वक़्त के साथ है मिट्टी का सफ़र सदियों से…किसको मालूम, कहाँ के हैं, किधर के हम हैं.

यह पंक्तियाँ बिहार के उद्यमी पर सटीक बैठती हैं. प्रतिष्ठित संस्थान से MBA करने के बाद मुंबई में शानदार नौकरी थी लेकिन बिहार की अस्मिता और संस्कृति को विश्व पटल पर पहचान दिलाने के लिए प्रयास किया है. अमेरिका से नौकरी का ऑफर थे लेकिन बिहार के गांव में जाकर खुद का व्यवसाय करने की ठानी. बिहार के लोकप्रिय उत्पाद सत्तू को नए अंदाज और कलेवर में पेश किया. विदेशी ब्रांड्स की चमक-धमक में ‘सत्तूज(Sattuz)’ अपनी विशेष पहचान बना रहा है. नौकरी छोड़कर बिहार के व्यंजन को विदेशों में लोकप्रिय बना रहे है सचिन कुमार (Sachin Kumar).

पिछले वर्ष सचिन कुमार ने ‘सत्तूज‘ को लांच किया था. एक साल में ही टर्नओवर पंद्रह लाख के आसपास पहुँच गया और अब बिहार का सत्तू इंटरनेशनल एयरपोर्ट्स के साथ ही रेलवे स्टाल पर भी नजर आएगा. फ्लिपकार्ट एवं अमेज़न पर ऑनलाइन बिक्री बढ़ रही है और वो दिन दूर नहीं जब न्यूयार्क में ‘सत्तूज‘ अपना जलवा बिखेरेगा.

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सचिन कुमार ने सत्तू को बना दिया सत्तूज़

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान सचिन कुमार बताते है कि लगभग 10 से ज्यादा देशों में सत्तूज के सैंपल भेजे जा चुके है. बिहार के आम घर से निकलकर सत्तू अब इंटरनेशनल होने वाला हैं. सत्तू को देशी एनर्जी ड्रिंक माना जाता हैं क्योंकि लम्बे समय से यात्री और सैनिक इसका इस्तेमाल करते हैं.

सत्तूज के जरिये ब्रांड बिहार को पहचान दिलाना मुख्य उद्देश्य हैं. नौकरी छोड़ी थी तब लोगो ने मज़ाक उड़ाया था लेकिन मुझे कुछ लीक से हटकर करना था. सबसे पहले सर्वे करवाया और इसके बाद रिसर्च करके ब्रांडिंग एवं पैकेजिंग पर ध्यान दिया. लोगो से प्रोडक्ट के बारे में लगातार फीडबैक लिया.

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बिहार का इंटरनेशनल ब्रांड बन रहा है सत्तूज

जब गुणवत्ता के मानकों पर हमारा प्रोडक्ट खरा उतरा तो हमने इसे ऑनलाइन मार्केट प्लेस जैसे कि अमेज़न और फिल्पकार्ट पर बेचना शुरू किया. इसके साथ ही हमने कई इंटरनेशनल ब्रांड्स और एजेंसीज को प्रोडक्ट दिखाया और उनका जवाब उत्साहित करने वाला रहा.

सचिन कुमार आगे बताते हैं कि बिहार में ही शुरुआती शिक्षा-दीक्षा हुई तो यहाँ से ख़ास लगाव रहा. पढ़ाई और नौकरी के दौरान दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में भी रहा लेकिन बिहार हमेशा से मन में बना रहा. इंटरनेशनल कम्पनीज भारत के ही प्रोडक्ट्स को अपने नाम से बेचकर लाखो रुपये कमा रही थी. तो खुद का ब्रांड और बिहार की संस्कृति को ध्यान में रखते हुए ‘सत्तू’ का चयन किया.

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भोजपुरी स्टार विकास झा के साथ सचिन कुमार

सचिन कुमार आगे बताते हैं कि लीक से हटकर काम करना था, दुनिया में बिहार की अलग पहचान बनाना ही शुरू से लक्ष्य रहा. दअरसल सत्तुज़ और सत्तू में खासा अंतर नहीं है लेकिन अगर आप गौर करेंगे तो पायेंगे कि आज की तारीख में उपभोक्ता शुद्ध चीजों को प्राथमिकता देते हैं, बाजार में उपलब्ध सत्तू को सामान्यतः खुले पानी में मिलाकर दिया जाता है जिसे हमलोगों ने गम्भीरता से लिया और सत्तुज़ का पैकेट आज आपके सामने है.

सत्तूज के अलावा सचिन कुमार एक और स्टार्टअप चला रहे हैं जिसका मुख्य उद्देश्य मिथिला पेंटिंग और हेंडीक्राफ्ट में काम करने वाले कलाकारों को उचित सम्मान एवं पैसे दिलाना हैं. पेंटिंग्स या हेंडीक्राफ्ट आइटम्स बाजार में महंगे मिलते हैं लेकिन कलाकारों को बहुत ही कम पैसा मिलता हैं. कलाकारों में जागरूकता एवं मार्केट के अभाव में बिचोलिये या दलाल उनका फायदा उठाते हैं . सचिन कुमार बिहारी संस्कृति और चित्रकला के क्षेत्र में ग्राहकों और कलाकारों के बीच की खाई को पाट रहे हैं.

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बेंगल-टेंगल के जरिये मिथिला चित्रकारी को मंच प्रदान कर रहे है सचिन कुमार

सचिन कुमार बताते हैं कि हमारी संस्था की शुरुआत पिछले साल पारंपरिक मिथिला पेंटिंग एवं बैंगल को प्रोमोट करने के उद्देश्य से बनी थी. आमतौर कलाकारों द्वारा बनाई हुई पेंटिंग से बिचौलिये कमाई के साथ ही उनका शोषण करते हैं. हमने इस मिथक को तोड़ने की कोशिश की जिसमें हम काफी हद तक कामयाब भी रहे. इसके लिए हमने एक ऑनलाइन पोर्टल (www.bangletangle.in ) बनाया जिस पर कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन खरीददारी कर सकता हैं.

हमने पुरे प्रोसेस में पारदर्शिता रखी हैं जिसके चलते पोर्टल के एक्सेस कलाकारों को भी दिए हैं. इसके जरिये कलाकार देख सकते हैं कि उनकी बनाई हुई पेंटिंग बिकी या नहीं और कितने दाम पर बिकी. आमतौर पर उन्हें उनका मेहनताना मिलने के बाद कुछ नहीं मिलता लेकिन हमारी पहल के अंतर्गत उनकी बनाई हुई पेंटिंग पर बिकने के बाद भी उन्हें लॉयल्टी के आधार पर पैसे उनके खाते में ट्रांसफर करते हैं.

शुरुआती संघर्ष के बारे में सचिन कुमार बताते हैं कि किसी भी उद्यम को शुरू करने के लिए संघर्ष एक परछाई सी होती है. मेरे केस में भी ऐसा था, पिता जी का जमा-जमाया बिजनेस और मेरा सत्तुज़ के लिए जूनून. कुछ लोगों ने इसे शुरू में ही नकार दिया था. आज ईश्वर की कृपा से वही लोग मुझे शाबाशी देते नहीं थकते! परिश्रम की बात कहूँ तो खाना खाने के लिए भी परिश्रम की जरूरत होती है और ये तो मेरा उद्यम है. जान लगाई थी तब जान में जान आयी.

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सचिन कुमार और सत्तूज टीम को मिल चुके है कई अवार्ड्स

सत्तूज और सचिन कुमार के साथ में 10 लोगों की टीम जुड़ चुकी है. क्वालिटी और गुणवत्ता को बनाये रखते हुए बिज़नेस के विस्तार पर काम चल रहा हैं. सत्तूज के लिए सचिन कुमार को कई मंचो से सम्मान मिल चूका हैं जिनमे स्टार्ट-अप नायक, बिहार स्टार्टअप कॉन्क्लेव शामिल हैं. देश के कई स्टार्टअप इवेंट्स में उनकी कंपनी विजेता बन चुकी हैं. देश से बाहर निकलकर थाईलैंड और सिंगापुर में भी सत्तूज अपनी जगह बना चूका हैं.

सचिन कुमार कहते हैं कि अपनी पहचान खुद बनानी होगी, अपना 100% दीजिये. आपके सपनों को उड़ान जरूर मिलेगी. हम सब अपनी-अपनी जिंदगी में काफी व्यस्त हैं लेकिन कुछ अपनी मिट्टी,अपने गांव, अपने राज्य या अपने देश के लिए जरूर करें.

सचिन कुमार या सत्तूज की टीम से जुड़ने के लिए यहां क्लीक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, सचिन कुमार और ‘सत्तूज‘ टीम को भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं और उम्मीद करते हैं कि आप से प्रेरणा लेकर देश के युवाओ को अपने सपने पूरा करने की प्रेरणा मिलेगी.

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