हर चीज से बढ़कर, अपने जीवन की नायिका बनिए शिकार नहीं. : Shalini Shrinet (Mera Ranng)

देश की महिलाओं को असल ज़िन्दगी की नायिका बनाने के लिए प्रयासरत हैं नयी दिल्ली की एक सामाजिक कार्यकर्ता. अपने प्लेटफार्म के जरिये महिला अधिकारों और समाज की धारणाओं को तोड़ने का काम कर रही हैं . समाज में महिलाओं को सम्मान दिलाने एवं आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोशल मीडिया के जरिये जागरूकता फैला रही हैं.

महिलाओं के मुद्दों पर न्यूज़ पोर्टल, यूट्यूब चैनल और फेसबुक के जरिये समाज की ऐसी कहानियां बाहर ला रही हैं जो अब तक चार दीवारी के अंदर कैद थी. समाज के तथाकथित नियमों को तोड़ने में लगी हुई हैं, ‘मेरा रंग (Mera Ranng)‘ प्लेटफार्म की संस्थापक और सामाजिक कार्यकर्त्ता शालिनी श्रीनेत (Shalini Shrinet).

मेरा रंग‘ एक सोशल न्यूज़ प्लेटफार्म हैं जिसके जरिये शालिनी महिलाओं के मुद्दे जैसे कि वर्कप्लेस पर महिलाओं को असमान वेतन, यौन शोषण, सामाजिक कुंठा से उपजे मुद्दे जैसे कि छोटे कपड़े, माहवारी, सांवलापन, बेटियों से दुर्व्यवहार, एलजीबीटी, बलात्कार और एसिड अटैक शामिल हैं. यूट्यूब चैनल से शुरू हुआ सफर महिला न्यूज़ प्लेटफार्म से होता हुआ आंदोलन का रूप ले चूका हैं. सड़क से लेकर घर की चार-दीवारी तक इनके आंदोलन जगह बना चुके हैं.

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एक वीडियो शूट के दौरान शालिनी

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान शालिनी बताती हैं कि ‘मेरा रंग फाउंडेशन‘ की शुरुआत एक यूट्यूब चैनल के रूप में हुई थी. मैंने इस कार्यक्रम के जरिए महिलाओं से जुड़े कई मुद्दों को उठाया. इन सभी मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होती थी. इसके बाद हमने जमीनी स्तर पर भी अपनी गतिविधियां शुरू कीं. इसके जरिये हमने कई अभियान चलाये जिन्हे सफलता मिली.

ऐसा ही एक अभियान था ‘मेरी रात मेरी सड़क‘. इस कैंपेन के तहत हम महिलाएं इकट्ठा होकर सड़क पर निकलते हैं और यह मांग करते हैं कि हम सड़क पर सुरक्षित निकल सकें. इस कैंपेन की शुरुआत एक ही रात में 18 शहरों से की गयी. गाजियाबाद में आसपास के गांवों और स्लम एरिया में भी महिलाओं के लिए जागरुकता पर कार्यक्रम किए हैं. ‘मेरा रंग’ संवाद के तहत जेंडर से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करते हैं.

अपने सफर के बारे में शालिनी बताती हैं कि मेरा जन्म देवरिया जिले के एक गांव में हुआ था. बचपन में अपने प्रधान पिता स्व. नारायण सिंह के साथ रहकर मैंने बहुत करीब से उनकी सामाजिक गतिविधियों को देखा और उनसे प्रभावित भी हुई. वे किसी की मदद करने के लिए हर समय तत्पर रहते थे. दूसरी तरफ मैं अपने बड़े भाई स्व. एलएस सिंह से भी प्रभावित थी, जिन्होंने कड़ी मेहनत के बाद एयरफोर्स ज्वाइन किया. उनसे मैंने उदारता एवं खुली सोच का पाठ सींखा.

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महिला अधिकारों के ऊपर चर्चा के दौरान शालिनी

शुरुआती पढाई गांव में ही हुई. उसके बाद मेरी शादी हो गई. मेरी सास ने मुझे आगे पढ़ने की प्रेरणा दी जिसकी बदौलत मैंने गोरखपुर यूनीवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया. इसके बाद अपने पत्रकार पति के साथ कई शहरों में रही. गोरखपुर, इलाहाबाद, बरेली, लखनऊ, बैंगलौर, कानपुर से होते हुए अब दिल्ली में हूं. इसी बीच मैंने बरेली में रहते हुए रुहेलखंड विश्वविद्यालय से समाजशास्त्र में एमए किया.

शालिनी आगे बताती हैं कि तमाम शहरों में रहने के दौरान वहां की संस्कृति और रीति-रिवाज़ हमेशा से ही अच्छे लगे और उन्हें अपनाने की कोशिश में लगी रहती हूँ. लगभग हर शहर में मेरे ऐसे बहुत सारे दोस्त हैं जिनसे आज भी हमारी बातचीत होती है.

होश संभालने से लेकर अभी तक जो भी मिला वह मेरे बारे में यह जरूर कहता था – बहुत मिलनसार है, सबकी मदद करती है. कहीं न कहीं ये बातें दिमाग में घर कर गई थीं. सो लगातार यह चलता रहा कि मैं कोई सोशल वर्क करूं, जहां पर किसी की किसी भी तरह से मदद कर सकूं. मेरी मां (सास) भी मुझे लगतार इसके लिए प्रोत्साहित करती रहती थीं. आज वो इस दुनिया में नहीं हैं मगर मैं जो भी हूं, उनके योगदान की वजह से ही हू्ं.

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मंच से आवाज़ बुलंद करती हुई शालिनी

शालिनी आगे बताती हैं कि पढ़ाई के बाद लगातार दो स्वयंसेवी संगठनों से जुड़ी रही और सामाजिक कार्यों को करीब से अनुभव किया. इसके बाद कुछ समय तक अपना बिजनेस भी किया. तीन साल पहले मैं डेंगू का शिकार हो गयी जिसके चलते मेरा ब्यूटीशियन का बिज़नेस बंद हो गया. इसके बाद मैंने घर एवं काम से समन्वय बनाने वाले काम के बारे में सोचना शुरू किया. सामाजिक कार्यों में हमेशा से ही रूचि रही लेकिन क्या करना हैं , वो समझ नहीं आ रहा था.

इसके बाद मैंने सोचा कि क्यों न ऐसे लोगों के बारे में समाज को जानकारी दी जाए जो महिला एवं बाल अधिकारों पर बहुत अच्छा काम कर रहे हो. यही से ‘मेरा रंग‘ की शुरुआत हुई. हमने एक यूट्यूब चैनल बनाया और लोगो के इंटरव्यू डालना शुरू किया. शुरुआती दो एपिसोड में ही काम की प्रशंसा होने लगी. इसके बाद हमने एक वेबसाइट बनायीं और इस तरह करीब ढाई सालो से ‘मेरा रंग‘ का संचालन कर रही हूँ.

शुरुआती संघर्ष के बारे में शालिनी बताती हैं कि पहले तो समझ में नहीं आता था कि किससे बात करें? कौन तैयार होगा मुझे इंटरव्यू देने के लिए? फिर हमने फेसबुक के दोस्तों से संपर्क करना शुरु किया और वो लोग तैयार भी हो जाते थे. धीरे-धीरे जो लोग हमारे वीडियो देख रहे थे उन लोगों ने मुझे प्रोफाइल देनी या उनका नाम सुझाना शुरु किया. इसके बाद एक नेटवर्क बनता गया जिसमें लोग जुड़ते चले गए और हमने इन ढाई सालों के दौरान बड़ी संख्या में वीडियो बनाये हैं और अभी भी काम अनवरत जारी हैं.

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‘मेरा रंग’ के एक कार्यक्रम के दौरान शालिनी

शालिनी बताती हैं कि ‘मेरा रंग‘ के सफर में कई करीबियों एवं दोस्तों का बहुत योगदान रहा जिनमें जाने-माने आर्टिस्ट सीरज सक्सेना, राइडर राकेश, बंटी त्रिपाठी, शोभा शमी, सुजाता पाराशर, मेधा, विभा रानी हैं. संसाधनों की कमी हमेशा से ही रही हैं तो हमारे दोस्त ने मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाये. रविवार को उनके स्टूडियो में छुट्टी होने के चलते हमें कैमरा और अन्य संसाधन मिल जाते हैं. कई बार उनके यहां काम चल रहा होता था तो हमारी शुटिंग नहीं हो पाती थी लेकिन मन में हमेशा काम को लेकर जूनून बना रहा.

शालिनी बताती हैं कि मेरा रंग एक रजिस्टर्ड संस्था है. इसकी अपनी कार्यकारणी है. अब तो बहुत सारी परेशान महिलाएँ और लड़कियां किसी भी वक्त फोन करके मुझसे हेल्प मांगती हैं. हम लोग यथा संभव उनकी मदद करते हैं. हमारे बहुत सारे वकील दोस्त और एनजीओ से जुड़े साथी भी मदद करते हैं. आने वाले समय में कई और शहरों और ग्रामीण इलाकों में भी काम करेंगे. जिसमें महिलाओं को स्वास्थ्य एवं हाइजीन के प्रति जागरुक करेंगे और समाज और खासकर महिलाओं से जुड़े मुद्दों को उठाएंगे.

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एक अवार्ड समारोह के दौरान शालिनी

शालिनी और मेरा रंग के काम को कई मंचों से सराहा जा चुका हैं. वे ऑक्सफोर्ड बुक स्टोर के ‘पिंक टी कपआईआईटी दिल्ली में आयोजित ‘दिल्ली पोएट्री फेस्टिवल‘, शिवहर (बिहार) में ‘जेंडर संवाद‘, पर्यावरण पर काम कर रही इन्वायरोनामिक्स संस्था तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के सत्यवती कॉलेज में बतौर विषय विशेषज्ञ और पैनलिस्ट शामिल हुई हैं. इसके साथ ही उनके वीडियोज से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ने वाली लड़कियां भी उनके लिए सम्मान से कम नहीं हैं.

आप भी ‘मेरा रंग‘ से जरूर जुड़े, उनके यूट्यूब चैनल को सब्सक्राइब करने के लिए यहाँ क्लिक करे और फेसबुक पेज से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करे.

बी पॉजिटिव इंडिया, शालिनी और ‘मेरा रंग‘ की पूरी टीम के कार्यों की प्रशंसा करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर समाज में महिलाओं की स्थिति में बदलाव आएगा.

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