देश में हर साल हज़ारो टन कपड़ें कचरे के ढेर में चले जाते हैं जिसके कारण पर्यावरण प्रदूषित होता हैं. डेनिम एवं जीन्स का कपड़ा काफी मजबूत होता हैं जिसके कारण उसे गलने में काफी समय लग जाता हैं. ज्यादातर लोग जीन्स या डेनिम के कपड़ें को पूरा इस्तेमाल किये बिना ही पहनना छोड़ देते हैं और कचरे का हिस्सा बना देते हैं.

इस समस्या के समाधान के लिए एक फैशन डिज़ाइनर, एक इंजीनियर और एक कपड़ें का बिज़नेस करने वाले व्यक्ति ने साथ में मिलकर गजब का आईडिया निकाला हैं. इससे न केवल कपड़ें के प्रदुषण से राहत मिलती हैं जबकि जरूरतमन्द बच्चों को मजबूत बैग, जूते और स्कूल किट मिलती हैं. इसके साथ ही वो रोज़गार भी पैदा कर रहे हैं जिससे लोगो के जीवन में सकारात्मक बदलाव आ रहा हैं.

Solecraft Team
सोलक्राफ्ट के संस्थापक निखिल गहलोत, मृणालनी राजपुरोहित और अतुल मेहता

राजस्थान के जोधपुर शहर में मृणालनी राजपुरोहित, निखिल गहलोत एवं अतुल मेहता ने 2019 में सोलक्राफ़्ट (SOLECRAFT) की स्थापना की. इसका मुख्य उद्देश्य देश में एक सामाजिक एवं आर्थिक परिवर्तन के साथ पर्यावरण प्रदुषण को कम करने का हैं.

सोलक्राफ़्ट नवप्रवर्तनकारी तकनीकों का उपयोग करते हुए डेनिम से बने कपड़ों, जैसे की जींस आदि, जिन्हें कि लोग आम तौर पर पूरा इस्तेमाल किए बिना ही में फेंक देते हैं, को अपसाइक्लिंग के द्वारा नया रूप देकर आम सुविधाओं से वंचित छात्रों के लिए स्कूल बैग, जुत्ते और पाउच में बदल देते हैं.

solecraft products
पुरानी जीन्स से बने सोलक्राफ्ट के उत्पाद

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान मृणालनी राजपुरोहित बताती हैं कि सोलक्राफ़्ट अपनी कोशिशों से दुनिया में कपड़ों से होने वाले पर्यावरण को नुक़सान को रोक रहा हैं. उन कपड़ों को जरूरतमंद बच्चों के लिए एक विद्यालय ‘किट’ में अपसाइक्लिंग द्वारा परिवर्तित कर सदुपयोग कर रहा हैं.  एक ही जींस द्वारा विद्यालय ‘किट’ बनाया जा सकता है, जिसमें एक बस्ता, पेंसिलों के लिए एक केस (पाउच)एक जोड़ी चप्पल होते हैं.

निखिल गहलोत बताते है कि सोलक्राफ़्ट डेनिम जींस व अन्य कपड़ों को फेंकने की बजाय दान करने के लिए लोगों को प्रेरित करता है और स्वयं ज़्यादा से ज़्यादा डेनिम्स को अपसाइकल कर जरूरतमंद बच्चों तक पहुँचाने के लिए कार्यरत हैं. शहरों में दान करने के लिए पॉइंट बनाये गए हैं जिनके जरिये कोई भी व्यक्ति अपनी पुरानी जीन्स दान कर सकता हैं. जीन्स की साफ सफाई के बाद इससे स्कूल बैग एवं जुत्ते बनाये जाते हैं.

bags to kids
सोलक्राफ्ट के उत्पादों के साथ जरूरतमंद बच्चे

अतुल मेहता बताते हैं कि सोलक्राफ़्ट ने अगले एक वर्ष में एक लाख बच्चों की किट देकर मदद करने का लक्ष्य तय किया हैं. इस प्रयास में सोलक्राफ़्ट कुल 10 टन डेनिम जींस को अप-साइकल करेगा. इस तरह, सोलक्राफ़्ट उस से होने वाले प्रदूषण, जो कि हवा, पानी और ज़मीन को कई टन ठोस, तरल व गैसीय पदार्थों से प्रदूषित करता, को भी रोकने में अपना योगदान देगा व लोगों को भी इस बारे में जागरूक करेगा.

सोलक्राफ़्ट जल्द ही एक ऐसे मुक़ाम तक पहुँचना चाहता है जहाँ ऐसे जरूरतमंद बच्चों की संख्या को घटाया जा सके जिनके पास पढ़ने के लिए स्कूल बैग एवं जुत्ते न हो. इसी के साथ लगभग 1000 से ज़्यादा कारीगरों को रोज़गार का मौक़ा भी प्रदान कर रहा है.

सोलक्राफ़्ट की सह-संस्थापक मृणालनी राजपुरोहित एक फ़ैशन डिज़ाइनर हैं एवं सतत फ़ैशन की दिशा में कार्यरत हैं. फैशन और क्लॉथिंग इंडस्ट्री में कई वर्षों से कार्य कर रही हैं.अपनी रचनात्मकता के प्रयोग से कपड़ों को नए डिज़ाइन और रूप में लोगो तक पहुंचाने में लगी हुई हैं.

Solecraft office
सोलक्राफ्ट के ऑफिस में काम करते हुए कर्मचारी

सह-संस्थापक निखिल गहलोत पेशे से इंजीनियर हैं एवं नवीन तकनीकों को जन-जन तक पहुँचने के लिए कार्यरत हैं. पिछले चार साल से वो एनजीओ और कम्पनीज के साथ काम करने का अनुभव रखते हैं. उनके द्वारा किये गए कार्य लिम्का बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकार्ड्स के साथ ही कई पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं. देश के साथ ही सिंगापुर, मलेशिया और ब्रुसेल्स में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 

सह-संस्थापक और सीईओ अतुल मेहता कपड़ा उद्योग के अपने लम्बे अनुभव के साथ अपने पर्यावरण हितैषी विचारों का संगम करा जरूरतमंदों को इसके अनुरूप आवश्यक सुविधाएँ मुहैया करने का विचार रखते हैं तथा सोलक्राफ़्ट के माध्यम से इस पुनीत कार्य को पूरा करने में लगे हुए हैं.

अगर आप भी सोलक्राफ़्ट(Solecraft) से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, सोलक्राफ़्ट की पूरी टीम के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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