School Painted like Train : शिक्षा के निजीकरण के बाद शहर के साथ ही गांवों में भी निजी स्कूलों की बाढ़ आ गयी है. निजी स्कूलों के पास शानदार स्कूल बिल्डिंग और बसों का जखीरा होता है. आम सुविधाओं के अभाव में गांवों के कई बच्चे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते है.

सरकारी स्कूलों से हो रहे मोहभंग को रोकने के लिए कई तरह के प्रयास किये जा रहे है. इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश में ग्रामीण और जन-प्रतिनिधि के सहयोग से एक ग्रामीण सरकारी स्कूल का कायाकल्प किया. इसके बाद न केवल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों का उत्साह बढ़ा बल्कि मीडिया में भी यह स्कूल सुर्खियाँ बना रहा है.

प्लेटफार्म नुमा स्कूल में बच्चों के साथ शिक्षक | Photo Credits : Jagran

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के सभावली विकास खंड के गांव अट्टा धनावली में यह अभिनव पहल की. इस गांव के सरकारी विद्यालय को रंग-रोगन कर उसे रेलगाड़ी का आकार दिया गया है, जो न केवल बच्चों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है.

इस के साथ ही जन-प्रतिनिधि और शिक्षा विभाग ने स्कूल में पानी, कमरे के साथ ही शिक्षकों की समुचित व्यवस्था की . बच्चों के स्वास्थ्य के लिए टीकाकरण किया जाता है तो दोपहर में लज़ीज़ खाना परोसा जाता है.

ग्रामीण प्रतिदिन मिड-डे मिल के बने खाने की गुणवत्ता जांचते है. इन प्रयासों के चलते सरकारी स्कूल में न केवल शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ी है बल्कि बच्चों का नामांकन भी बढ़ा है.

स्कूल में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा जा रहा है । तस्वीर साभार : OneIndia

ग्राम प्रधान के पति और जिला पंचायत सदस्य कृष्णकांत हूण और प्रधानाध्यापक के साथ ही ग्रामीणों के प्रयासों के कारण सरकारी विद्यालय को आर्कषक बनाया गया है.

शिक्षकों के सहयोग से उन्होंने स्कूल का सौंदर्यकरण कराया. स्कूल के कमरों को रेलगाड़ी का स्वरूप दिया गया है. इसे देख बच्चे स्कूल की ओर आकर्षित होने लगे हैं. अब गांव के नौनिहाल कहते हैं कि वह तो रेलगाड़ी वाली स्कूल में पढ़ाई करेंगे.

Train school in UP
कक्षा-कक्षों का नाम महापुरुषों के नाम पर रखा गया । तस्वीर साभार : OneIndia

विद्यालय भवन के कमरों को ऐसा लुक दिया कि पूरी स्कूल रेलगाड़ी की तरह दिखाई दे. स्कूल के इस आकर्षक स्वरूप के कारण इस स्कूल में बच्चों की संख्या में भी वृद्धि हुई है. कमरों के आगे विभिन्न डिजाइन बनाकर उसके ऊपर शिक्षा एक्सप्रेस लिखकर हर कमरे का अलग-अलग नाम दिया है.

बच्चे इसे देखकर प्रभावित हुए एवं स्कूल में दिन प्रतिदिन छात्र संख्या बढ़ने लगी. इसके साथ प्रधानाचार्य हर समय स्टाफ को साथ लेकर स्कूल की सफाई के काम सहित पेड़-पौधों की देखभाल करते हैं.

Story Credits : OneIndia/Jagaran

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