बॉलीवुड एवं मुंबई की चमचमाती लाइफ स्टाइल के साथ ही टीवी सीरियल में शानदार करियर को छोड़कर खेती-किसानी करने का निर्णय लेने के लिए दृढ इच्छाशक्ति की जरूरत पड़ती है । मीडिया एवं लोगों के बीच प्रसिद्ध होने के बाद खेत में हल चलाना हर किसी के बस की बात नहीं है । अपनी बहन के इलाज के लिए मुंबई आये इस युवक ने अपने दोस्त के अनुरोध पर नाटक में अभिनय करने का एक मौका मिलता है ।

किस्मत से मिले इस मौके को इस शख्स ने अपना करियर बना लिया और कई सालों तक भारतीय दर्शकों का दिल अपने अभिनय से जीता । कड़ी मेहनत से मिली इस पहचान एवं प्रसिद्धि को छोड़कर जैविक खेती करने का निश्चय करना हर किसी के बस की बात नहीं है । साराभाई vs साराभाई सीरियल में ” रोसेश साराभाई “ की भूमिका निभाने वाले राजेश कुमार (Rajesh Kumar)  ने अपने गांव लौटकर जैविक खेती करने का साहसिक निर्णय लिया है ।

अभिनय जगत में अपनी प्रतिभा का लौहा मनवाने के बाद राजेश कुमार अपने गांव के लोगों को जैविक खेती (Organic Farming) के साथ ही आधुनिक खेती की तकनीक से परिचय करवा रहे है । कलाकार से किसान बने 42 वर्षीय राजेश कुमार पिछले छह महीने से खेतों में हल चलाने के साथ ही गायों का दूध तक निकाल रहे है । उन्होंने योजनबद्ध तरीके से जीरो बजट खेती (Zero Budget Farming)  या जैविक खेती या आध्यात्मिक खेती करने का निर्णय लिया जिसके तहत उनकी कूल  दस एकड़ जमीन पर उन्होंने फलों के साथ ही सब्जियों एवं अन्य फसलों का उत्पादन करना शुरू किया ।

Rajesh kumar meeting
ग्रामीणों से जैविक खेती के बारे में चर्चा करते हुए राजेश कुमार | Image Source

पटना से 125 किलोमीटर दूर स्थित बरमा गांव के राजेश कुमार ने सबसे पहले स्थानीय अधिकारीयों के साथ मिलकर गांव में सतत बिजली पहुँचाने का काम किया । राजेश ने अपने एक दोस्त से प्रभावित होकर जैविक खेती करने का सोचा क्योंकि उसके दोस्त ने जैविक खेती के माध्यम से न केवल अच्छी कमाई करना शुरू किया बल्कि अपने ही गांव के लगभग सौ किसानों को रोज़गार देने का भी पुनीत कार्य किया । राजेश गाँवो के किसानों की गरीबी को हटाना चाहते है और इसके लिए खुद जैविक खेती करके एक अनुपम उदाहरण पेश कर रहे है ।

एक इंटरव्यू में राजेश ने बताया कि मुंबई के पास नया गांव जाने से अच्छा है कि अपने गांव जाना चाहिए । शहरों में जाकर ड्राइवर या चौकीदार की नौकरी करने से अच्छा है कि जैविक खेती के माध्यम से अपनी आय बढ़ाई जाये । कीटनाशकों एवं रसायनों पर होने वाले खर्चों को रोककर किसान अपनी आय 40 % तक बढ़ा सकते है ।

राजेश के पिता शिवानंद प्रसाद अपने बेटे के इस निर्णय से बहुत प्रभावित है और बताते है कि रैली फॉर रिवर (Rally For Rivers) कार्यक्रम से प्रभावित होकर उन्होंने खेती करने का निर्णय लिया क्योंकि उनके खेत के पास ही नदी बहती है और नदी के हालत के चलते अक्सर सब को नुक्सान उठाना पड़ता है ।

राजेश अपने इस काम से देश में किसानों की हालत एवं गरीबी के तमगे को हटाना चाहते है । मुंबई में लगभग बीस वर्ष के करियर के बाद राजेश कुमार अपनी इस नयी पारी से खासे खुश है ।

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