गांव से आने वाले दो भाइयों ने 500 रुपये के निवेश से करोड़ो रुपये की कंपनी बना दी

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Dogma Soft

दुष्यंत कुमार की यह लाइन “कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं होता है , एक पत्थर तो तबियत से उछालों यारों” शायद इन दो भाइयों पर सटीक बैठती है । एक किसान परिवार से आने वाले इन दोनों भाइयों ने बिना कोई प्रोफेशनल ट्रेनिंग के आईटी कंपनी खोली और आज वो कंपनी भारत के लगभग दो हज़ार शहरों एवं गांवों में अपनी सेवाए दे रही है । 500 रुपये से शुरू हुआ उनका निवेश अब करोडो रुपये के टर्नओवर में तब्दील हो गया है । आप इनकी सोच के बारे में इनकी कंपनी के टैग लाइन “हम ग्राहक नहीं दोस्त बनाते है ” से समझ सकते है और इनकी कंपनी का एक मात्र उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आईटी सेवाओं को पहुँचाना। गांव से निकलकर गांवों को रोशन करने का इरादा रखने वाले भाइयों का नाम है पवन और श्याम गोदारा (Pawan and Shyam Godara)।

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इन दोनों भाइयों का बचपन एक मध्यम-वर्गीय जाट किसान परिवार में गुजरा है। इनके पिता की आमदनी खेतीबाड़ी से ही होती हैं। आज जहाँ पर बच्चों के लिए प्राइवेट एवं कान्वेंट स्कूल की भरमार है लेकिन गांव में उपलब्ध व्यवस्थाओं और परिवार की हालत को देखते हुए इन्होंने पढाई गांव के सरकारी स्कूल से जबकि ग्रेजुएशन राजकीय महाविद्यालय से की । ग्रेजुएशन में इन्होने आर्ट्स की पढाई की और तब तक इनका कंप्यूटर से कोई दूर तक रिश्ता नहीं था ।

दोनों भाइयों के पास न तो IIT की तैयारी की और न ही इंजीनियरिंग करके कोई टेक्निकल डिग्री उनको मिली तथा ना ही किसी आईटी कंपनी में जॉब की । किसान परिवार से आने वाले भाइयों का बिज़नेस से तो दूर -दूर तक कोई लेना-देना नहीं था और फंडिंग एवं निवेश के साथ बिज़नेस आइडियाज केवल शब्द भर सुन रखे थे ।

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कंप्यूटर की बढ़ती लोकप्रियता को भुनाने के लिए इन्होने एक प्राइवेट कंपनी DOACC सोसाइटी से एक डिंप्लोमा कोर्स करने का फैसला किया क्योंकि पैसों के अभाव में केवल यही विकल्प था जिसमे स्वयंपाठी के तौर पर कंप्यूटर के कोर्स किए जा सकते थे । कंप्यूटर के बारे में जानने के बाद इन्होने डोग्मा सॉफ्ट (Dogma Soft) नाम से एक आईटी कंपनी को एक बड़ी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनाते हुए अपने अथाह संघर्ष और सच्ची लगन से देश के कोने-कोने में पंहुचा दिया।

पवन ने एक इंटरव्यू में बताया कि “आये तब कई जगह नौकरी की और बच्चो को ट्यूशन पढ़ाया। फिर दोस्तो ने आईटी बिज़नेस के बारे में बताया। लेकिन तब हमें बिज़नेस के बारे में कुछ भी पता नहीं था। हम दोनों भाइयों ने 2009 में कंपनी की प्लानिंग शुरू की और 29 जनवरी 2010 को 500 रूपये में रजिस्ट्रेशन करा के एक छोटे से कमरे से कंपनी की नीव रखीं, जिसका साइज़ एक चारपाई जीतना था, इसी में हम दोनों भाई रहते भी थे। आईटी कंपनी के लिए कंप्यूटर सबसे जरुरी होता है। इसलिए सबसे पहले एक कंप्यूटर किश्तों पर ख़रीदा और सॉफ्टवेर एवं वेबसाइट बनाने का काम शुरू किया ।”

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नए आईडिया पर काम करने के दौरान उन्होंने सोचा की हम सिर्फ वेबसाइट कंपनी हैं और कोई भी आईटी कंपनी एक निश्चित दायरे में ही होती है तो देश के कोने–कोने में ग्राउंड लेवल पर केसे अपनी पहचान बनाई जाये और देश व आम आदमी के लिये हर क्षेत्र में कुछ किया जायें? और फिर हमनें हमारा नेटवर्क बनाना स्टार्ट किया क्योंकि ये जब ही सम्भव था तब हमारे पास देश के हर राज्य, जिला, शहर, तहसील, पंचायत, गाँव में डोग्मा का कोई नेतृत्व करे और आज डोग्मा सॉफ्ट लिमिटेड़ देश के 34 राज्यों, केंद्रशासित प्रदेश, 613 जिलों में 10,000 बिज़नेस पार्टनर्स के साथ काम कर रहीं हैं।

साथ की साथ हमने आईटी का यूज़ कर के हर क्षेत्र के लिए काम करना स्टार्ट किया। आज हम स्टार्टअप कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन से लेकर उनके बिज़नेस की ऑनलाइन प्रजेंस के लिए आईटी सर्विसेज कम से कम पैसों में उपलब्ध करवा रहें है। तभी तो आज हमारे पास जम्मू कश्मीर से लेकर तमिलनाडु के सेलम तक क्लाइंट है। साथ-साथ SME और लघु उद्यमियों को जागरूक कर रहें है कि वों उनके व्यापार को बढ़ाने के लिये, वो डिजिटल मीडिया का आसान तरीके से कैसे यूज़ करे?

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जो बिज़नेसमेन हैं उनको आईटी से जोड़कर उनके बिज़नेस की वर्ल्ड लेवल पर पहचान बनाने में सहायता कर रहें है और जो बड़े ब्रांड है उनको देश के हर कोने में ग्रामीण क्षेत्र तक हमारें बिज़नेस पार्टनरो के माध्यम से पंहुचा सकते हैं। भारत में आज भी ऑनलाइन कंपनियों को लोगों को लोकल भरोसा दिलाने व समझाने के लिये, ऑफलाइन टीम की जरुरत है।

हमने सोचा की शहर जैसी सभी सुविधायें यदि गाँवो में प्रदान की जाये तो रोजगार के साथ-साथ ग्रामीण भारत के लोगों को शहर आने की जरुरत नहीं पड़ेगी उससे इंधन, पैसा व समय बचेगा एवं सड़कों पर ट्रैफिक कम होगा और दुर्घटनाओ में भी कमी आएगी। उसके लिए एवं डिजिटल इंडिया में सहयोग देने एवं लोगो को स्मार्ट बनाने के लिए ‘बि स्मार्ट सिटिज़न’ एप्लीकेशन बनाई, इस एप्लीकेशन का मुख्य उधेश्य आम लोगों को आईटी के तहत दैनिक जीवन के कार्य जैसे रिचार्ज, बिल भुगतान, एटीएम, बस, ट्रेन, फ्लाइट, होटल, टेक्सी बुकिंग, मिनी बैंक, शॉपिंग आदि सुविधाये उपलब्ध करवाना।

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श्याम ने बताया कि आज ज्यादातर स्टार्टअप कंपनिया निवेशकों के पैसे से चलती है उनका कोई रेवन्यू मॉडल नहीं होता। जब तक रेवन्यू मॉडल नहीं होता, बिज़नेस आगे नहीं बढ़ सकता। जो इस तरीकें से कंपनी का मॉडल नहीं रखते, ऐसी कंपनिया थोड़े दिन में बंद हो जाती है। हमनें कंपनी की शुरुआत से अब तक एक रुपया भी कंही से फंडिंग के नाम पर नहीं लिया।

भारत में बेरोजगारी आज एक महामारी का रूप ले चुकी है तो इसे देखते हुये अब हमारा मुख्य उद्देश्य है कि रूरल एन्टरप्रेन्योर(ग्रामीण उद्यमियों ) को बढावा देते हुये लोगों को उनके क्षेत्र में बिना किसी निवेश के रोजगार उपलब्ध करवाना। इससे आसपास के एरिया, गाँव के लोगों को आईटी के माध्यम से दिनचर्या की समस्याओं का समाधान मिले और हम 20 लाख लोगों को रोजगार उपलब्ध करवा कर देश की सबसे बड़ी जॉब देने वाली कंपनी बने।

राजस्थान के श्रीगंगानगर ज़िले के एक छोटे से गाँव ताखरांवाली से आये दो भाई पवन-श्याम गोदारा ने, उन लोगों के लिये भी एक सन्देश दिया है जो विपरीत परिस्तिथियों का रोना रोते हैं तथा यदि चाहत हो कुछ कर गुजरने की तो मुश्किले कभी बाधक नहीं बनती।

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