कोशिश कर हल निकलेगा, आज नहीं तो कल निकलेगा
अर्जुन के तीर सा सध, मरुस्थल से भी जल निकलेगा ।

सफलता की राह कभी सीधी नहीं होती और कुछ लोगों के लिए तो कई मोड़, कई बाधाओं को पार करने के बाद ही सफलता का मुख देखने को मिलता है और ऐसा ही कुछ घटित हुआ रतन दीप गुप्ता (Ratan Deep Gupta) (रैंक 767, सिविल सेवा परीक्षा 2017) के साथ.

अपने भविष्य के बारे में स्वप्न देखते हुए रतन दीप की निगाहें टिक गई थीं सिविल सेवाओं में कैरियर बनाने पर. निर्णय बड़ा था और यह स्पष्ट था कि यह इतना आसान नहीं.

अपने परिवार के प्रति कर्तव्यों को ध्यान में रख अपने गंतव्य कैरियर तक पहुचने की तैयारी से पहले रतन दीप ने एक वैकल्पिक कैरियर सुरक्षित करना उचित समझा. इसके लिए उन्होंने कई प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल हो एक के बाद एक सफलता भी प्राप्त की.

भारतीय स्टेट बैंक में असिस्टेंट (2010), एस.एस.सी एकाउन्टेंट (2010), एस.एस.सी ऑडिटर (2011 व 2012) और कर्मचारी चयन आयोग के माध्यम से चयन के साथ एकाउन्टेंट के पद पर कार्यरत्त रहे.

अपने लक्ष्य के बारे में बताते हुए रतन दीप ने IASPassion.com से कहा कि “सिविल सेवा एक कैरियर होने के साथ समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम भी है. पहले से ही सरकारी सेवा में होने के कारण सिविल सेवा में व्याप्त चुनौतियों अवं संभावनाओं के प्रति नैसर्गिक रुचि होने का कारण भी मेरा इस ओर झुकाव रहा.

रतनदीप के पिता श्री बद्री प्रसाद गुप्ता जी व्यवसायी हैं और उनकी माता श्रीमती गायत्री देवी गृहणी हैं. उनकी छोटी बहन दीपिका सहायक अध्यापिका है और छोटा भाई राजन अध्ययनरत्त है.”

मेरा परिवार मेरी सफलता की नींव है. आर्थिक, मनोवैज्ञानिक सभी स्तरों पर और कठिन से कठिन और घोर निराशा के क्षणों में भी मेरा परिवार सदैव मेरा उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ाता रहा.” – रतन दीप गुप्ता

पहले प्रयास में अपनी कुछ गलतियों के कारण वो सफल नहीं हो पाए. दूसरे प्रयास में कुछ स्वास्थ्य संबंधी कारणों से प्रारम्भिक परीक्षा भी पार नहीं कर पाए. इसके बाद लगातार तीन प्रयासों में साक्षात्कार स्तर तक पहुंचे . अंततः वो पाँचवे प्रयास में सफल रहे.

उनके पिता जी हर असफलता के बाद उनसे कहते थे – “अभी तो अंगडाई है, आगे बहुत लड़ाई है और उनके पिता के शब्द उनका मनोबल बढ़ाते रहे और कुछ देर से ही सही, आखिर सफलता मिल ही गई.

इस प्रयास में सफलता के लिए रतनदीप प्रेरणास्त्रोत मानते हैं अपनी भूतपूर्व सहकर्मी विन्ध्या नूपुर (भारतीय राजस्व सेवा, सिविल सेवा परीक्षा 2016) की सफलता को जिन्होंने अपने परिवार एवं कार्यालय की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बैठा, स्वअध्ययन से सफलता प्राप्त की.

हिन्दी माध्यम के साथ सफलता के बारे में रतन दीप ने कहा कि “सिविल सेवा परीक्षा में सफलता के लिए महत्वपूर्ण है लेखन सामग्री की गहराई और प्रस्तुतिकरण न कि लेखन माध्यम. इसके लिए आपको चाहिये तैयारी की एक समुचित रणनीति और बिना विचलित हुए सफलता की आशा के साथ समग्र प्रयास.

आगामी परीक्षाओं में शामिल होने जा रहे अभ्यर्थियों को संदेश देते हुए रतन दीप करते हैं कि वर्ष 2014 में मुझे एक गम्भीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना पड़ा और उस वर्ष मैं प्रारम्भिक परीक्षा भी उत्तीर्ण न कर सका. मैने उसके बाद लगभग यह मन बना लिया था कि मैं अब यू.पी.एस.सी. की तैयारी नहीं करूँगा.

इस स्वास्थ्य समस्या के बाद के प्रभाव आगे कुछ वर्षों तक रहे जिस कारण मैं एक सीमा तक ही मेहनत कर पाता था, फिर भी परिवार एवं दोस्तों के सहयोग से मैंने वर्ष 2015, 2016 और 2017 परीक्षा में साक्षात्कार स्तर तक पहुँचने में सफलता पाई और 2017 परीक्षा में अंततः चयनिय हुआ.

इसलिए आप सभी से कहना चाहुँगा कि जीवन में कैसी भी और कितनी भी कठिन परिस्थितियाँ क्यों न आ जायें, कभी डरें नहीं और न ही कभी निराश हों.

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