मध्य प्रदेश में धार जिले से आने वाले इस बैडमिंटन खिलाड़ी ने लगातार दूसरे साल सैयद मोदी अंतर्राष्ट्रीय बैडमिंटन चैम्पियनशिप का ख़िताब अपने नाम किया. मध्यप्रदेश के पिछड़े इलाके से आने वाले इस प्लेयर ने खेल सुविधाओं के अभाव में अपनी कड़ी मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है. भारत की नयी बैडमिंटन सनसनी का नाम है समीर वर्मा (Sameer Verma).

आपको बता दे कि समीर ने फरवरी 2018 में स्विस ओपन में डेनमार्क के विश्व के नंबर दो खिलाड़ी जेन ओ जार्जेन्सन को हराते हुए स्विस ओपन का खिताब भी अपने नाम किया था. इसके अलावा वो बहरीन ओपन के साथ ही कई अन्य अंतराष्ट्रीय स्पर्धाओं में अपना जलवा बिखेर चुके है.

पिता ने सिंखाया रैकेट पकड़ना, अब पुलेला गोपीचंद है इनके गुरु . .

समीर का जन्म मध्यप्रदेश के धार जिले में 22 अक्टूबर 1994 को हुआ था. उनके बड़े भाई सौरभ वर्मा (Saurabh Verma) भी भारत के लिए बैंडमिंटन खेलते है. उनके पिता सुधीर वर्मा एक सामान्य शासकीय नौकरी में हैं तथा माँ संगीता वर्मा गृहणी है.

इनके पिता सुधीर वर्मा ही इनके कोच है. उनके पास मँहगे खेल प्रशिक्षण केन्द्रों में बेटों को भेजने के पैसे नहीं थे. लिहाजा इन्होने खुद ही दोनो बेटों समीर वर्मा और सौरभ वर्मा को बचपन से ही बैडमिंटन का प्रशिक्षण देना शुरु किया और इनकी ये मेहनत रंग लाई. इनके दोनो बेटे समीर वर्मा और सौरभ वर्मा बैडमिंटन के अंर्तराष्ट्रीय खिलाड़ी बन चुके हैं.

Sameer Verma
अपने एक मैच के दौरान समीर वर्मा

अभी समीर हैदराबाद स्थित पुलेला गोपीचंद अकादमी में अपने खेल को निखार रहे है.

जूनियर श्रेणी में मचाया धमाल लेकिन चोटों से रहे परेशान . .

साल 2011 से अपना करियर शुरू करने वाले समीर ने उस साल एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में सिल्वर मैडल जीतकर तहलका मचा दिया. इसके बाद उन्होंने कामनवेल्थ यूथ गेम्स में भी अपना शानदार प्रदर्शन जारी रखते हुए सिल्वर मैडल अपने नाम किया.

इसके बाद अगले दो वर्षों में चोटों के कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा लेकिन मजबूत इरादों और कठिन मेहनत से उन्होंने 2014 में शानदार वापसी की. इसके बाद एक से बढ़कर एक उपलब्धि हासिल की.

अक्टूबर 2018 में समीर वर्मा को वर्ल्ड बैडमिंटन एसोसिएशन के द्वारा 16वीं रैंक दी गई, जिससे ये विश्व के 16 नंबर के बैडमिंटन खिलाड़ी बने. इसके साथ ही पीबीएल (प्रीमियर बैडमिंटन लीग) के लिये मूव मुंबई रेकेट्स ने इन्हे 52 लाख रुपये का पैकेज दिया है.

टोक्यो ओलंपिक 2020 है लक्ष्य . .

समीर वर्मा मानते हैं कि सन 2017 और 2018 का समय उनके लिये महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि इन्होने इस समय में कई बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं. लाइमलाइट एवं मीडिया से दूर रहने वाले समीर वर्मा ने टोक्यो ओलंपिक 2020 में क्वालीफाई करने का लक्ष्य बनाया है.

समीर के पिता सुधीर वर्मा और माँ संगीता वर्मा भी समीर की इतनी बड़ी सफलता से काफी खुश हैं. इसका श्रेय वे समीर की कड़ी मेहनत को देते हुए कहते हैं कि समीर ओलंपिक तक जाए और देश के लिये पदक हासिल कर देश का और उनका नाम रोशन करे, उनका बस यही सपना है.

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