देश में पर्यावरण के क्षेत्र में कई संस्थाए और लोग काम कर रहे हैं. पर्यावरण सरंक्षण किसी व्यक्ति विशेष या संस्था की जिम्मेदारी न होकर के सामूहिक जिम्मेदारी हैं. घने जंगलों के लिए विख्यात झारखण्ड में भी औद्योगीकरण और खनन क्षेत्र के लिए जंगलो का सफाया किया जा रहा हैं. यहाँ के ग्रामीण जिनकी संस्कृति और जीवन वनों पर टिका हुआ हैं , अब अपने घर को बचाने में लगे हुए हैं. ऐसे ही एक ग्रामीण पर्यावरणविद का नाम हैं रितु महतो (Ritu Mahto).

रितु महतो झारखण्ड के गिरीडीह जिले के बगोदर प्रखंड के मुंडरो गांव से आते हैं. इनके परिवार में चार भाई व तीन बहनों का भरा पूरा परिवार है. अपने पिता से उन्हें पर्यावरण संरक्षण की सींख मिली. वो पेड़ पौधे लगाने का काम करते थे. अब वही कार्य रीतु महतो अपने भाइयों व परिवार के सदस्यों के साथ मिलकर कर रहे हैं.

ritu mahto girdih jharkhand
रितु महतो की मेहनत रंग लाती हुई नजर आती हैं

रोजगार की तलाश में रितु महतो ने देश के कई राज्य एवं शहरों में रहने का मौका मिला. विदेश में भी नौकरी की लेकिन अपने घर एवं गांव के प्रति प्यार उन्हें वापस गांव खींच लाया. गांव आने के बाद उन्होंने खेती-किसानी के साथ ही पर्यावरण सरंक्षण पर काम करना शुरू किया. पिछले कई वर्षों में बिना किसी संस्था व सरकार के सहयोग हजारों पेड़ पौधे लगा चुके हैं. पौधे लगाने के साथ ही वो उनके लिए पानी और सुरक्षा की भी व्यवस्था करते हैं. अभी बहुत सारे फलदार वृक्ष जैसे आम,जामुन ,कटहल,महुआ,नीम बड़े हो चुके हैं.

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गांव की बदली हुई तस्वीर

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में रितु महतो बताते हैं कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता अपने पिता से विरासत में मिली. उन्होंने सैकड़ों पेड़ पौधे लगाए और उनकी सुरक्षा भी की. उनके द्वारा लगाए गए पौधे अब विशाल वृक्ष बन चुके हैं. इससे न केवल गांव में पर्यावरण के प्रति जागरूकता आई बल्कि युवा भी हमारे काम में सहयोग करने लगे. लोग धीरे-धीरे पेड़ पौधे व पर्यावरण के महत्व को समझने लगे हैं.

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अपने भतीजो के साथ पौधों में पानी डालने के लिए जाते हुए रितु महतो

रितु महतो आगे बताते हैं कि शुरू में पेड़ पौधे लगाते थे तो देख रेख के अभाव में पौधे जानवरों व अन्य कारणों से मर जाते थे. धीरे धीरे लोगों में जागरूकता व पेड़ पौधे लगाने के बाद उनकी बढ़िया से देख रेख होने से बंजर हो रहे जंगल में हरियाली वापस लौट रही है. पेड़ पौधे मुख्य रूप से तालाबों के मेड, सड़क के किनारे, खेतों व मैदानी क्षेत्र में लगाए जाते हैं. जिससे पर्यावरण संतुलन में बड़ी भूमिका निभाई है.

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गांव में खासा परिवर्तन देखने को मिलता हैं

पेड़ पौधे लगाने के कार्य में रीतु महतो को अपने परिवार का पूरा सहयोग मिलता हैं. इसी के साथ गांव में उन्होंने ‘वन संरक्षण समिति‘ में भी सक्रिय रूप से कार्य करते हैं जो पिछले चालीस वर्षों से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में काम कर रही हैं. ग्रामीण एवं युवा इस पुनीत पहल में रितु का सहयोग करते हैं. वन संरक्षण समिति में मुंडरो ग्रामीण की महिलाएँ भी पीछे नहीं हैं और उनके द्वारा भी वन संरक्षण में पूरा सहयोग मिलता है.

वन संरक्षण समिति में वरिष्ठजन जगदिश महतो, चन्द्रदीप महतो, जगदीश चौधरी, चीतो महतो, बंशी महतो, करुणा प्रसाद, शीतल महतो, शनिचर महतो, पुरन दास, कैला महतो ,भीखो महतो, हिरालाल के साथ ही हिरामन, भेखलाल, अजय, देवनाथ, राजू, राजेश, सीता राम, कालीचरण, मनोज, मेघलाल, सौरभ, दशरथ, भोला, कोकिल, सुखदेव, विनय, जागेशवर, दिनेश, इंद्रजीत, पूरन, बासूदेव, लोकनाथ, सेवाचंद , भागीरथ जैसे युवाओं का योगदान रहता हैं.

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वन सरंक्षण समिति के सदस्य

रितु महतो कृषि कार्य के साथ साथ पेड़ पौधे लगाने का काम करते हैं और पर्यावरण मित्र के रुप में प्रसिद्ध हैं. एक कम पढ़ा लिखा इंसान जिन्होंने पर्यावरण के महत्व के बारे में किताबों में नहीं पढ़ी ,लेकिन पर्यावरण के प्रति उनकी जानकारी व जागरूकता हम सब पढ़े लिखे लोगों को मात देती है. पर्यावरण संरक्षण के कारण उन्हें कई बार परिवारजनों व समाज के द्वारा पैसे के अभाव में परेशानी भी झेलने पड़ते हैं लेकिन पर्यावरण के प्रति झुकाव इन मुसीबतों से निकलने में मदद करता हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, रितु महतो और ‘वन संरक्षण समिति‘ के कार्य की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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