अगर आप कुछ करोगे तभी सीखोगे , भले ही आप असफल क्यों न होते हो !

यह शब्द एक 23 वर्षीय युवा के है जो मायानगरी मुंबई में रहते है लेकिन पुरे देश की ट्रेवल इंडस्ट्री को बदलने का माद्दा रखते है । जिस उम्र में युवा स्कूल एवं कॉलेज में पढ़ रहे होते है उस समय ये युवा देश की ट्रेवल इंडस्ट्री को समझने के लिए देश के मुख्य पर्यटक स्थलों की खाक छानता है । देश में मौजूद ऑनलाइन एवं ऑफलाइन ट्रेवल एजेंसियों से आम भारतीय ठगा हुआ मह्सूस करता है क्योकि कई बार उन्हें मन मुताबिक जगह या अनुभव नहीं मिल पाता है । इसी समस्या को दूर करने के लिए उन्होंने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसी (Yatrik)  खोली है जिसके जरिये वो लोगों का ट्रेवल एक्सपीरियंस बदलना चाहता है । इस युवा उद्यमी का नाम है – विराज राठौड़ (Viraj Rathod)

विराज अपनी कंपनी यात्रिक (Yatrik)  के माध्यम से लोगों का यात्रा अनुभव सुधारने में लगे हुए है । वो भारत के सभी महत्वपूर्ण पर्यटक स्थलों पर ट्यूर और कैंपिंग की सुविधा देते है । खासकर आजकल के युवाओं में ट्रेंड पर चलने वाले स्थल जैसे लेह-लद्दाख और मनाली के विशेष पैकेज उपलब्ध है जिनमें आपको पर्सनल असिस्टेंट के साथ ही यात्रा के दौरान पूरा सहयोग मिलता है । यात्रिक के जरिये आपकी यात्रा को एक यादगार अनुभव बनाने के लिए विराज और उनकी टीम पूरी शिद्दत से लगी हुई है । इसके साथ ही वो ट्रेकिंग एवं एडवेंचर ट्रिप तथा योगा एवं फॅमिली ट्यूर भी करवाते है ।

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अपने एक कैंप के दौरान यात्रिक टीम

यात्रिक के साथ विराज जहाँ लोगों के ट्रेवल एक्सपीरियंस को शानदार बना रहे है लेकिन उनका सफर बहुत ही संघर्षमय एवं रोमांचकारी रहा है । मुंबई के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मे विराज ने बचपन से ही बड़े सपने देखना शुरू कर दिए । Be Positive से खास बातचीत में विराज राठौड़ (Viraj Rathod) ने बताया कि ” बचपन कि एक घटना ने उनके जीवन जीने के नजरिये को पूरी तरह से बदल दिया। चॉकलेट खाने के बहाने उन्होंने अपने पापा की जेब से 100 रुपये चुरा लिए थे । चोरी पकड़ में आने के बाद मेरी अच्छी-खासी धुनाई हुई और उसके बाद मेरे पापा ने मुझसे कहा कि 100 रुपये जब तू कमा लेगा तब तुझे इनकी अहमियत समझ में आएगी |”

इस घटना ने विराज के जीवन में एक नए युग का संचार किया । अपने खर्चे निकालने के लिए माता-पिता से छुपकर वो लोगो के घरों में अख़बार बांटने का काम करने लगे । उस समय उन्हें पैसे तो बहुत कम मिलते थे लेकिन इस काम के बदले उन्हें कई ऐसे लोगों से मिलने का मौका मिला जो खुद के बलबूते पर कुछ न कुछ कर रहे थे ।

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अखबार बाँटने से उनको 450 रुपये महीने के मिलते थे जो उनकी पॉकेट मनी के लिए काफी थे । इसके बाद उन्होंने एक इवेंट कंपनी ज्वाइन जिससे उन्हें 300 रुपये प्रतिदिन की आमदनी होने लग गयी थी । इस सब के बीच विराज ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा संस्कार इंग्लिश हाई स्कूल से पूरी कर ली । वो बहुत बार स्कूल से छुट्टी लेकर भी इवेंट में काम करने चल जाते थे ।

एक आम भारतीय परिवार की तरह उनको भी इंजीनियरिंग डिप्लोमा के लिए NIIT में प्रवेश दिला दिया तथा साथ में ही कॉमर्स में ग्रेजुएशन के लिए MK कॉलेज में दाखिला लिया । अपने माता-पिता से छुपकर विराज अभी भी इवेंट मैनेजमेंट में काम कर रहे थे । इसके कारण उन्हें कई बार कॉलेज में जाने में दिक्कत आने लगी । एक दिन कॉलेज का एक लेटर विराज के घर पर आता है जिसमे उसके कॉलेज न जाने का जिक्र होता है । यह बात उनके परिवार को बहुत नागवार गुजारी क्योंकि बड़ी मुश्किल से उनके पिता अपना घर चला रहे थे । इवेंट मैनेजमेंट में काम करने को लेकर उनके पिता एक बार फिर भड़क गए लेकिन इसके बाद विराज ने कॉलेज नहीं जाने का कठिन निर्णय लिया ।

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आगामी जून के लिए लद्दाख ट्रिप पर होगी यात्रिक टीम

कॉलेज छोड़ने के बाद विराज राठौड़ (Viraj Rathod) इवेंट मैनेजमेंट कंपनी में काम करने में व्यस्त हो गया लेकिन अभी भी वो अपनी जॉब से खुश नहीं था । उसे खुद का कुछ करने का बड़ा प्लान था इसके लिए वो अपनी नौकरी छोड़कर लगभग एक साल तक लेह-लद्दाख एवं मनाली में पर्यटकों के बीच रहा जिससे ट्रेवल इंडस्ट्री की बारीकियां सीखने में उसे काफी मदद मिली । वहां पर रहने के दौरान विराज ने महसूस किया कि भारतीय ट्रेवल इंडस्ट्री में काफी संभावनाए छुपी हुई है । यदि आप लोगों के ट्रेवल एक्सपीरियंस को शानदार बनाते है तो लोग पैसा खर्च करने में पीछे नहीं हटते है ।

पर्यटक स्थलों का गहन एवं व्यापक रिसर्च के बाद विराज मुंबई लौट आये और अपने दोस्त के साथ एक ट्रेवल एजेंसी खोलने की योजना पर काम करने लग गए । विराज चाहते थे कि मार्केटिंग करके अन्य बड़ी होटल्स एवं एजेंसी के प्लान बेचने के बजाय लोगों के साथ जाकर उन्हें ट्रैकिंग एवं कैंपिंग का पर्सनलाइज्ड एक्सपीरियंस देना चाहिए । यह आईडिया विराज का चल निकला और बहुत जल्द ही उनको लेह एवं लद्दाख के लिए एक ग्रुप ने कांटेक्ट किया । इसके बाद विराज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और अब तक कई लोगों को अपने अनुभव से बेमिसाल यात्रा अनुभव उपलब्ध करवाए है ।

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विराज अभी अपनी कंपनी की विस्तार योजना में लगे हुए है तथा लोगों को 9 से 5 की जॉब के अलावा भी ट्रेवल एवं अन्य हॉबी के जरिये पैसा कमाने के लिए प्रेरित कर रहे है । दो लोगों के साथ शुरू हुई विराज की कंपनी जल्द ही स्टार्ट-अप के रूप में काम करना शुरू करने वाली है । २३ वर्षीय विराज ने कम उम्र में ही अपने सपनों को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत और परिश्रम का कठिन रास्ता चुना है जिसका फल उनके प्रतिदिन बढ़ रहे ग्राहकों के रूप में दिखता है ।

Be Positive, विराज राठौड़ (Viraj Rathod) और उनकी पूरी Yatrik टीम को शुभकामनाए देती है और उम्मीद करती है कि आपसे प्रेरणा लेकर हमारे पाठक जीवन में कुछ सकारात्मक करेंगे ।

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