मेहनत इतनी ख़ामोशी से करो कि कामयाबी शोर मचा दे !

यह पंक्तियाँ बिहार की बेटी और साइकिलिस्ट एवं पर्वतारोही पर सटीक बैठती हैं. 24 वर्षीय साइकिल धावक ने देश के सभी राज्यों एवं दो केंद्रशासित प्रदेशों में साइकिल के जरिये यात्रा करते हुए सामाजिक सन्देश दिया. विपरीत हालातों में भी उन्होंने अपना हौसला नहीं खोया और नेपाल से लेकर श्रीलंका तक की यात्रा की. अब तक कही ऊँची चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी हैं और अब उनका लक्ष्य माऊंट एवेरेस्ट हैं. साइकिल के जरिये यात्रा करके सामाजिक सन्देश देने वाली धावक का नाम हैं सबिता महतो.

sabita mahato trekking
पहाड़ों पर राज़ करती है सबिता

बिहार के सारण जिले में जन्मी सबिता का परिवार कम उम्र में ही कोलकाता चला गया. घर-परिवार चलाने के लिए उनके पिता ने मछली बेचने का काम शुरू किया. सविता भी पिता के साथ कोलकाता में ही रही और शुरुआती पढ़ाई वही से की. बचपन से ही सबिता को खेलकूद में काफी रूचि थी और वॉलीबाल में लगातार तीन साल तक नेशनल लेवल पर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया. समाज की संकीर्ण सोच के चलते उनके पिता ने वॉलीबाल खेलने से मना कर दिया.

इसके बाद सबिता ने ज्योग्राफी ऑनर्स में दाखिला लिया और पर्वतारोही के कोर्स करने की ज़िद ठानी. परिवार के विरोध के बाद भी उन्होंने पर्वतारोहण के सभी कोर्स सफलतापूर्वक पास किये. 2014 में कोर्स के बाद कई ऊँची चोटियों को फ़तेह किया. 2015 में भी उनका सफर जारी रहा और एक पर्वत चोटी के साथ ही 12 मुश्किल ट्रेक पर चढ़ाई की. 2015 में उनका चयन Indian Mountaineering Foundation में हुआ जहाँ पर उन्हें 2 पर्वत चोटियों और दुर्गम ट्रेक पर चढ़ाई करने का मौका मिला.

sabita mission
पुरे देश को साइकिल से नाप चुकी है सबिता

सबिता यही पर रुकने वाली नहीं थी. पर्वतारोहण के साथ ही उन्होंने साइकिलिंग में भी अपना हाथ आजमाया. उन्होंने महिला सुरक्षा के लिए आयोजित ‘All India Cycling for women safety‘ में भाग लेते हुए सबसे कम उम्र की धावक का रिकॉर्ड बनाते हुए देश के 29 राज्यों में साइकिल से यात्रा की. यौन हिंसा के खिलाफ सविता महिला सुरक्षा को लेकर संदेश दे रही है. इस दौरान महिलाओं को वह जागरूक भी करती हैं.

2017 में गंगा-यमुना समेत अन्य नदी और नालों की स्वच्छता के लिए सबिता ने साइकिल यात्रा शुरू की. जो दुर्गम उच्च हिमालय ट्रैक पर साइकिल यात्रा करते हुए हरिद्वार से ऋषिकेश, देवप्रयाग, श्रीनगर, चंबा, चिन्यालीसौड, उत्तरकाशी, डोडीताल, दरबा टाप, सीमा टाप, हनुमान चट्टी से यमुनोत्री धाम तक यात्रा की. यह साइकिल यात्रा 750 किलोमीटर लंबी थी. संगम चट्टी से लेकर हनुमान चट्टी और जानकी चट्टी से यमुनोत्री तक के पैदल ट्रैक पर पहली बार किसी ने साइकिलिंग की.

sabita trekking mount Everest
माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ने का लक्ष्य है सबिता महतों का

पिता अब सबिता पर गर्व करते हैं लेकिन सविता को हमेशा मुश्किलों का सामना करना पड़ा. पर्वतारोहण और साइकिल यात्रा के लिए वित्तीय दिक्कतों का सामना करना पड़ा. सामाजिक सोच और वित्तीय बंधनो के बावजूद वो satopanth नाम की पर्वत चोटी पर तिरंगा फहरा चुकी हैं जिसकी ऊंचाई समुद्रतल से 7075 मीटर हैं.

अभी सबिता महतो उत्तराखंड एवं लेह लद्दाख में बतौर गाइड एवं ट्रेनर का काम कर रही हैं. अभी वो माउंट एवेरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए तैयारी कर रही हैं. सबिता महतो ने कम उम्र में भी यह बता दिया कि असंभव कुछ भी नहीं हैं. परिवार एवं समाज उनके विरुद्ध खड़ा था लेकिन उन्होंने अपने सपनो की उड़ान को रुकने नहीं दिया.

award to sabita mahto
अब तक कई सम्मान मिल चुके है सबिता

सबिता को कई मंचों से सम्मान मिल चूका हैं असम राइफल्स, मणिपुर पुलिस एवं असम पुलिस ने सम्मानित किया. कम उम्र में पुरे देश की साइकिल से यात्रा करने के साथ ही कई सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता अभियान में अपनी जिम्मेदारी निभाई.

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बी पॉजिटिव इंडिया, सबिता महतो के साहस और जज्बे को सलाम करता हैं और माउंट एवेरेस्ट फ़तेह करने के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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