केसर की खेती से जुड़ी हुई जब भी कोई बात होती है तो कश्मीर का नाम सबसे पहले आता है। क्योंकि इस खेती के लिए सबसे अनूकूल वातावरण कश्मीर जैसी जगहों पर ही मिलता है। लेकिन तकनीक ने कृषि करने के तरीकों को भी बदला है। 28 साल के संदेश पाटिल (Sandesh Patil) ने केवल ठंडे मौसम में फलने-फूलने वाली केसर की फसल को महाराष्ट्र के जलगांव जैसे गर्म इलाके में उगाकर लोगों को हैरत में डाल दिया है।

उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़कर जिद के बलबूते अपने खेतों में केसर की खेती करने की ठानी और महज साढ़े पांच महीने में 5 लाख रुपए से ज्यादा का मुनाफा भी कमा लिया। इसके लिए उन्होंने लोकल और ट्रेडिशनल फसल के पैटर्न में बदलाव किए।

जलगांव जिले के मोरगांव खुर्द में रहने वाले 28 साल के संदेश पाटिल ने मेडिकल ब्रांच के बीएएमएस में एडमिशन लिया था, लेकिन इसमें उनका मन नहीं लगा। उनके इलाके में केला और कपास जैसी लोकल और पारंपरिक फसलों से किसान कुछ खास मुनाफा नहीं कमा पाते थे।

इस बात ने संदेश को फसलों में एक्सपेरिमेंट करने के चैलेजिंग काम को करने इंस्पायर किया। इसके बाद उन्होंने सोइल फर्टिलिटी की स्टडी की। उन्होंने मिट्टी की उर्वरक शक्ति (फर्टिलिटी पावर) को बढ़ाकर खेती करने के तरीके में एक्सपेरिमेंट करने की सोची। इसके लिए उन्होंने राजस्थान में की जा रही केसर की खेती की जानकारी इंटरनेट से ली।

गौरतलब है कि पहले भी राजस्थान और देश के कई अन्य मैदानी इलाकों में केसर की खेती करके अच्छे पैसे कमाने की जानकारियां मिल चुकी हैं। हालांकि जब उन्होंने अपने घर में इसकी चर्चा की तो उनका मजाक उड़ाया गया और लोगों ने इसे करने से मना भी किया।
संदेश बताते हैं कि उनके पिता और चाचा इसके खिलाफ थे। सारी जानकारी जुटाकर संदेश ने इस बारे में अपनी फैमिली में बात की। लेकिन संदेश अपने फैसले पर कायम रहे। आखिरकार उनकी जिद और लगन को देखते हुए घरवालों ने उनकी बात मान ली।
Safforn-Farming
केसर के खेत का प्रतीकात्मक चित्र | Image Source
इसके बाद उन्होंने राजस्थान के पाली शहर से 40 रुपए के हिसाब से 9.20 लाख रुपए के 3 हजार पौधे खरीदे आैर इन पौधों को उन्होंने अपनी आधा एकड़ जमीन में रोपा। संदेश ने अमेरिका के कुछ खास इलाकों और इंडिया के कश्मीर घाटी में की जाने वाली केसर की खेती को जलगांव जैसे इलाकों में करने का कारनामा कर दिखाया है।
संदेश पाटिल ने अपने खेतों में जैविक खाद का इस्तेमाल किया। मई 2016 में संदेश ने 15.5 किलो केसर का प्रोडक्शन किया। इस फसल के उन्हें 40 हजार रुपए किलो के हिसाब से कीमत मिली। इस तरह टोटल 6.20 लाख रुपए की पैदावार हुई।
पौधों, बुआई, जुताई और खाद पर कुल 1.60 लाख की लागत को घटाकर उन्होंने साढ़े पांच महीने में 5.40 लाख रुपए का नेट प्रॉफिट कमाया। मुश्किल हालात में भी संदेश ने इस नमुमकिन लगने वाले काम को अंजाम दिया। जिले के केन्हाला, रावेर, निभोंरा, अमलनेर, अंतुर्की, एमपी के पलासुर गांवों के 10 किसानों ने संदेश पाटिल के काम से मोटीवेट होकर केसर की खेती करने का फैसला किया है।
ध्यान देने वाली बात है कि केसर केवल ठंड में उगता है, लेकिन संदेश ने कड़ी मेहनत और समर्पण से सफलतापूर्वक जलगांव में सूखे की स्थिति में केसर की फसल उगा ली। अब संदेश की सफलता से प्रेरणा लेकर उनके आस-पास के गांवों और मध्य प्रदेश से कई किसानों ने संदेश से केसर के पौधे लिए और सफलतापूर्वक उनके मॉडल को दोहराया है।

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