अगर आपको जानना है कि देश में पर्यावरण प्रदुषण कितने खतरनाक स्तर पर है तो चेन्नई में पानी से तरसते हुए लोगो को देखिये, राजस्थान और बिहार में लू से मरने वाले लोगो के घर-वालों की हालत समझिये. उड़ीसा में ‘फणी चक्रवात’ से तबाह हुए तटवर्ती इलाकों के लोगो से मिलिए. इन सब समस्याओं के हल के लिए कुछ युवाओं की टीम ने आईडिया सुझाया है. संवाद और उसकी टीम के सदस्यों ने प्रकति के संवाद शुरू किया है जिसका मूल उद्देश्य है प्रकृति को बचाना.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान संवाद संस्थान के बिक्रम सिंह बताते है कि पूरी दुनिया को बचाना है तो प्रकृति के साथ संवाद बहुत ज़रूरी है. देश और दुनिया में पेड़ों की कटाई हो रही है. पेड़ों के कटने से इसका असर भी दिख रहा है. पहली बार बिहार के गया जिले में धारा गर्मी के कारण धारा 144 लगाया गया. ये सोचने वाली बात है.

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गांव की महिलाओं ने भी इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया

इन सभी चीज़ों को ध्यान में रखते हुए हमने संवाद के माध्यम से प्रकृति के साथ संवाद स्थापित करने की कोशिश की है. शुरुआत में हम गया से 25 किमी दूर लोहानीपुर में पेड़ लगा रहे हैं. इस अवसर पर हमें पूरे गांव वालों का साथ मिला है. गांव के युवाओं ने 200 फलदार पेड़ लगाकर इसकी शुरुआत भी कर दी है. आने वाले दिनों में हम गांव से आगे बढ़कर पूरे पंचायत में इस मुहिम को आगे बढ़ाएंगे. इसके बाद यह मुहिम जिले से होते हुए देश तक बढ़ाने का लक्ष्य हैं.

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संवाद टीम चला रही है ‘प्रकृति के साथ संवाद’ कार्यक्रम

इस नेक काम का पूरा श्रेय लोहानीपुर की जनता को जाता है. वहां के युवाओं ने बहुत मेहनत की है. आज पूरा गांव उत्सव में डूबा हुआ है. गांव के युवाओं ने ढोल के साथ इस मुहिम को एक उत्सव का रूप दे दिया. गांव की महिलाओं ने भी इस मुहिम में अपना हाथ बंटाया.

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गांव के युवाओं ने ढोल बजाकर जश्न के साथ वृक्षारोपण किया

बिक्रम सिंह आगे बताते हैं कि आने वाले 5 सालों में 1 लाख पेड़ संवाद संस्थान द्वारा लगाया जाएगा. हम उसके रख-रखाव की ज़िम्मेदारी भी लेंगे. संवाद पूरी तरह से प्रकृति के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. इस मुहिम के लिए सोशल मीडिया के जरिये क्राउड-फंडिंग की गयी. अभी तो यह शुरुआत हैं, हमें बहुत आगे तक जाना हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, संवाद टीम के साथ ही लोहानीपुर गांव के सभी रहवासियों को इस पुनीत कार्य के लिए धन्यवाद देता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश के अन्य गांवों में भी ऐसी पहल करेंगे.

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