पर्यावरण प्रदुषण और जलवायु परिवर्तन के क्षेत्र में देश के हालात बहुत गंभीर हैं. समय रहते अगर कदम नहीं उठाये गए तो 2050 तक हालात बदतर हो जायेंगे. विकास की दौड़ में पर्यावरण और प्रकृति के साथ खिलवाड़ किया जा रहा हैं जिसके गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे.

देश के कई शहर प्रदुषण के भयानक स्तर को छु चुके हैं और वायु प्रदुषण से सालाना 10 लाख से ज्यादा लोग मौत के शिकार बन रहे हैं. शहरों में जो पेड़ बचे हुए हैं, वो विज्ञापन होर्डिंग और कीलों से अटे पड़े हुए है जिनके कारण पेड़ों की औसत उम्र घटती जा रही हैं. शहरों की इसी समस्या पर काम कर रही हैं मुंबई का एनजीओ अंघोळीची गोळी.

tushar with volunteers
अंघोळीची गोळी टीम के साथ तुषार वारंग

अंघोळीची गोळी पिछले चार वर्षों से पर्यावरण सरंक्षण के लिए काम कर रही हैं. जल सरंक्षण के लिए वो लोगो को सप्ताह में एक दिन नहाना छोड़ने के लिए कहते हैं. औसतन एक आदमी नहाने में 40-50 लीटर पानी का इस्तेमाल करता हैं और यदि वो एक दिन नहीं नहाये तो उसके स्वास्थ्य पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता हैं.

इसी के साथ अंघोळीची गोळी ने पेड़ों को होर्डिंग और कीलों से मुक्त करने के लिए ‘Nail Free Tree‘ नाम से एक मुहिम चलायी हैं. आमतौर पर पेड़ो पर विज्ञापन करने के लालच में लोग कई होर्डिंग लगा देते हैं और पेड़ो के तने कीलों से भरे पड़े हैं. अन्धविश्वास के कारण भी लोग पेड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं. इस मुहिम के तहत यह संगठन शहर के पेड़ों से गैर कानूनी होर्डिंग हटाने के साथ ही कीलों को निकालता हैं. जिससे पेड़ के स्वास्थ्य पर अनुकूल प्रभाव पड़ता हैं.

tree before and after nail free
कीलों और अतिक्रमण से मुक्त करने के बाद पेड़

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में अंघोळीची गोळी के स्वयंसेवी तुषार वारंग बताते हैं कि प्रसिद्ध वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बोस ने सिद्ध किया था कि पेड़ों में भी फीलिंग होती हैं. उन्हें भी दर्द का अहसास होता हैं. लेकिन कुछ लोग लालच के कारण पेड़ पर कीलों का जाल बिछा देते हैं जो पेड़ो के तंत्रिका तंत्र को बुरी तरह से क्षतिग्रस्त कर देता हैं. इसके चलते पेड़ के विकास में रूकावट आती हैं.

भारतीय कानून के अनुसार भी पेड़ो पर कीले ठोकना गैर कानूनी हैं. पेड़ सार्वजानिक सम्पति हैं अतः कोई भी अपने निजी इस्तेमाल के लिए इन्हे उपयोग नहीं कर सकता हैं. चाहे वो विज्ञापन लगाना हो या कीले ठोकना हो.

event for tushar
अमेरिकी दूतावास के कार्यक्रम में तुषार वारंग को आमंत्रित किया गया

अंघोळीची गोळी के संस्थापक माधव पाटिल बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र के साथ ही कई संस्थान जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे हैं. वो अपने हिस्से का काम कर रहे हैं लेकिन इन्हे सफल बनाने के लिए आम आदमी को भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभानी पड़ेगी. अंघोळीची गोळी और ‘Nail Free Tree‘ दोनों ही अभियान जनता के अभियान हैं और वो सक्रिय भूमिका निभा कर जलवायु परिवर्तन में अपना योगदान दे सकते हैं.

यह अभियान मुंबई और पुणे से शुरू हुआ था और अब पिम्परी-चिंचवाड़, भंडारा, ठाणे, पनवेल और कल्याण तक पहुँच चूका हैं. वरिष्ठजनों के साथ ही युवा भी बड़े उत्साह के साथ कार्यक्रमों में भाग लेते हैं. मुंबई में दादर, चर्चगेट, महालक्ष्मी, वर्ली, CSTM और उपनगरीय इलाकों गोरेगाव, विरार, अँधेरी और भयंदर में सक्रिय रूप से अंघोळीची गोळी काम कर रहा हैं.

Nail Free Tree Campaign
पेड़ो को कीलों से मुक्त करने के लिए काम करते हुए Nail Free Tree के स्वयंसेवी

मुंबई के साथ ही पुरे महाराष्ट्र से 50,000 पेड़ो को कीलों से मुक्त किया जा चूका हैं. इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी जागरूकता अभियान चलाया जाता हैं. जिनमें #NailFreeTree और #PainFreeTree शामिल हैं.

तुषार वारंग आगे बताते हैं कि कीले हटाने के साथ ही हम बड़े पेड़ो से ट्री गार्ड हटाकर उन्हें नए पौधों पर लगवाते हैं. इसके साथ ही पेड़ो के आसपास मिटटी और पानी की व्यवस्था भी करते हैं. इसके साथ ही मुंबई जैसे शहरों में वृक्षारोपण का काम भी कर रहे हैं क्योंकि मुंबई के कुल क्षेत्रफल के मुकाबले 15% ही वन क्षेत्र हैं जबकि प्रदुषण के हालात को देखते हुए कम से कम 33% वन क्षेत्र होने चाहिए.

tushar with Raj Thakaray
एक कार्यक्रम में मनसे प्रमुख राज ठाकरे के साथ तुषार वारंग

तुषार वारंग कहते हैं कि ‘Nail Free Tree‘ अभियान के दौरान देश के कानून का भी पालन करते हैं जिनमें Tree Act-1975, Environment Protection Act-1986, Maharashtra Defacement of Property Act-1995 और National Green Tribunal-2015 judgement शामिल हैं. इसके साथ ही लोगों को पेड़ो पर विज्ञापन और कीले न लगाने के लिए प्रेरित करते हैं.

तुषार वारंग या अंघोळीची गोळी अभियान से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, तुषार वारंग और अंघोळीची गोळी की पूरी टीम के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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