shyam sundar jasoda anath ashram : अक्सर हम सोचते है कि किसी और की मदद करने के लिए पैसे की जरूरत होती है लेकिन मेहनत मजदूरी करके अपना पेट पालने वाले दम्पति ने ऐसा काम किया है कि पूरी दुनिया उनको सलाम कर रही है. कंस्ट्रक्शन वर्कर और शाम को टेलरिंग का काम करने वाले श्याम सुन्दर ने बेसहारा बच्चों की मदद करने का बीड़ा उठाया है.

उड़ीसा के पिछड़े इलाके कालाहांडी जिले के धर्मगढ के रहने वाले श्‍यामसुंदर और उनकी पत्‍नी कसूरी पिछले 30 वर्षों से अनाथ बच्चों को पाल रहे है. उन्होंने जसोदा आश्रम (Jasodha Anath Ashram) के नाम से अनाथालय शुरू किया.

इस आश्रम के जरिये इस दम्पति ने सड़क पर घूमने वाले और भीख मांगकर अपना जीवनयापन करने वाले बच्चों की ज़िन्दगी बदलने का काम किया.

यह दम्पति सड़क पर घूमने वाले बच्चों का न केवल भरण-पोषण करते है बल्कि उन्हें काबिल बनाकर आत्मनिर्भर भी बना रहे है. श्यामसुंदर के आश्रम में फिलहाल 23 लड़के और 113 लड़कियां रह रही हैं.

इन बच्‍चों के लिए भोजन की व्यवस्था के साथ ही उनको समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए श्‍यामसुंदर ने अपना नाम भी दिया है.

Shyamsundar at jasoda anath ashram
बच्चों के साथ श्याम सुंदर जी | तस्वीर साभार : NewtonsinIndia

इस आश्रम का खर्चा आम जनता के चंदे के साथ ही मिलने वाली सरकारी मदद से चलता है . अपने नेक काम के चलते इलाके के अन्य लोग भी इनसे जुड़ते जा रहे है.

श्‍यामसुंदर एक इंटरव्यू के दौरान बताते हैं, ‘कुछ साल पहले उन्‍होंने सड़क पर एक अनाथ बच्‍चे को घूमते हुए देखा. उनकी मां ने उसे घर लाकर गोद लेने के लिए कहा. तबसे वह इस काम में जुटे हुए हैं.

हमने इस अनाथालय को दान में मिले पैसों से बनाया है. हमें कई बच्‍चे सड़क किनारे, बसों और अन्‍य सार्वजनिक स्‍थानों पर लावारिस पड़े मिले. इनमें ज्‍यादातर लड़कियां थीं.

नवजात बच्चों की सुरक्षा के लिए कमरा । तस्वीर साभार : NewtonsinIndia

लावारिस बच्चों की सुरक्षा के लिए उन्होंने कालाहांडी में एक कमरे के निर्माण भी किया है जिससे कि नवजात को कुत्तो एवं अन्य जानवरो से बचाया जा सके. शुरुआत में उन्होंने बच्चो को अपने घर में ही पाला लेकिन संख्या बढ़ने के बाद इन्होने लोगो की मदद से अनाथ आश्रम खोलने का निर्णय किया. श्यामसुंदर 12 से ज्यादा लड़कियों की शादी भी करवा चुके है. अपने जैविक पिता की जगह आश्रम के बच्चे श्यामसुंदर का इस्तेमाल करते है.

श्यामसुंदर लोगों से अपील करते है कि वे अपने नवजात बच्‍चों को सड़क पर छोड़ने के बजाय उनके आश्रम में छोड़ जाएं ताकि वो उनका जीवन संवार सकें.

अगर आप भी जसोदा अनाथ आश्रम की मदद करना चाहते है तो इन नंबर 7077298781 / 9937262774 या jasodadharmagarh@gmail.com संपर्क कर सकते है.

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