प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया का सपना साकार करने के लिए ग्रामीण युवा भी अब शहर के युवाओं से कदमताल मिला रहे है. कई क्षेत्रो में वो न केवल अपनी भागीदारी निभा रहे है बल्कि नवपीढ़ी का नेतृत्व भी कर रहे है. ऐसे ही एक नौजवान ने अपनी सरकारी नौकरी के साथ ही मोबाइल एप्लीकेशन बनाना सींखा और आज लगभग 150 से ज्यादा मोबाइल ऐप्प बना चुके है. शिक्षा के क्षेत्र में बनायीं गयी मुफ्त एप्लीकेशन लाखो बच्चों के करियर को संवारने में मदद कर रही है. इस प्रतिभाशाली नौजवान का नाम है सुरेंद्र तेतरवाल (Surendra Tetarwal).

सुरेंद्र अब तक न केवल 150 से अधिक मुफ्त एंड्राइड एप्लीकेशन बना चुके है बल्कि नए लोगो को मोबाइल एप्लीकेशन बनाने के लिए मदद करने के लिए एक सॉफ्टवेयर (The Apps Station) का निर्माण भी किया है. जिसकी मदद से कोई भी शिक्षित व्यक्ति बिना कोई तकनिकी ज्ञान के मोबाइल एप्लीकेशन बना सकता है. कभी संघर्ष करके लैपटॉप लाने वाले सुरेंद्र अब ग्रामीण युवाओ को डिजिटल क्रांति में अव्वल बनाने के लिए अग्रसर है.

कई कंपनियों ने उनके मोबाइल एप्स और एप मेकर सॉफ्टवेयर को खरीदने की इच्छा जताई लेकिन सुरेंद्र इन सब को फ्री में रखना चाहते थे इसलिए उन्होंने मना कर दिया है

सुरेंद्र तेतरवाल मुलत: राजस्थान के सीकर जिले के नानी ग्राम के रहने वाले है. अभी राजस्थान वाणिज्यक कर विभाग में टैक्स असिस्टेंट के पद पर कार्यरत है. इनका जन्म 17 दिसंबर 1983 को हुआ. घर में शुरू से ही पढाई का माहौल था और इनके पिता सरकरी स्कूल में प्रिंसिपल के पद से सेवानिवृत हो चुके है.

सुरेंद्र ने अपनी शुरुआती पढाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की और सीकर के श्री कल्याण कॉलेज से स्नातक करने के बाद उन्होंने बी. एड करने का फैसला किया, बी एड के बाद उन्होंने राजकीय सेवा में जाने के लिए तैयारी करना शुरू किया और 2011 टैक्स असिस्टंट के पद पर चयनित हो गए.

सामान्यत : ग्रामीण इलाकों में युवा सरकारी नौकरी में लगने के बाद पढाई छोड़ देते है और अपना जीवन गुजर-बसर करना शुरू कर देते है लेकिन सुरेंद्र ने पढ़ना जारी रखा. उन्होंने सरदार शहर के एक विश्विद्यालय से पत्राचार से MCA करने का निंर्णय किया.

आज भले ही सुरेंद्र 150 से अधिक ऐप बना चुके है लेकिन उन्होंने कॉलेज की पढाई के दौरान ही पहली बार कंप्यूटर लैब में कंप्यूटर देखा था. MCA करने के दौरान उनकी रूचि कंप्यूटर में बढ़ती गयी. जिसके चलते उन्होंने खुद से ही एंड्राइड एप्लीकेशन बनाना सींखा.

बी पॉजिटिव से बातचीत के दौरान सुरेंद्र ने बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए जब कोचिंग करते थे उसी समय यह मोबाइल ऐप बनाने का आयडिया आया क्योंकि अधिकांश नोट्स घर रह जाते थे. तब सोचते थे कि अगर नोट्स मोबाइल में होते तो बहुत अच्छा होता.

अपने मित्र सुरेश ओला के साथ सुरेंद्र तेतरवाल

इसके बाद सरकारी नौकरी जारी रखते हुए सुरेंद्र ने अपने मित्र सुरेश ओला(Suresh Ola)के साथ मिलकर मोबाइल ऐप बनाने का काम शुरू किया. सुरेश और सुरेंद्र दोनों बचपन के मित्र है और साथ में ही प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की थी. इसके बाद सुरेश का चयन सरकारी अध्यापक के रूप में हो गया. वर्तमान में सुरेश पूरे राजस्थान के शिक्षा के पोर्टल में सहायक शाला दर्शन के पद पर है.

अपनी पहली ऐप बनाने के दौरान आयी दिक्कतों के बारे में सुरेंद्र ने बताया कि हम एंड्राइड ऐप बनाना सिंख रहे थे तो हमारा सारा काम गूगल और यूट्यूब के माध्यम से मिले ज्ञान से ही होता था.हमारी पहली मोबाइल एप ऑल एग्जाम जीके थी जिसके लिए कंटेंट इकट्ठा करने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ा. विभिन्न कोचिंग क्लासेज में हमारे मित्र पढ़ाते हैं हमारे विषय के अलावा अन्य विषय का कंटेंट उस विषय के अध्यापक साथियों से तैयार करवाते हैं

एक बार कारवां शुरू हुआ तो सुरेंद्र और सुरेश ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. वो अब तक 150 से ज्यादा मोबाइल ऐप बना चुके है जिनमे से विश्व सामान्य ज्ञान, रिजनिंग जीके, ग्राम पंचायत एप, ITI electrician theory और विश्व इतिहास के ऐप सबसे ज्यादा प्रसिद्ध है. अब एक उनके ऐप को लगभग एक करोड़ लोग डाउनलोड कर चुके है जबकि महीने में लगभग 25 करोड़ पेज व्यूज उनको मिलते है.

गांव के ही लड़को के द्वारा मोबाइल ऐप बनता देख उनके गांव के सरपंच ने गांव के लिए ऐप बनाने की योजना बनाई जिस पर गांव के विकास कार्यो, सरकारी योजनाओ, ग्राम के बारे में जानकारी और कई सरकारी सुविधाए उपलब्ध करवाने वाली ग्राम पंचायत ऐप का निर्माण इनके द्वारा किया गया.

अपने मित्र सुरेश ओला के साथ काम करते हुए सुरेंद्र तेतरवाल

सरकारी नौकरी में होने के कारण समय प्रबंधन के बारे में सुरेंद्र ने बताया कि सरकारी सेवा में सुबह 9:30 से शाम को 6:00 बजे तक कार्य रहता है. शनिवार और रविवार को छुट्टी होने के कारण पूरा दिन फ्री रहते हैं. इसके अलावा देर रात तक काम करते हैं. कई बार अवकाश लेकर भी इन्होने ऐप बनाने का काम किया है.

सुरेंद्र और सुरेश को अब तक कई अवार्ड भी मिल चुके है जिनमें भोपाल में केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान नई दिल्ली द्वारा आयोजित 22 व ऑल इंडिया Children’s educational audio video festival में उन्हें बेस्ट रिसर्च इन न्यू मीडिया आईसीटी अवार्ड मिला था.

तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से अवार्ड लेते हुए सुरेंद्र तेतरवाल

मार्च 2018 में राजस्थान सरकार द्वारा जयपुर में आईटी डे के अवसर पर तत्कालीन मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे ने ई गवर्नेंस अवॉर्ड दिया. जुलाई 2018 में बीकानेर में आयोजित डिजिटल फेस्टिवल में आयोजित प्रतियोगिता में उन्हें द्वितीय स्थान मिला था.

इसी के साथ उन्हें एनसीईआरटी ने AR और वर्चुअल रियलिटी जैसी नवीनतम तकनीक के जरिये मोबाइल ऐप बनाने के लिए नयी दिल्ली में आयोजित सेमिनार में आमंत्रित किया. इसमें पूरे देश से 40 से ज्यादा स्कूल कॉलेज और एनसीईआरटी के अध्यापकों ने भाग लिया था.

हमारे पाठकों को सन्देश देते हुए सुरेंद्र कहते है कि आज के तकनीकी युग में हम मोबाइल जैसे उपकरणों से दूर नहीं रह सकते लेकिन हम हमारे बच्चों को एक अच्छे रास्ते की तरफ जरूर मोड़ सकते हैं.

किसी भी कार्य को अगर आप कर रहे हैं तो आप में संयम को होना बहुत जरूरी है. इसके अलावा अगर आपका कोई शौक है तो उस शौक को भी आप अपना कार्य क्षेत्र बनाकर प्रसिद्धि पा सकते हैं. इसके लिए आपको आपकी नौकरी या काम नहीं छोड़ना है बल्कि बेहतर समय प्रबन्धन से अपने लक्ष्य तक पहुंचना है.

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