जो अपने कदमों की काबिलियत पर विश्वास रखते है, वो ही अक्सर मंजिल पर पहुंचते है. Shubham Koshle

यह पंक्तियाँ छत्तीसगढ़ के युवाँ पर सटीक बैठती हैं. अपनी लेखनी के दम पर वो न केवल फिल्म डायरेक्ट कर रहे हैं बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी गहरी चोट करते हैं. फिल्म निर्देशन जैसे क्षेत्र में लोगों को उम्र लग जाती हैं लेकिन यह युवा अपने क्षेत्र की संस्कृति और कला के ऊपर एक फिल्म बना चुके हैं. समय-समय पर वो नए लोगो की मदद के साथ ही कॉलेज एवं यूनिवर्सिटी में वर्कशॉप का आयोजन करते हैं. दिल से लेखक और प्रोफेशन से फिल्म डायरेक्टर, शो प्रेज़ेंटर  का नाम हैं शुभम कोसले (Shubham Koshle).

शुभम छत्तीसगढ़ के भाटापारा से आते हैं और अभी बिलासपुर में फिल्म मेकिंग के साथ ही यूट्यूब पर ‘Kuch Naya Experience with Shubham Koshle‘ शो होस्ट कर रहे हैं. अपनी लेखनी के दम पर अब तक 300 से ज्यादा कविताए लिख चुके हैं. इनकी कविताएँ स्थानीय एवं नेशनल न्यूज़ पेपर एवं पत्रिकाओं में पब्लिश ही चुकी हैं. अभी वो SKD प्रोडक्शन के बैनर तले फिल्म ‘समायरा – ए स्माल टाउन गर्ल‘ में असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम कर रहे हैं.

movie direction
फिल्म डायरेक्शन के दौरान शुभम

नक्सल प्रभावित छत्तीसगढ़ राज्य के छोटे से शहर भाटापारा से बिलासपुर तक शुभम का सफर बहुत ही संघर्षमयी और प्रेरणास्पद रहा हैं. कई जगह पर उन्हें नकारा गया लेकिन उन्हें अपनी लेखनी और प्रतिभा के दम पर ख़ास पहचान बनायीं हैं.

मुझे माता पिता से ज्यादा फिल्मे और समाज जागरूक करती हैं – शुभम् कोसले

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान शुभम बताते हैं कि बचपन से ही लिखने का शौक रहा हैं. मैं कक्षा आठवी से लिख रहा हूँ लेकिन इसका आभास मुझे तब हुआ जब ग्यारहवीं कक्षा में मेरे प्रिंसिपल ने मेरी तारीफ की थी.

प्रिंसिपल ने मेरी प्रतिभा को सराहते हुए कहा था कि “सभी में कुछ अलग गुण होते हैं जैसे शुभम में हैं, हमें औरो से अलग और बेहतर करना चाहिए

प्रिंसिपल के इस वक्तव्य ने मुझे नयी राह दिखाई और मेरा सारा ध्यान लिखने में लग गया. लोगो एवं समाज को समझते हुए कविताओं से शुरू हुआ सफर फिल्म निर्माण तक पहुँच गया. लिखने में दिलचस्पी थी तो मैंने इस पर काम किया. मेरी क्लास के दोस्त भी मुझसे एप्लीकेशन लिखवाते थे.

इसके बाद अपनी कविता और रचनाओं को बड़े मंच पर ले जाने के लिए मैंने सोशल मीडिया का सहारा लिया. फेसबुक पेज, ब्लॉग एवं यूट्यूब के जरिये मैं अपनी रचनाए लोगो तक पहुंचाने लगा. लोगो की प्रशंसा ने मेरे अंदर एक नयी जान फूँक दी. मुझे अब अपनी रचनाओं से पहचान मिलने लगी. इसके बाद मैंने लगभग 300 से ज्यादा कविताएँ, लेख और मोटिवेशनल कोट्स प्रकाशित किये.

youtube show
यूट्यूब शो के दौरान शुभम

इसी के साथ यूट्यूब पर मैं एक शो (Kuch Naya Experience with Shubham Koshle) होस्ट करता हूँ जिसमे उन लोगो को आगे लाया जाता है जिन्होंने अपने जीवन में संघर्ष और चुनौतियों को पार करते हुए समाज और राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दिया.

लेखन के दौरान मुझे महसूस हुआ कि कविताओं का दायरा केवल पढ़े-लिखे लोगो तक ही सीमित हैं लेकिन अगर वीडियो या ऑडियो का उपयोग किया जाए तो ज्यादा लोगो तक मैं अपनी बात पहुंचा पाउँगा. इसके चलते मैंने विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर शार्ट मूवीज बनाना शुरू की. इसके बाद गाने लिखे और एल्बम भी रिलीज़ हुई.

पढाई के बारे में शुभम बताते हैं कि पढ़ने में उतना ही तेज़ था की पास हो जाता था. मुझे शुरू से ही लिखने का शौक रहा और इसे ही मुझे अपना प्रोफेशन बनाना था. इसलिए मैं लगातार मेहनत करता रहा और पढाई को भी उतनी ही तवज्जो दी, जीतनी जरूरत होती हैं.

short movie
एक शूट के दौरान शुभम

शुभम आगे बताते हैं कि समाज सेवा मेरे जीवन का दूसरा बड़ा और महत्वपूर्ण कर्तव्य हैं. मैंने हमेशा ही अपनी कविताओं और लेखों के माध्यम से समाज और राष्ट्र को जागरूक करने की कोशिश की हैं. काम को पहचान मिलने लगी तो लोग संपर्क करने लगे. लोगो का स्नेह और विश्वास पाकर मुझे और काम करने की प्रेरणा मिलने लगी. समय के साथ-साथ हार एवं जीत का खेल जारी रहा लेकिन माता-पिता एवं मार्गदर्शकों के कारण फिल्म इंडस्ट्री में काम और पहचान मिलना शुरू हो गयी.

इसके बाद मैंने फिल्म मेकिंग और एक्टिंग के ऊपर छत्तीसगढ़ के कॉलेज में कार्यशाला का आयोजन किया जिसमें विद्यार्थियों को कला एवं फिल्म की बारीकियों के बारे में समझाया. कई शार्ट मूवीज बनायीं जो विभिन्न मंचो पर प्रदर्शित हुई और सम्मान एवं पहचान भी मिली.

शुभम कहते हैं कि पहली मूवी का ऑफर मुझे मुम्बई के फ़िल्मकार अनंत सिंह और छत्तीसगढ़ के निर्माता आकाश डहरिया ने दिया. इस फिल्म में मैंने बतौर सह-लेखक और सह-निर्देशक के रूप में फ़िल्म निर्माण में कदम रखा. फ़िल्म निर्देशक की भूमिका निभाने का मेरा ख्वाब जल्द ही सच होने जा रहा हैं क्योंकि पहली बार बतौर लीड निर्देशक और मुख्य लेखक के रूप में मुझे एक साल में ही दो बड़ी फिल्में ऑफर हुई हैं.

Shubham Koshle awards
सम्मान ग्रहण करते हुए शुभम

शुभम को अब तक कई मंचों से सम्मान मिल चूका हैं जिसमें ‘नारी शिक्षा को बढ़ावा‘ शार्ट फ़िल्म के लिए छत्तीसगढ़ फ़िल्म इंडस्ट्री का अवार्ड भी शामिल हैं. एक साल में ही साहित्यकार और लेखक के सम्मान से उन्हें नवाज़ा गया.

शुभम कहते हैं कि परेशानियों से हताश हो कर आने वाले भविष्य को ठेस न पहुँचाएँ. बिता हुआ कल एक सींख था जिससे आने वाले कल का बेहतर परिणाम तय होता हैं. अपनी कला और प्रतिभा के साथ समझौता न करके, उस पर मेहनत कीजिये. आपका जूनून और कड़ी मेहनत ही आपकी सफलता की गारंटी हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, शुभम कोसले के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के प्रोजेक्ट्स के लिए शुभकामनाए देता हैं. हम उम्मीद करते हैं कि आप से प्रेरणा लेकर हमारे पाठक जीवन में सकारात्मक कार्य करेंगे.

Comments

comments