दौड़भाग भरी ज़िन्दगी में लोगो के पास अपने परिवार के लिए भी समय नहीं है लेकिन केरल के इस शख्स ने बेजुबान पक्षियों के लिए गर्मी में पानी की व्यवस्था करने के लिए 6 लाख रुपये खर्च कर दिए. जंगलों के साथ गांवों में भी गर्मी आने के साथ ही सभी मुख्य जल-स्रोतों में पानी सुख जाता है. जल संकट की समस्या में पक्षी एवं बेजुबान जानवर नालियों से पानी पीने को मजबूर होते है. बेजुबान पक्षियों के दर्द को समझ कर गर्मी में उनके लिए पानी की व्यवस्था कर रहे है : श्रीमन नारायणन (Sreeman Narayanan).

केरल के एर्नाकुलम जिले के मुप्पाथादम (Muppathadam ) गांव में रहने वाले 70 वर्षीय श्रीमन नारायणन पक्षियों की प्यास बुझाने के लिए अब तक 6 लाख रुपये खर्च कर चुके हैं.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीमन नारायणन एक अवॉर्ड विनिंग लेखक और लॉटरी डीलर है. उम्र के इस पड़ाव में अपनी जिंदगी का ज्यादातर हिस्सा प्रकृति एवं पशु-पक्षियों की रक्षा में बिताते हैं. इसके लिए वो गर्मियां शुरू होते ही लोगों के बीच मुफ्त में मिट्टी के बर्तन बांटना शुरू कर देते हैं, ताकि चिलचिलाती धूप में भी पक्षियों को पानी मिल सके.

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बेजुबान पक्षियों की प्यास बुझाने में अपना जीवन बीता रहे है नारायणन | Photo Credits : NBT

नारायणन अबतक पक्षियों की प्यास बुझाने की खातिर कुल 6 लाख रुपये की कीमत के 10 हजार मिट्टी के बर्तन बांट चुके हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने बीते साल एर्नाकुलम जिले में करीब 15 लाख रुपये की कीमत के 50 हजार पौधे मुफ्त बांटे थे. वो अपने गांव के आसपास में लगभग 10,000 पेड़ भी लगा चुके हैं. लोगो को पर्यावरण के प्रति सचेत करते हुए वो गांव वालों से भी कहते हैं कि हर व्यक्ति अपने घर के आगे एक फलदार पेड़ जरूर लगाए ताकि पक्षी उसके फल खा सकें.

नारायणन कहते हैं, ‘गर्मियों के मौसम में पक्षियों के लिए पानी का सबसे अहम जरिया हम इंसान ही हैं. वो बेजुबान हमसे मांगकर तो पानी पी नहीं सकते. ऐसे में हमें खुद ही ये पहल करनी होगी. अगर हम एक बर्तन में भी पानी रख दें, तो उससे करीब 100 से ज्यादा पक्षी अपनी प्यास बुझा सकती हैं.

नारायणन ने वर्ष 2018 में An Earthen Pot For Life Saving Water नाम के प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी. इसके तहत वो लगभग 9,000 मिट्टी के बर्तन सोसाइटी, क्लब और शैक्षणिक संस्थानों को बांट चुके हैं.

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दस हज़ार पेड़ लगा चुके है नारायणन | Photo Credits : YourStory

मलयालम और इकोनॉमिक्स में पोस्ट ग्रेजुएट नारायणन को साल 2016 में राज्य सरकार उनकी कविता ‘कुट्टीकालुडे गुरुदेव’ के लिए सम्मानित कर चुकी है. इतना ही नहीं, वो केरल की ‘पेरियार नदी’ में फैले प्रदूषण को लेकर भी कई किताबें लिख चुके हैं. उन्हें पर्यावरण की रक्षा के प्रयासों के लिए हाल ही SK Pottekkatt पुरस्कार दिया गया है.

अगर आप भी श्रीमन नारायणन के इस नेक काम में योगदान देना चाहते है तो घर पर किसी भी बर्तन में अपनी छत, बालकनी या अन्य जगह पर पक्षियों के लिए पानी रखकर बेजुबान प्राणियों की प्यास बुझाइये.

बी पॉजिटिव इंडिया, श्रीमन नारायणन के नेक काम और जज्बे को सलाम करता है. हम अपने पाठकों से निवेदन करते है कि आप भी बेजुबान प्राणियों के लिए हरसंभव मदद करे.

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