अपने प्रदेश से कई किलोमीटर दूर काम के दौरान दो युवा उद्यमी मिलते है. अपने गृह क्षेत्र के प्रभाव के चलते जल्द ही दोनों अच्छे दोस्त बन जाते है. अपने क्षेत्र के कला, संस्कृति को बचाने के लिए दोनों मिलकर विचार-विमर्श करते है. लम्बी चर्चा के बाद खास पहचान लिए अपनी संस्कृति को विश्व पटल पर स्थापित करने के लिए उन्होंने एक स्टार्ट-अप शुरू किया. इस स्टार्ट-अप के जरिये वो न केवल अपनी संस्कृति को बचा रहे है बल्कि लोगों को जागरूक भी कर रहे है. इस स्टार्ट-अप का नाम है Sambalpuri Wave.

इस इ-कॉमर्स पोर्टल के माध्यम से उड़ीसा के सम्बलपुर क्षेत्र की कला एवं चित्रों से सज्जित कपड़े मिलते है. टी-शर्ट, बेडशीट्स के साथ ही सजावट के सामान मिलते है जिन पर खास तौर से संबलपुरी चित्रकला की कारीगरी की जाती है. उड़ीसा के बाहर उड़िया लोगों और खासकर के सम्बलपुर के लोगों के लिए यह पोर्टल एक वरदान से कम नहीं है.

संबलपुर भारत के उड़ीसा प्रान्त का एक जिला है। इसका नाम ‘समलेश्वरी देवी’ के नाम पर पड़ा है जो शक्तिरूपा हैं और इस क्षेत्र में पूज्य देवी हैं। संबलपुर, छत्तीसगढ़ और ओड़िशा राज्यों के बीच स्थित है और दोनों प्रान्तों को जोड़ता है।

महानदी के बायें किनारे पर स्थित यह नगर कभी हीरों के व्यवसाय का केन्द्र था। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त सूती और रेशमी बुनावट (टशर रेशम) की वस्त्र-कारीगरी (इकत), आदिवासी समृद्ध विरासत और प्रचुर जंगल भूमि के लिए प्रसिद्ध है।

Sambalpuri Wave की स्थापना बिजय नंदा देबता और लक्ष्मी नारायण साहू ने की. बिजय ओडिसा की स्टार्टअप इंडस्ट्री का जाना पहचान नाम बन चूका है. बारगढ़ से आने वाले बिजय ने उड़ीसा की पहली ऑनलाइन इवेंट कंपनी खोली. इसके साथ ही वो कई अन्य स्टार्टअप से जुड़े हुए है . वर्तमान में वो नॉएडा में एक डिजिटल मार्केटिंग कंपनी चलाते है.

sambalpuri wave products
Sambalpuri Wave products

लक्ष्मी नारायण साहू भी उड़ीसा से ही आते है . वो नॉएडा की एक कंपनी में डीजिटल ग्राफ़िक डिज़ाइनर के रूप में काम कर रहे है. बिजय और लक्ष्मी नारायण ने मिलकर सम्बलपुर क्षेत्र की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए इ-कॉमर्स प्लेटफार्म की संकल्पना की है.

दोनों ने मिलकर सम्बलपुर क्षेत्र की अद्भुत चित्रकारी और कला को देखते हुए. इसे मॉर्डन प्रोडक्ट्स जैसे टी-शर्ट, मग, बेडशीट्स, गिफ्ट्स आइटम्स बनाने का काम शुरू करने का फैसला किया. दोनों ही सम्बलपुर क्षेत्र से ही आते है तथा यहाँ की स्थानीय लोक संस्कृति और कला से अच्छी तरह वाकिफ है.

अपने क्षेत्र की कला को बचाने के लिए इन दोनों युवा उद्यमियों का प्रयास सराहनीय है. Be Positive, उम्मीद करता है कि इनसे प्रेरणा लेकर देश के युवा अपने क्षेत्र की कला और संस्कृति को बचाने के लिए प्रयास करेंगे.

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