भारत की आज़ादी के साथ ही इस औद्योगिक समूह की शुरुआत होती है लेकिन 1970 में अपने फॅमिली बिज़नेस से अलग होकर इस उद्यमी ने एक नए ग्रुप की शुरुआत की जो आज TT ग्रुप के नाम से जाना जाता है । कपड़ा, यार्न , कॉटन के साथ पावर एवं एनर्जी क्षेत्र में भी इन्होने कदम रखे तथा एग्रो कमोडिटीज में भी इस ग्रुप ने सक्रिय रूप से भाग लेना शुरू कर दिया है ।

इस ग्रुप ने न केवल भारत बल्कि पचास भी ज्यादा देशों में अपनी गुणवत्ता के दम पर ग्राहकों के बीच अपनी पेठ बनायी है । अपने फॅमिली बिज़नेस से अलग होकर दिल्ली में एक मिल से शुरुआत करने वाला यह ग्रुप आज 500 करोड़ से ज्यादा का सालाना टर्नओवर करता है । पढ़ने में शुरू से ही तेज और कुशल व्यापारिक सोच वाले R C जैन (Dr. Rikhab Chand Jain) ने इस ग्रुप की नींव रखी ।

आज TT समूह किसी भी परिचय का मोहताज नहीं है , अपनी शानदार गुणवत्तायुक्त उत्पादों के चलते इसने खास जगह बना ली। यार्न एवं कॉटन से अपने बिज़नेस की शुरुआत करने वाले RC जैन ने धीरे-धीरे कदम बढ़ाते हुए गारमेंट इंडस्ट्री में भी अपनी छाप छोड़ दी ।

इसके बाद पावर एवं एनर्जी क्षेत्र में भी कदम रखे और इन क्षेत्रों में भी सफलता की ओर अग्रसर है । एक मारवाड़ी बिज़नेस परिवार से आने वाले RC जैन ने अपनी व्यापारिक कुशलता से 4 लाख से शुरुआत करके अपनी कंपनी को एक बिज़नेस ग्रुप में तब्दील कर दिया।

राजस्थान के बीकानेर जिले में एक मारवाड़ी जैन परिवार में उनका जन्म हुआ । उनके पिता बीकानेर में ही एक गारमेंट शॉप चलाया करते थे और RC जैन भी स्कूल में पढाई के दौरान ही अपने पिता की व्यवसाय में मदद करते थे । उसके बाद वो अपने परिवार के बिज़नेस से जुड़ने के लिए कोलकाता पहुँच जाते है लेकिन अपनी पढाई भी जारी रखते है ।

कोलकाता में ही अपनी कॉलेज की पढाई ख़त्म करने के बाद वो MBA के लिए IIM कोलकाता में पहुँच जाते है । 1967 में अपनी पढाई पूरी करने के बाद उन्होंने मोटी तनख्वाह वाली नौकरी की जगह अपने फॅमिली बिज़नेस में काम करने का मन बनाया । RC जैन बिज़नेस के साथ ही अध्यापन में भी लगे रहे और लगभग तीन साल तक उन्होंने IIM में विजिटिंग फैकल्टी के रूप में अपनी सेवाए दी ।

1970 में बंगाल में नक्सलवाद एवं राजनितिक हालतों के चलते उन्होंने कोलकाता की जगह दिल्ली में अपनी फैक्ट्री स्थापित करने का साहसिक निर्णय लिया और अपने परिवार से अलग होकर उन्होंने 4 लाख से शुरुआत करते हुए दिल्ली में एक मिल की स्थापना कर डाली । इस शुरुआत के बाद उन्हें कई समस्याओं का सामना करना पड़ा लेकिन RC जैन हार मानने वालों में से नहीं थे । कठोर मेहनत और ईमानदारी के चलते उनकी व्यापारिक क्षेत्र में पेठ बनना शुरू हो गयी थी ।

दिल्ली में सफलता का स्वाद चखने के बाद उन्होंने तमिलनाडु के तिरुपुर में एक और यार्न मिल लगायी । उच्च गुणवत्ता के चलते देश ही नहीं विदेश के टेक्सटाइल के मार्केट्स में उनके यहाँ के बने यार्न एवं धागे की डिमांड बढ़ने लगी ।

उन्होंने हमेशा से ही पारदर्शी एवं पूरी ईमानदारी से काम किया जिसके चलते उनके व्यापार में दिन दूनी और रात चौगुनी वृद्धि होने लगी । 1990 में उन्होंने शेयर मार्केट से पैसे जुटाने के लिए IPO का सहारा लिया और TT ग्रुप, भारत की पहली गारमेंट क्षेत्र की कंपनी बनी जो शेयर मार्केट में लिस्ट हुई ।

शेयर मार्केट से मिले पैसे से TT ग्रुप ने आक्रामक मार्केटिंग एवं डीलरशिप नेटवर्क खड़ा करने की रणनीति बनायीं जिसके चलते उनके पास 50 से ज्यादा मैन्युफैक्चरर जुड़ गए तथा यार्न एवं धागे से आगे निकलते हुए गारमेंट क्षेत्र में भी अपना प्रभाव बढ़ाया ।

वैसे दिल्ली में पहली फैक्ट्री से ही अंडर-गारमेंट बिज़नेस में एंट्री कर ली थी लेकिन कंपनी का मुख्य फोकस यार्न, कॉटन एवं धागे में रहा क्योंकि उस समय TT ग्रुप के उत्पादों की मार्केट में भरी डिमांड थी ।

इसके चलते उन्होंने अपनी कंपनी का खूब विस्तार किया और उत्तर प्रदेश के साथ ही बंगाल में एक तथा गुजरात में दो मिल की स्थापना की । अंडर-गारमेंट के लेबल से बाहर निकलते हुए उनके ग्रुप ने जेंट्स के साथ ही किड्स वियर में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करवाई है । रोज़ बदलते फैशन एवं डिज़ाइन के साथ भी TT ग्रुप तालमेल बिठाने में सफल रहा है ।

TT ग्रुप शायद देश की इकलौती कंपनी है जो कॉटन फाइबर से लेकर फैशन तक सारा काम एक ही छत के नीचे करती है जिसके चलते उन्हें दूसरी कंपनी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता है । गारमेंट मैन्युफैक्चरर से शुरुआत करके आज TT ग्रुप फैशन ब्रांड के साथ ही रिटेल स्टोर एवं ब्रांड स्टोर खोलने की महत्वाकांक्षी योजना है ।

व्यापारिक मूल्यों के साथ ही गांधीजी एवं भगवान महावीर की शिक्षाओं का पालन करने वाले RC जैन ने एक करोड़ो रुपये का ग्रुप बना दिया लेकिन वो सामाजिक सरोकारों में भी पीछे नहीं है । कई समाजसेवी संस्थाओं के साथ ही शिक्षा एवं स्वास्थ्य में भी वो योगदान देते है तथा अपनी व्यस्त दिनचर्या में भी इन कार्यों के लिए समय निकलते है ।

अपने ग्राहकों के साथ ही मैन्युफैक्चरर और सप्लाई करने वाले उद्यमियों का भी वो उतना ही ख्याल रखते है , जितना वो अपने परिवार का रखते है । इसी सोच के चलते आज भी कई डीलर्स एवं कम्पनीज कई दशकों से TT ग्रुप से जुड़ी हुई है । नए क्षेत्रों में कदम रखने के साथ ही नए उत्पाद एवं सोच को भी TT ग्रुप ने हमेशा से अपनाया है जो उनके सफलता का मुख्य कारण है ।

RC जैन कहते है कि पैसों के पीछे मत भागिए, अपने ग्रुप या कंपनी की ब्रांड इमेज या गुडविल बनाइये क्योंकि लगातार मेहनत करने से पैसा तो आपके पास आ ही जायेगा लेकिन अगर इमेज एक बार ख़राब हुई तो लाखों रुपये की एडवरटाइजिंग भी कुछ नहीं कर सकती है ।

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