लोकसभा चुनावों की तारीखे घोषित होते ही देश पर चुनावी रंग चढ़ने लगा है. सत्ता पक्ष और विपक्ष ने चुनाव के लिए कमर कस ली है. भारतीय लोकतंत्र में जनता के द्वारा ही सरकार का चुनाव किया जाता है इसलिए एक आम मतदाता का महत्त्व बढ़ जाता है.

आज एक ऐसे ही मतदाता की बात हो रही है जिसे देश का पहला मतदाता होने के गौरव हासिल है. 1951 के आम चुनाव से लेकर 2014 के चुनाव में वोट किया है और अब 2019 के चुनाव में भी पूरी तरह से तैयार है. इनका नाम है श्याम सरण नेगी (Shyam Saran Negi).

उम्र अब भले ही सौ के पार चली गयी है लेकिन वोट डालने के लिए आज भी वही जज्बा और जोश है. 102 वर्ष की उम्र में भी वो लोगों को मतदान करने के लिए प्रेरित करने का काम कर रहे हैं. श्याम सरण नेगी आजाद भारत के सबसे बुजुर्ग वोटर हैं और उन लोगों के लिए भी एक मिसाल हैं जो अपने वोट की अहमियत को सही से नहीं समझते और मतदान से जी चुराते है.

श्याम सरण नेगी, 16 लोकसभा और 12 विधानसभा चुनावों में अपने मत का इस्तेमाल कर चुके हैं और वो इसे बहुत जरूरी भी मानते हैं. वो हमेशा कहते है कि देश के सभी मतदाताओं को अपने इस अधिकार का प्रयोग जरूर करना चाहिए. इस समय उनकी हालत काफी कमजोर है लेकिन उनकी हिम्मत और हौसला अब भी बरकरार है.

वोट डालने के बाद श्याम शरण नेगी | तस्वीर साभार : Firstpost

देश में पहली बार लोकसभा चुनाव का आयोजन फरवरी 1952 में किया गया था लेकिन हिमाचल प्रदेश में अक्टूबर 1951 में मतदान किया गया. इसके पीछे कारण था हिमाचल प्रदेश का मौसम, क्योंकि एक बार बर्फबारी शुरू होने के बाद मतदाताओं का मतदान केंद्र पर पहुंचना बहुत मुश्किल हो जाता है. ऐसे में संयोगवश ये मौका 25 अक्टूबर 1951 को श्याम सरण नेगी को मिला.

नेगी एक शिक्षक के रूप में किन्नौर में थे और वहां पर 23 वर्षों की नौकरी के बाद सेवानिवृत हो चुके हैं. नेगी जब भी मीडिया से बात करते है तो उन्हें देश के तरक्की से खुश नजर आते हैं लेकिन उन्हें भ्रष्टाचार की खबरों से काफी दुख पहुंचता है.

बी पॉजिटिव, श्याम सरण नेगी जी के जज्बे और हौसले को सलाम करता है और देश के सभी मतदाताओं से आगामी आम चुनावों में मतदान करने की अपील करता है.

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