परिवर्तन शुरू करने से पहले खुद को परिवर्तित करना पड़ता हैं.

यह पंक्तियाँ पूर्व पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता पर सटीक बैठती हैं. देश में सड़क सुरक्षा के हालात बदतर हैं लेकिन यह युवा अपने एनजीओ के जरिये लोगो को सड़क सुरक्षा के लिए जागरूक कर रहा हैं. देश के मेट्रो शहर से लेकर गांव-कस्बों तक यातायात नियमों की अनदेखी की जाती हैं. जिसके चलते देश में रोज़ 1200 से ज्यादा लोग जान गंवाते हैं और 500 से ज्यादा दुर्घटनाए होती हैं.

इन सड़क दुर्घटनाओं के पीछे मुख्य कारण सड़क एवं यातायात नियमों की अनदेखी करना होता हैं. इसी समस्या के समाधान के लिए इस पत्रकार ने अपनी नौकरी छोड़कर प्ले स्कूल के साथ ही कई अभियानों की शुरुआत की. सड़क दुर्घटनाओं से लोगों की जान बचाने का काम कर रहे हैं ऋषभ आनंद (Rishabh Anand).

झारखंड के रांची शहर से आने वाले ऋषभ आनंद पोस्टर, वर्कशॉप्स, सेमीनार के जरिये लोगो को यातायात नियमों के प्रति जागरूक बना रहे हैं, ऋषभ आनंद ने 2016 में ‘राइज अप‘ नाम से एनजीओ शुरू किया जो लोगो को सड़क सुरक्षा नियमों के बारे में जागरूक करता हैं.

road safety
ट्रैफिक नियम समझाते राइज-अप की टीम

इसी के साथ उन्होंने ‘कार्टून प्ले स्कूल‘ के नाम से एक स्कूल भी शुरू किया हैं. जिसमे बेसिक शिक्षा के साथ ही ट्रैफिक नियमों को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया. बच्चों को छोटी उम्र से ही नियमों के बारे में जागरूक करना उनके लिए फायदेमंद रहता हैं और उन्हें अच्छा नागरिक बनने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में ऋषभ आनंद बताते हैं कि सड़क सुरक्षा देश के लिए गंभीर मुद्दा हैं. मलेरिया और अन्य रोगों की तुलना में सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादा जान चली जाती हैं. ज्यादातर मामलों में दुर्घटना का कारण तेज गति, ओवर टेकिंग और लेन रूल का पालन नहीं करना होता हैं. सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल की बेरुखी भी जान के लिए खतरा बन जाती हैं. हेलमेट एवं सीट बेल्ट का प्रयोग भी लोग ट्रैफिक पुलिस के चालान से बचने के लिए करते हैं न कि अपनी सुरक्षा के लिए.

road safety with volunteers
ट्रैफिक नियम समझाते राइज-अप की टीम

मैंने पत्रकार के रूप में दिल्ली एवं बैंगलोर में काम किया. वहां पर ट्रैफिक के हालात बहुत ख़राब हैं. कुछ किलोमीटर तय करने में घंटों का समय लग जाता हैं. ट्रैफिक का मुख्य कारण यातायात नियमों का पालन न करना हैं जिसके चलते लम्बे जाम देखने को मिलते हैं. लोग यातायात नियमों के बारे में जागरूक होने के बाद भी उनका पालन नहीं करते हैं.

ट्रैफिक की इस समस्या को हल करने के लिए मैंने गृह क्षेत्र रांची आने का फैसला किया. यहाँ पर ‘प्रयास -एक कदम सड़क सुरक्षा की और‘ नाम से अभियान शुरू किया. स्वयंसेवियों के साथ पोस्टर एवं रैली के जरिये आम लोगो को सड़क नियमों के बारे में बताया. यातायात पुलिस एवं सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर कार्यक्रम आयोजित किये. अब तक 250 से ज्यादा स्कूल एवं कॉलेज में सड़क सुरक्षा के बारे में वर्कशॉप कर चुके हैं.

rishabh with kids
बच्चों को स्कूल में ट्रैफिक नियम समझाते ऋषभ आनंद

इन अभियानों के साथ ही ऋषभ आनंद एक नया कांसेप्ट लेकर आये जिसमें बच्चों को कम उम्र से ही यातायात नियमों के बारे में जानकारी दी जाती हैं. यह स्कूल अपने तरह का एकमात्र स्कूल है जो सड़क सुरक्षा थीम पर आधारित है.

इस कांसेप्ट के बारे ऋषभ आनंद बताते हैं कि हम जब छोटे होते हैं तब यदि कोई बात सींखते हैं तो वो पूरी उम्र हमारे साथ बनी रहती हैं. जैसे हम गिनती या अक्षर ज्ञान सींखते हैं तो उसे बार-बार नहीं सिंखना पड़ता हैं और वो हमारे साथ उम्र भर बनी रहती हैं. इसी सोच के साथ हमने ‘कार्टून प्ले स्कूल‘ के जरिये बेसिक शिक्षा के साथ ही मॉडल, पोस्टर एवं डांस के साथ ट्रैफिक नियमों से बच्चों को अवगत करा रहे हैं. बच्चे बड़ी दिलचस्पी के साथ इन चीज़ों को सींखते हैं और आत्मसात करने का प्रयास करते हैं.

rishabh with milind
अभिनेता मिलिंद सुमन के साथ ऋषभ आनंद

ऋषभ आगे बताते हैं कि 2015 में ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क सुरक्षा पर अकेले ही काम करने की शुरुआत की. समय के साथ जरूरत बढ़ने पर उन्होंने 2016 में ‘राइज अप’ नाम से संस्था का निर्माण किया. शुरुआत में इस विषय की गंभीरता को लोगों तक समझाने में काफी कठिनाई हुई. फण्ड की कमी, मैनपावर का अभाव आदि से जूझना पड़ा. बड़े कैंपेन के लिए विभागों से तालमेल बैठाने में भी दिक्कते आयीं लेकिन सतत प्रयास से सब मुमकिन हुआ.

रांची के अलावा पलामू, बोकारो, जमशेदपुर ,धनबाद आदि में भी काम किया जा रहा है. इसके अलावा मुफ्त में ट्रैफिक एक्सीडेंट्स विक्टिम्स को मेडिकल और लीगल काउंसलिंग उपलब्ध कराई जा रही है. कई तरह के एजुकेशन प्रोग्राम चल रहे हैं.

rishabh Anand rise up ranchi awards
ऋषभ आनंद को कई मंचों पर सम्मानित किया जा चूका हैं.

ऋषभ आगे बताते हैं कि स्कूल, कॉलेजो में वर्कशॉप के बाद अक्सर बच्चे सोशल मीडिया के जरिये मुझसे जुड़ते हैं और अपने में हुए बदलाव को साझा करते हैं कि कैसे उन्होंने साईकल को अपनाया, या हेलमेट को स्वीकारा, कइयों के पेरेंट्स बताते हैं कि बच्चे उन्हें तेज वाहन चलाने से कैसे रोकते हैं.

ऋषभ कहते हैं कि यातायात नियमों का पालन करें, जिदगी से प्यार करें, सड़कों पर दूसरों को भी सम्मान दें.

बी पॉजिटिव इंडिया, ऋषभ आनंद और ‘राइज अप‘ की पूरी टीम के कार्यों की सराहना करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाऍ देता हैं.

Comments

comments