भारतीय परिवार में शादी का मतलब केवल वर एवं वधु की शादी ही नहीं होता है जबकि शानदार रिसेप्शन एवं अपने स्टेटस सिंबल को बचाने के लिए अक्सर माता-पिता अपने बच्चों की शादी में लाखों रुपये पानी की तरह बहा देते है । टेंट से लेकर बारात के स्वागत और भव्य आयोजनों में बेशुमार पैसा खर्च कर दिया जाता है । परिजनों के महंगे कपड़े खरीदने से लेकर महंगा शामियाना, बैंडबाजा, डीजे व भोजन के अलावा बारातियों की पूरी आवभगत का इंतजाम होता है।

लेकिन कुछ लोग होते है जो भारतीय परंपरा के अनुसार शादी तो करते है लेकिन उनका आयोजन उतना ही सादगी पूर्ण रहता है और वो तथाकथित सभ्य समाज के सामने एक उदहारण पेश करते है। ऐसी ही एक शादी का गवाह बना राजस्थान राज्य का कोटा शहर । पुरे भारत में अपनी कोचिंग सेण्टर और परमाणु संयंत्र के लिए प्रसिद्ध इस शहर में बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर शहर में एक जोड़े ने अनूठे अंदाज में अपना विवाह किया। इस विवाह में जरूरतमंद लोगों को नए परिधान दिए गए तथा वहीं निराश्रित बच्चों को भोजन कराया गया।

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पुणे में एक मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर कार्य करते हुए कोटा के शिखर खन्ना एवं दीक्षा पंचोली एक दूसरे को दिल दे बैठे । अपने प्यार के परवान चढ़ने पर उन्होंने घर वालों को लव मैरिज के लिए मनाना शुरू कर दिया तथा अपने बच्चों की भावनाओ का ख्याल रखते हुए उनके परिवार वालों ने भी इस शादी के लिए रजामंदी दे दी ।

दीक्षा और शिखर चाहते थे कि उनकी शादी कुछ अलग तरीके से हो तथा शादी में पैसा बहाने के बजाय सादगीपूर्ण तरीके से रस्मों को निभाया जाये । इस शादी में रिश्तेदारों के साथ ही जरूरतमंद लोगों ने भी शिरकत की और वर-वधु के पाणिग्रहण संस्कार के साक्षी बने ।

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शादी की रस्में निभाती दुल्हन

दीक्षा के पिता पुरुषोत्तम पंचोली ने अपनी बेटी की शादी में बेटी की इच्छानुसार ही व्यवस्थाए की थी । पंचोली ने बताया कि बेटी की शुरू से ही इच्छा थी कि वह शादी अनोखे अंदाज में शादी करेगी। बेटी ने कम्पनी में उसके साथ ही जॉब करने वाले शिखर को अपना जीवन साथी चुना। बेटी की खुशी में अपनी खुशी मानते हुए उसकी इच्छानुसार ही शादी की पूरी तैयारियां की गईं।

दीक्षा की इच्छानुसार ही घर के आसपास रहने वाले गरीब परिवार के करीब 30 बच्चों, महिला-पुरुषों को उनकी पसन्द के कपड़े सिलवाए गए। वहीं करनी नगर विकास समिति में 200 निराश्रित बच्चों के लिए भोजन की सामग्री पहुंचाई। दुल्हन ने परिवार व रिश्तेदारों सहित तुलसी का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। पर्यावरण सरंक्षण के साथ ही उन्होंने स्वच्छ भारत – शिक्षित भारत बनाने का संकल्प लिया

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बेटी को लेने पंचोली रात दो रेलवे बजे स्टेशन पहुंचे तो वहां से बाहर निकलते ही सर्दी में खुले आसमान के नीचे फुटपाथ पर सोते लोग नजर आए। उन्होंने दुल्हन के हाथों से जरूरतमंदों को कम्बल वितरित किए। रास्ते में जहां भी उन्हें फुटपाथ पर जरूरत मंद व्यक्ति नजर आए तो उन्हें कम्बल दिए।

इस तरह शिखर और दीक्षा के साथ ही उनके परिवारों ने समाज के सामने एक नजीर पेश की तथा समाज में बढ़ रहे अनाप -शनाप खर्च को रोकने के लिए अपनी तरफ से एक छोटी लेकिन बहुत ही साहसिक कोशिश की । समाज के लोगों के डर के अलावा सामाजिक नवीनीकरण करने में हमेशा मुश्किल फैसले लेने पड़ते है और यह इस नवविवाहित जोड़े ने कर के दिखाया है ।

Be Positive शिखर और दीक्षा के साथ ही उनके परिवारों का समाज में एक उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए आभार व्यक्त करता है और उम्मीद करता है कि समाज के लोग इससे प्रेरणा लेकर समाज में बदलाव की कोशिश करेंगे ।

Story Credits : Rajasthan Patrika

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