कौन कहता है कि चिरागों से ही घर रौशन होते हैं ।
हमने तो शिक्षा से भी घर रौशन होते देखा हैं ।।

इन्ही चंद पंक्तियों को जीवंत करने का संकल्प लिया है एनआईटी जमशेदपुर के छात्रों ने. पढाई के दौरान खाली वक्त में बच्चों को पढ़ाने से शुरू हुआ सफर आज एक मुहिम का रूप ले चूका हैं. पिछड़े एवं जरूरतमंद बच्चों की पढाई के लिए इनका संस्थान काम कर रहा हैं. कुछ छात्रों से शुरू हुआ यह अभियान तीन राज्यों के 23 केंद्रों में तब्दील हो चूका हैं और अनवरत प्रयास जारी हैं. ‘संकल्प(Sankalp)‘ के जरिये पिछड़े एवं मजदुर वर्ग के बच्चों के जीवन में अँधियारा मिटा कर शिक्षा की ज्योति प्रज्वलित कर रहे हैं शिवेंद्र श्रीवास्तव(Shivendra Srivastava).

संकल्प, एक स्वैच्छिक संगठन है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2008 में नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलजी (एनआईटी) जमशेदपुर के पूर्व छात्र – शिवेंद्र श्रीवास्तव (अध्यक्ष), विक्रांत आनंद, सुकीर्ति पाणिग्रही, हरेंद्र सिंह गुर्जर, बलराम राउत द्वारा हुई. इनकी एक छोटी सी कोशिश आज कई आदिवासी इलाकों में रहने वाले बच्चों में नई ऊर्जा भर रही है. कभी एनआईटी के मेस में काम करने वाले छोटे बच्चे आज विभिन्न सरकारी और प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर रहे हैं.

sanklap team
संकल्प संगठन के सदस्यों के साथ शिवेंद्र श्रीवास्तव

संकल्प के 3 राज्यों में कुल 23 केन्द्र हैं, जिनसे करीब 2400 से ज्यादा बच्चे मुफ्त और गुणवत्तापूर्वक शिक्षा हासिल कर रहे हैं. इनमे से 90 से ज्यादा गरीब एवं होनहार बच्चों का दाखिला अच्छे स्कूलों में भी कराया गया, जिनकी पढ़ाई का सारा खर्च संकल्प संगठन उठाता हैं.

शिक्षा के साथ ही संकल्प ने एक कदम आगे बढ़ाते हुए यौन शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और वयस्क साक्षरता अभियान में भी अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए संकल्प ने जमशेदपुर के मोहन नगर क्षेत्र में एक सिलाई केंद्र शुरू किया जो आज कई महिलाओं के रोजगार का जरिया बन चूका हैं.

शिवेंद्र और उनकी संस्था ‘संकल्प’ ना सिर्फ बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रही है बल्कि इनके सेंटर में आने वाले बच्चों की 50 मांओं को भी शिक्षित करने का काम कर रहे हैं. जिससे कि बच्चों की उचित देखभाल हो सके.

sanklap centers ar tribal area
संकल्प संगठन के सेण्टर पर बच्चे

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान शिवेंद्र श्रीवास्तव बताते हैं कि “हमने देश भर के 36 ऐसे जिलों का चयन किया है जहां पर ऐसे बच्चों की संख्या काफी ज्यादा है जो किन्ही वजहों से स्कूल छोड़ देते हैं या फिर जिनके माता पिता मजदूरी करते हैं, ताकि इन बच्चों को कम से कम प्राइमरी शिक्षा दी जा सके. संकल्प भविष्य में, देश के हर राज्य में अपनी शाखाएं फैलाना चाहता है और अपने इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए ऐसी दूसरी संस्थाओं से जुड़ने की पूरी कोशिश कर रहा है.

यूपी के गोरखपुर में रहने वाले शिवेंद्र श्रीवास्तव का बचपन मुफलिसी में बीता, लेकिन पढ़ाई में होशियार शिवेंद्र का दाखिला एनआईटी, जमशेदपुर में हो गया. यहां से उन्होने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद टाटा स्टील में नौकरी की. वो जब एनआईटी में पढ़ाई कर रहे थे उस वक्त खाली वक्त में वो अपने दोस्तों के साथ आसपास के आदिवासी इलाके में चले जाया करते थे.

celebration at sankalp
संकल्प संगठन के सेण्टर पर उत्सव की झलकियां

इन इलाकों में उन्होने देखा कि इस इलाके में काफी गरीबी है और यहां के बच्चे स्कूल नहीं जाते हैं. तब इऩके दिमाग में एक आइडिया आया कि क्यों न इन बच्चों के लिए कुछ किया जाए. इस बात का जिक्र शिवेंद्र ने अपने दोस्तों सुकीर्ति और विक्रांत से की. इसके बाद शिवेंद्र ने कॉलेज कैंपस से बाहर रहने वाले बच्चों की जगह कॉलेज की विभिन्न मेस में काम करने वाले छोटे बच्चों को पढ़ाने के बारे में सोचा. यही से उन्होने करीब 30 बच्चों को इकट्ठा कर ‘संकल्प’ नाम से अपनी मुहिम शुरू की.

इन बच्चों को पढ़ता देख उनके माता पिता काफी खुश हुए जिसके बाद उन्होने शिवेंद्र और उनके दोस्तों से कहा कि उनके गांव में भी बहुत सारे ऐसे बच्चे हैं जो पढ़ना चाहते हैं. इसलिए वो कैंपस के साथ-साथ उनके गांव में आकर भी बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू करें.

shivendra with volunteers
बच्चों के साथ संकल्प संगठन के स्वयंसेवी

इस तरह साल 2008 में इन्होने मोहन नगर इलाके में उन बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया जिन्होने कभी किसी स्कूल की शक्ल तक नहीं देखी थी. साल 2009 में शिवेंद्र की इंजीनियरिंग की पढ़ाई खत्म हो गई थी और उनकी नौकरी टाटा स्टील में लग गई. लेकिन बच्चों को पढ़ाने का सिलसिला नहीं टूटा. एनआईटी जमशेदपुर के छात्रों ने इस पुनीत कार्य को नहीं रुकने दिया.

ये बात शिवेंद्र को काफी पसंद आई और उन्होंने अपने जूनियर साथियों को बताया कि कब और किस तरह बच्चों को पढ़ाना हैं. उनकी जरूरतें क्या हैं ? इस तरह उन्होंने नौकरी के साथ अपने जूनियर साथियों को दिशा निर्देश देने का काम भी जारी रखा.

संकल्प चाहता था कि सभी बच्चे स्कूल भी जाएं ताकि वो कोई डिग्री हासिल कर सकें लेकिन इस काम में इन बच्चों के माता पिता तैयार नहीं हुए. संकल्प ने बच्चों के माता-पिता की काउंसलिंग के साथ ही कई आम सभाएं भी की और लोगों को शिक्षा की अहमियत बताने की कोशिश की. संकल्प कि ये मुहिम रंग लाई पिछड़े इलाके के बच्चों का अलग-अलग स्कूलों में दाखिला कराया और शाम में संकल्प सेंटर पर भी बच्चे आने लगे.

shivendra with parents
बच्चों के माता-पिता के साथ शिवेंद्र श्रीवास्तव

एक ओर बच्चे पढ़ रहे थे, इलाके में शिक्षा को लेकर लोगों में जागरूकता भी आ रही थी, तो दूसरी ओर एनआईटी के पूर्व छात्र चाहते थे कि वो भी ऐसा ही कुछ अपने अपने राज्यों में भी करें. इस काम में संकल्प ने उनकी मदद भी की और जमशेदपुर के अलावा बिहार के मधेपुरा, वाराणसी के बीएचयू, कालाहांडी, रांची, धनबाद जैसे संकल्प के सेंटर में टीचर पढ़ाने का काम करते हैं। जबकि जमशेदपुर के 8 सेंटर में ज्यादातर में एनआईटी के छात्र ही पढ़ाने का काम करते हैं. संकल्प ने कालाहांडी, ओडिशा, में एक प्राथमिक विद्यालय – “संकल्प विद्याश्रम” की स्थापना की है.

संकल्प’ में पढ़ने वाले कई बच्चे ऐसे भी हैं जो अब उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं. इनके पढ़ाये बच्चे ना सिर्फ ग्रेजुएशन की पढ़ाई कर रहे हैं बल्कि कई छात्र अलग अलग जगहों से इंजीनियरिंग की पढ़ाई, उसमे से एक “अदिति कुमारी” ने इंजीनियरिंग कर के इंफोसिस में जॉब हासिल की और एक “अमन कुमार” जिसने डिप्लोमा की डिग्री करके अपप्रेंटिस में जॉब हासिल की. इसके अलावा ये लोग समय समय पर पढ़ाई में होशियार बच्चों की परीक्षाएं भी लेते रहते हैं ताकि उनका दाखिला विभिन्न प्राइवेट स्कूलों के अलावा नवोदय स्कूल या दूसरे अच्छे स्कूलों में कराया जा सके.

dental checkup at sankalp centers
बच्चों के स्वास्थ्य जाँच के लिए शिविर आयोजित करता हैं संकल्प

संकल्प’ में पढ़ने वाले 90% बच्चे पिछड़ी जाति से आते हैं और इनकी पढ़ाई का सारा खर्च एनआईटी के पूर्व छात्र मिलकर उठाते हैं. इसके अलावा एनआईटी में पढ़ने वाला प्रत्येक छात्र हर महीने 10 रुपये ‘संकल्प’ को देता है.संकल्प’ की एक अलग टीम है जो प्रायोजित बच्चों की पढ़ाई पर खास नजर रखती है और जहां पर वो उन बच्चों में कुछ कमी देखती है तो उसे सुधारने का काम करती है.

अगर आप भी शिवेंद्र श्रीवास्तव या ‘संकल्प‘ से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, शिवेंद्र श्रीवास्तव और ‘संकल्प‘ टीम के सभी सदस्यों के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

Comments

comments