एक ऐसा ब्रांड जिसका इतिहास भारत की आजादी से लगभग दस साल पहले शुरू होता है और इतने सालों में इस ब्रांड ने न केवल भारत के घरों में खास जगह बनाई बल्कि विदेशों में भी अपने स्वादिष्ट खाद्य पदार्थों से धूम मचा दी है । साल 1937 में राजस्थान के बीकानेर में शुरू हुई एक छोटी सी दुकान से जन्मे इस ब्रांड ने तीन पीढ़ियों के व्यापारिक कौशल की बदौलत आज 3500 करोड़ रुपये सालाना टर्नओवर ब्रांड बन गया ।

नमकीन से शुरू हुए इस ब्रांड में आज पैकेज्ड फ़ूड के साथ ही मिठाइयों का भी निर्माण करता है । आज ये ब्रांड भारत के साथ ही अंतराष्ट्रीय ब्रांड्स के साथ कदमताल मिला रहा है । भारत के घर-घर की पहचान बन चूका इस ब्रांड का नाम है हल्दीराम (Haldiram’s) और इस ब्रांड की शुरुआत करने वाले शख्स का नाम है – गंगाविषण जी अग्रवाल (Gangabishan Agarwal)।

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हल्दीराम की शुरुआत वास्तव में ‘हल्दीराम’ के रूप में नहीं बल्कि बीकानेर की एक दुकान ‘भुजियावाले’ के नाम से शुरू हुई थी। साल 1937 की बात है, अभी आजादी को भी 10 साल बाकी थे। बीकानेर के गंगाविषण जी अग्रवाल ने एक छोटे से नाश्ते की दुकान खोली थी।

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बीकानेर में उनकी पहली दुकान

आपको बता दें कि हल्दीराम आज दुनिया के 50 से भी ज्यादा देशों में अपनी पहुंच रखता है। वो आज के समय में हिंदुस्तान के गली-गली मोहल्ले-मोहल्ले पर राज करता है। हमारे घरों के त्योहार इस हल्दीराम के बिना पूरे नहीं होते। हल्दीराम के बिना मानो ऐसा लगता हो जैसे कुछ अधूरा सा पीछे छूट गया हो।

विषण जी अग्रवाल के पिता इस दुकान के जरिए भुजिया के काम में हाथ आजमाना चाह रहे थे। जैसा चाहा वैसा ही हुआ और देखते ही देखते पूरे शहर में विषण जी अग्रवाल के नाश्ते की दुकान ‘भुजियावाले’ के नाम से मशहूर हो गई।

 

Haldiram Founder
हल्दीराम के संस्थापक श्री गंगाबिशन जी अग्रवाल

इसके कई सालों बाद अपना बिजनेस आगे बढ़ाने के लिए हल्दीराम के बैनर तले दिल्ली में 1982 में उन्होंने अपनी एक दुकान खोली। हल्दीराम वास्तव में विषणजी का ही दूसरा नाम था। दिल्ली में एक के बाद दो दुकानें खोली गईं। अब बिजनेस आगे बढ़ने लगा था। धीरे-धीरे उन्होंने भारत के बाहर भी अपने प्रोडक्ट भेजने शुरू कर दिए। देखते ही देखते देश ही नहीं दुनिया के कई देशों में हल्दीराम के उत्पाद बिकने लगे। इसके पीछे की सबसे खास वजह थी उनके प्रोडक्ट की क्वालिटी।

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वर्तमान में नागपुर, कोलकाता, नई दिल्ली तथा बीकानेर में इसकी निर्माण इकाइयाँ हैं। हल्दीराम की अपनी स्वयं की रिटेल चेन स्टोर के अलावा नागपुर, कोलकाता, पटना, लखनऊ, नोएडा और दिल्ली में रेस्तरा हैं।

सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था कि तभी 2015 में अमेरिका ने हल्दीराम के प्रोडक्ट के आयात पर रोक लगा दी। आरोप लगाया गया था कि इनके प्रोडक्ट में कीटनाशक की मात्रा है। बावजूद इन सब के हल्दीराम के बिजनेस पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ा।

हल्दीराम का ऑपरेशन चार जोन में काम करता है। साल 2013-14 के बिजनेस की बात करें तो नॉर्थ इंडिया में हल्दीराम मैन्युफेक्चरिंग का रेवेन्यु 2100 करोड़ रुपए रहा। वेस्ट और साउथ इंडिया में हल्दीराम फूड्स की सालाना सेल 1225 करोड़ के आसपास रही वहीं ईस्ट इंडिया रीजन में हल्दीराम भुजियावाला के नाम से 210 करोड़ का व्यापार होता है।

आज की तारीख में हल्दीराम में सालाना 3.8 अरब लीटर दूध, 80 करोड़ किलो मक्खन, 62 लाख किलो आलू और तकरीबन 60 लाख किलो शुद्ध देशी घी की खपत है।

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आज अग्रवाल परिवार अलग हो गया है लेकिन बिजनेस अपनी जगह बना हुआ है क्योंकि इसने जीता है अपने ग्राहकों का भरोसा, विश्वास और दिखाई थी हिम्मत तिनके से पहाड़ जोड़ने की।

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