देश और दुनिया में कई ऐसे लोग हुए है जो स्कूली शिक्षा में फ़ैल होने के बावजूद अपने पसंदीदा क्षेत्र में सफल होने में कामयाब रहे है । कॉलेज डिग्री के बिना भी इन्होने अपनी मेहनत, दृढ इच्छाशक्ति एवं कभी न हार मानने के जज्बे से सफलता के आयाम स्थापित करते है । वो डिग्री के मोहताज न होकर इनोवेशन एवं नवाचार में विश्वास रखते है । ऐसी ही एक सफलता की कहानी है एक 24 वर्षीय लड़के की । वो कंप्यूटर में अपने शौक के चलते आठवीं कक्षा में फ़ैल हो जाता है और इसके बाद वो अपनी स्कूली शिक्षा छोड़कर एक कंप्यूटर प्रोफेशनल बनने का फैसला करता है । आज देश एवं विदेश की दिग्गज कंपनियों के साथ ही देश की कई नामी सरकारी एजेंसियां इस शख्स की मदद लेती है जिनमे सीबीआई के साथ ही विभिन्न राज्यों के पुलिस डिपार्टमेंट शामिल है । इस युवां कंप्यूटर प्रोफेशनल और उद्यमी का नाम है – त्रिशनित अरोड़ा ( Trishneet Arora ) ।

त्रिशनित एथिकल हैकर हैं जो कि इंटरनेट पर कम्पनीज की वेबसाइट एवं महत्वपूर्ण डाटा की सुरक्षा के लिए सलाह देते है । एथिकल हैकिंग में कंपनी या संस्था के ऑनलाइन नेटवर्क या सर्वर इन्फ्रास्ट्रक्चर के सुरक्षा मानकों को जांचा एवं परखा जाता है। कंप्यूटर क्षेत्र में विशेष हैकिंगकोर्स में सर्टिफाइड हैकर्स इसकी निगरानी करते हैं, ताकि कोई नेटवर्क या सिस्टम (कम्प्यूटर) इन्फ्रास्ट्रक्चर की सिक्युरिटी तोड़कर कंपनी या संस्था की अति-महत्वपूर्ण सूचनाएं न तो चुरा सके और न ही वायरस या दूसरे माध्यमों के जरिए कोई नुकसान पहुंचा सके।

एक मध्यमवर्गीय परिवार 2 नवंबर 1993 को पंजाब के लुधियाना शहर में पैदा हुए त्रिशनित अरोड़ा का बपचन से ही पढ़ाई में मतलब किताबी ज्ञान में रूचि नहीं थी । उनकी कम्प्यूटर में इतनी रुचि थी कि वो अपना सारा वक्त कंप्यूटर पर ही व्यतीत करते थे जिसके चलते उनको बाकी विषयों की तैयारी के लिए उनके पास समय ही नहीं होता था। वे बताते हैं कि आठवीं में पढ़ता था, उस वक्त भी कम्प्यूटर और एथिकल हैकिंग में मेरी दिलचस्पी थी।

एक आम भारतीय परिवार की तरह पढाई में उनकी घटती दिलचस्पी से उनका परिवार परेशान रहने लगा । आठवीं कक्षा में कम्प्यूटर विषय पढ़ने में इतने मग्न हो गये कि बाकि विषय की पढ़ाई ही नहीं की। उसके साथ ही परीक्षा में दो पेपर भी नहीं दिए । जिसके चलते वो आठवीं कक्षा में फेल हो गए।

Trishneet Arora with CBI Team
सीबीआई टीम के साथ ट्रेनिंग सेशन के दौरान त्रिशनित अरोड़ा | Image Source

फेल होने के बाद उनको मम्मी-पापा ने खूब डांटा। दोस्त और परिवार के लोग भी मजाक उड़ाते, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी। फेल होने के बाद रेग्युलर पढ़ाई छोड़ दी और आगे 12वीं तक की पढ़ाई उन्होंने कॉरेस्पॉन्डेंस से की। इसके साथ-साथ वे कम्प्यूटर और हैकिंग के बारे में लगातार नई जानकारियां भी इकट्‌ठा करते रहे। उनकी हाउस वाइफ मां और अकाउंटेंट पिता इस काम को पसंद नहीं करते थे। लेकिन त्रिशनित कम्प्यूटर में अपने शौक को ही करियर बनाना का फैसला कर चुके थे।

शुरुआत में उनकी बातें सुन कर लोग मुस्कुरा देते। मीडिया एवं बाहरी लोग भी गंभीरता से नहीं लेते थे । लेकिन फिर वह अपने काम के जरिए साबित करते कि कैसे विभिन्न कंपनियों का डाटा चुराया जा रहा है और इन दिनों हैकिंग के क्या तरीके इस्तेमाल किए जा रहे हैं। धीरे-धीरे उनके काम को मान्यता मिलने लगी। कंपनियां उनके काम को सराहने लगीं।

21 वर्ष की उम्र में इन्होने एक कंपनी खोलने का निर्णय लिया और टीएसी सिक्युरिटी (TAC Security) नाम की साइबर सिक्युरिटी कंपनी की नींव रख दी। कंपनी के पिछले तीन वर्ष के कार्यकाल में इन्होने अब तक देश के बड़े ब्रांड्स एवं सरकारी एजेंसियां जैसे रिलायंस, सीबीआई, पंजाब पुलिस,एयरटेल, सोनालिका , NPCI , गुजरात पुलिस, अमूल और एवन साइकिल जैसी कंपनियाें को साइबर से जुड़ी सर्विसेज दे रहे हैं।

लोगों को कंप्यूटर नेटवर्किंग एवं हैकिंग से बचाने और जागरूक करने के लिए उन्होंने ‘हैकिंग टॉक विद त्रिशनित अरोड़ा’ ‘दि हैकिंग एरा’ और ‘हैकिंग विद स्मार्ट फोन्स’ जैसी किताबें लिख चुके हैं।

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रिलायंस इंडस्ट्रीज टीम के साथ ट्रेनिंग सेशन के दौरान त्रिशनित अरोड़ा | Image Source

दुबई और यूके में कंपनी का वर्चुअल ऑफिस है। करीब 40% क्लाइंट्स इन्हीं ऑफिसेस से डील करते हैं। दुनियाभर में 50 फॉर्च्यून और 500 कंपनियां क्लाइंट हैं। सेल्फ स्टडी और पिता के साथ मिलकर किये गए प्रयोगों से तैयार हुए, यूट्यूब के वीडियो से हैकिंग सीखने में मदद मिली । इन्होंने तत्काल प्रभाव से हैकिंग से निपटने के लिए उत्तर भारत की पहली साइबर इमरजेंसी रेस्पॉन्स टीम का भी गठन किया है जो हैकिंग से उपजी आपातकाल की परिस्तिथियों से सरलता से उबरा जा सके ।

अब त्रिशनित की नजर कंपनी के बिजनेस को अमेरिका में स्थापित करने की है। उन्होंने एक अलग इंटरव्यू में कहा था कि वे कंपनी का टर्नओवर बढ़ाकर इसे दो हजार करोड़ रुपए तक ले जाना चाहते हैं।

त्रिशनित का कहना है कि फेल होने के बाद उन्हें ये समझ में आया कि ‘पैशन’ के आगे पढ़ाई मायने नहीं रखती। फिलहाल वह अपने काम में व्यस्त हैं और बीसीए (कॉरेस्पॉन्डेंस) कर रहे हैं। भविष्य में वक्त मिलने पर मैनेजमेंट के साथ ग्रैजुएशन करना चाहेंगे। हालांकि, वह डिग्री या फॉर्मल एजुकेशन को कामयाबी या जीवनयापन के लिए जरूरी नहीं मानते।

वह कहते हैं कि स्कूली पढ़ाई को उतना ही महत्व दीजिए जितना जरूरी है। ये जीवन का हिस्सा है लेकिन पूरा जीवन नहीं है। इसके साथ ही असफलताओं से कभी निराश नहीं होना चाहिए, क्योंकि असफलताएं ही आगे बढ़ने का रास्ता बताती हैं और आपको अपने मजबूत पक्ष का बेहतर पता चलता है।

त्रिशनित और उनकी टीम को बेहतरीन कार्य के लिए फ़ोर्ब्स मैगज़ीन ने 2018 के Forbes 30 under 30 India सूची में शामिल किया है । इसके अलावा भी उनको कई अन्य उद्यमिता पुरुस्कारो से नवाजा जा चूका है । Be Positive, त्रिशनित और उनकी पूरी TAC Security टीम को शुभकामनाए देती है और उम्मीद करती है कि आपसे प्रेरणा लेकर हमारे पाठक जीवन में कुछ सकारात्मक करेंगे ।

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