आज पूरा विश्व कचरे और प्रदुषण से जूझ रहा है लेकिन  डेनमार्क और नॉर्वे जैसे देश है वो दूसरे देशों से कचरा आयात कर रहे है । कचरे से बायो-गैस के साथ ही खाद एवं अन्य प्रोडक्ट्स बनाये जा सकते है लेकिन भारत अभी कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में काफी पीछे है क्योंकि डंपिंग यार्ड के बाद कचरे को कैसे उपयोग में लिया जाये उसकी खास तकनीक नहीं है।

आज हम बात कर रहे है कबाड़ से कमाल करने वाली वाराणसी की शिखा शाह की , जिन्होंने अपने स्टार्ट-उप के जरिये कचरे से कमाल के प्रोडक्ट तैयार कर रही है । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी  के स्वच्छता अभियान और स्टार्ट-अप इंडिया प्रोग्राम से प्रेरित होकर शिखा ने अपनी कंपनी स्टार्ट की है जो कचरे के प्रबंधन के लिए काम करती है । शिखा शहर के कबाड़ को इकट्ठा करके उसे सुन्दर एवं आकर्षक हेंडीक्राफ्ट प्रोडक्ट्स में परिवर्तित कर देती है और कई अनोखे डिज़ाइन के प्रोडक्ट्स का भी निर्माण करती है ।

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शिखा शाह वाराणसी नगर निगम के कबाड़ से काशी के हर घर को सजाने एवं सवारने के लक्ष्य पर काम कर रही है क्योंकि बहुत सारी सामग्री जिसे कबाड़ समझा जाता है उससे साज़- सजावट के बेहतरीन प्रोडक्ट्स बनाये जा सकते है । शिखा ने ऑनलाइन मार्केटप्लेस अमेज़न एवं फ्लिपकार्ट का उपयोग करके स्क्रैपशाला  के प्रोडक्ट्स को काशी से लेकर बैंगलोर और लखनऊ से लेकर लंदन तक पंहुचा दिया है । आज उनके प्रोडक्ट्स की डिमांड न केवल भारत बल्कि विदेशों में भी बहुत ज्यादा है ।

शिखा ने यह स्टार्ट-अप बनारस की तस्वीर बदलने के लिए शुरू किया था जिससे काशी को साफ -सुथरा बनाया जा सके लेकिन कबाड़ में छुपी हुई असीमित संभावनाओं ने शिखा के आईडिया को बड़ा रूप देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया । प्रधानमंत्री मोदी के स्टार्ट-अप इंडिया के विज़न ने शिखा जैसे कई युवा उद्यमियों को प्रेरित किया है और गांव से लेकर शहरों तक लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है ।

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प्रकृति से प्यार करने वाली शिखा ने दिल्ली से पर्यावरण शिक्षा में ग्रेजुएशन किया और ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने नौकरी शुरू कर दी । अपने शुरुआती कैरियर में उन्हें कई प्रोजेक्ट में काम करने के सिलसिले में लोगों से बातचीत करने का मौका मिला । अपने प्रोजेक्ट्स में काम करते हुए शिखा ने अनुभव किया कि आम लोग पर्यावरण के प्रति बिल्कुल भी संवेदनशील नहीं है और पर्यावरण को बचाने के लिए कोई भी आगे नहीं आना चाहता है ।

लोगों के पर्यावरण के प्रति बेपरवाह नजरिये ने शिखा को पर्यावरण सरंक्षण के क्षेत्र में कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया । उन्होंने तय किया कि ऐसा कुछ काम किया जाये जिससे बिज़नेस के साथ ही जरूरतमंद लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था हो सके तथा अप्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण को भी साफ-सुथरा बनाया जा सके । शिखा ने इसके लिए रिसर्च करना शुरू किया और नियमित जॉब के साथ अलग-अलग तकनीकों के बारे में जानकारी जुटाना शुरू कर दिया ।

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शिखा ने सबसे पहले अपने घर पर ही कबाड़ से कुछ सामान बनाने का फैसला किया और फिर स्क्रैप की कमी पड़ने लगी तो बनारस नगर निगम से संपर्क किया । नगर निगम जो पहले से ही कचरे की डंपिंग के लिए संघर्ष कर रहा था तो शिखा को नगर निगम से मदद मिलने में कोई परेशानी नहीं हुई । कबाड़ को काट-छांट कर एक से बढ़कर एक खूबसूरत प्रोडक्ट्स का निर्माण शुरू कर दिया ।

जब आईडिया चल निकला तो शिखा ने अपनी नियमित जॉब जिसमे उन्हें अच्छी-खासी सैलरी मिलती थी, उसे हमेशा के लिए छोड़ दिया और अपने घर में ही कुछ लोगों को जोड़ कर स्क्रैपशाला को आगे बढाने के लिए काम करना शुरू कर दिया । उत्तम गुणवत्ता और दिखने में नायाब प्रोडक्ट्स को देखकर सब लोग अचम्भित हो जाते थे कि यह सामान कबाड़ से बनाये गए है ।

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शिखा का व्यापार धीरे-धीरे बढने लगा और उन्हें जल्द ही बड़ी जगह खरीदनी पड़ी जहाँ पर वो बड़े स्तर पर प्रोडक्ट्स बना सके । दो साल पहले बिना किसी की मदद के ही नगर निगम के बेकार पड़े कबाड़ को बीस हजार में खरीदकर काशी को सवांरने के साथ ही स्वच्छता का संदेश देने की राह पर शिखा अकेले ही निकल पड़ी थीं। आज शिखा के साथ उनकी पूरी टीम काम कर रही है जो स्क्रैपशाला को आगे बढ़ानेके लिए दिन-रत मेहनत कर रहे यही आज शिखा के पीछे कारवां सा बनता जा रहा है और उन्होंने अपनी प्रतिभा, लगन और मेहनत से आधा दर्जन से ज्यादा बेरोजगार हुनरमंदों को अपने पैरों पर खड़ा कर दिया है।

शिखा अब ये हुनर और भी कारीगरों को सिखा रही हैं और बाकायदा 15 से 20 हजार रुपये की सैलरी भी दे रही हैं। साथ में काम करने वाले कारीगर भी काफी खुश हैं। उनका कहना है कि यहाँ रोज काम मिल जाता है। ऐसे में परिवार का खर्च चलाना अब आसान हो गया हैं। वाराणसी शहर से निकला स्क्रैपशाला आज उन लोगों के लिए आश्चर्य का विषय बना हुआ है, जो अपने घर के कबाड़ को या तो बेच दिया करते हैं या फिर सड़क पर फेंक देते हैं, क्योंकि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि इस कबाड़ से भी लाखों का व्यवसाय किया जा सकता हैं।

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आज के समय में शिखा जैसे युवाओं की जरूरत है, जो अपने भविष्य को चमकाने के साथ-साथ समाज को बेहतर बनाने के रास्ते भी तलाश रही हैं। Be Positive  उनके नए आईडिया और समाज में परिवर्तन लाने के जज्बे को सलाम करता है ।

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