनाफ के गांववालों ने किया उनका सपोर्ट..

2007 में जब बांग्लादेश और श्रीलंका से हारकर टीम इंडिया पहले ही दौर से बाहर हो गई थी तो खिलाडियों को काफी गुस्सा झेलना पड़ा था।  इसी दौरान वेस्ट इंडीज में सचिन तेंदुलकर मुनाफ के कमरे में आए और पूछा कि, तुम्हारे घर पर भी कुछ नुकसान हुआ है क्या?

इस पर मुनाफ ने कहा कि पाजी, जहां मैं रहता हूं ना उधर आठ हजार लोग है और सब मेरे सिक्योरिटी है। इस पर सचिन ने हंसते हुए कहा कि हम सबको तुम्हारे घर जाना चाहिए। गौरतलब है कि हार के बाद सचिन और सौरव गांगुली के रेस्टोरेंट पर हमला हुआ था। जहीर खान के घर पर पत्थर फेंके गए और एमएस धोनी के घर की दीवार तोड़ दी गई थी।

गुस्से के कारण रहे चर्चित ..

ऎसे ही एक बार वे एक चयनकर्ता से भिड़ गए। वसीम जाफर बताते हैं कि टीम में चुने जाने के बाद एक दिन चयनकर्ता ने उनसे पूछा कि क्या तुम फिट हो? इस पर मुनाफ भड़क गए और बोले फिर तुमने मुझे चुना कैसे? तू खिला रहा है तो क्रिकेट ही नहीं खेलना मुझे।

पटेल कई बार गुस्से में ऎसे फैसले ले चुके हैं जिन्होंने उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर दी। दक्षिण अफ्रीका में आईपीएल-2 के दौरान एक मैच में शेन वार्न ने उन्हें बॉलिंग नहीं दी। इस मैच में राजस्थान रॉयल्स की टीम हार गई।

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आईपीएल में भी अपना जलवा बिखेर चुके है मुनाफ पटेल

गुस्साए मुनाफ पटेल टीम मालिक मनोज बदाले के पास गए और कहा, मेरा पासपोर्ट वापिस दो। मुनाफ अपने कमरे में चले गए और गेट बंद कर लिया। कुछ देर उनके गेट पर शेन वार्न आए लेकिन मुनाफ ने गेट नहीं खोला।

रहते है गांव में , शराब एवं पार्टियों से भी दूर ..

एक समय भारत के सबसे तेज गेंदबाज रहे मुनाफ पटेल आज अपने गांव में रहते हैं। इस पर वो कहते हैं,” दुख ही दुख था लेकिन झेलने की आदत हो गई थी। पैसा नहीं था हाथ में तो क्या ही कर सकते थे. पिता कमाने वाले इकलौते इंसान थे. मैंने आज जो भी हासिल किया वो क्रिकेट से बूते हैं।

मुनाफ आज अपने गांव इकहर में रहते हैं और वहां पर उनका खुद का पक्का बड़ा मकान है और गाड़ी है। आज मुनाफ पटेल दस करोड़ से ज्यादा सम्पति के मालिक है ।  वे गांववालों की मदद करते हैं। गांववाले भी मुनाफ को काफी सम्मान देते हैं।

वे शुरू शुरू में पार्टियों में नहीं जाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि पार्टियों में जाने पर शराब पीनी ही पड़ती है। बाद में गौतम गंभीर के समझाने के बाद वे पार्टियों में जाने लगे थे। वे आज भी शराब नहीं पीते।

मुनाफ अब दुबई में होने वाली टी10 लीग में खेलेंगे और खुद के लिए कोचिंग करियर तलाश रहे हैं.

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