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8 साल पाकिस्तानी रिफ्यूजी कैम्प में भटकते हुए जिंदगी काटी। 9 साल अफगानिस्तान में गन कल्चर से लड़ते हुए क्रिकेट सीखा। बीच-बीच में पिता के टायर और पंक्चर की दुकान में भी काम किया। अब 19 साल की उम्र में अपनी परफॉर्मेंस से हैदराबाद को फाइनल तक पहुंचा दिया। दुनिया के नंबर 1 T-20 स्पिनर कहे जा रहे राशिद खान अरमानी (rashid khan) का सफर बहुत ही दिलचस्प एवं संघर्षमय रहा है ।

काबुल से 60 किमी दूर जलालाबाद शहर के रहने वाले राशिद के IPL तक के सफर में तीन लोगों का सबसे अहम रोल है। पहला उनके भाई जलिल खान का। दूसरा उनके जिले में एकेडमी चलाने वाले अफगानिस्तानी क्रिकेटर हस्ती गुल का। तीसरा और सबसे बड़ा रोल उनके U-19 कोच दौलत खान अहमदजई का। दौलत अभी अफगानिस्तान के हेड कोच भी हैं।

रिफ्यूजी कैम्प में लगी TV ने बनाया राशिद को क्रिकेट का दीवाना

2001 में शुरू हुए अफगान वार के चलते राशिद को परिवार के साथ पाकिस्तान रिफ्यूजी कैम्प में रहना पड़ा था। करीब 8 साल वो यहां रहे। कैम्प में केवल एक घर में ही टीवी थी। राशिद चोरी-छिपे वहां जाकर पाकिस्तान का मैच देखता था। यहीं से उसे क्रिकेट से प्यार हो गया।

जलिल के मुताबिक, वो और राशिद दोनों पहले टीवी में मैच देखते। फिर लकड़ी के पटरे से कैम्प के बाहर मैच में खेले गए शॉट लगाने और उसी तरह से बॉलिंग की कोशिश करते थे। यहीं से खान ने पाकिस्तानी क्रिकेटर अफरीदी को अपना आदर्श मानना शुरू कर दिया था। उस समय गली-क्रिकेट में बॉल से बीट कराने पर ही आउट मान लिया जाता था। वहीं से राशिद की स्पिन कराने की थोड़ी-थोड़ी शुरुआत हुई थी।

10 भाई और सभी कराते हैं लेग स्पिन बॉलिंग

10 भाई-बहनों में से एक राशिद की टीवी देखकर की जाने वाली प्रैक्टिस रिफ्यूजी कैम्प में पूरे 8 साल तक चली। हालांकि, इस दौरान लकड़ी के पटरे की जगह बैट ने जरूर ले ली थी। राशिद के सभी भाई स्थानीय टूर्नामेंट के मैचों में लेग स्पिन बॉलिंग कराते थे। दुनिया के सबसे युवां इंटरनेशनल क्रिकेट कप्तान राशिद ने इसी संघर्ष के साथ क्रिकेट के शुरुआती सफर को आगे बढ़ाया।

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ज़िम्बावे के खिलाफ राशिद खान का शानदार प्रदर्शन

टेनिस की बॉल चेहरा ना बिगाड़ दे, इसलिए मां बनाना चाहती थी डॉक्टर

राशिद टेनिस बॉल से अभ्यास करता था। मां को डर था कि कहीं ये बॉल बेटे का चेहरा ना बिगाड़ दे। इसलिए वो उसे डॉक्टर बनाना चाहती थी। इसके लिए राशिद पर दबाव भी डाला। लेकिन भाई-बहनों के सपोर्ट के आगे मां को क्रिकेट के प्यार को स्वीकार करना पड़ा।

जलिल के मुताबिक, बाद में मां से लेकर पूरा परिवार राशिद के क्रिकेट खेलने के फैसले में साथ खड़ा था। जहां भी मैच होता वहां भाई अपने साथ राशिद को ले जाता। मैच खिलवाकर वापस भी लाता था। इस दौरान उसने लोकल लेवल पर कुची ट्राइब टीम की तरफ से खेलना भी शुरू कर दिया था।

राशिद के पहले ऑफिशियल कोच और पूर्व अफगानिस्तानी क्रिकेटर दौलत खान अहमदजई थे। उनके मुताबिक, 2012 में जलालाबाद में एक सेलेक्शन ट्रायल में राशिद ने हिस्सा लिया था।

अफगानिस्तान के हेड कोच (नेशनल-U19) अहमदजई ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस ट्रायल के चीफ सेलेक्टर वो खुद थे। ट्रायल मैच में राशिद की परफॉर्मेंस ज्यादा अच्छी नहीं थी। वो बिना लाइन लेंथ के ज्यादा तेजी से बॉल फेक रहा था। सेलेक्शन कमेटी ने उसे लेने से मना कर दिया था। हालांकि, कई लोकल टीमों में ओपनिंग के चलते राशिद की बैटिंग अच्छी थी। अहमदजई ने अपनी गारंटी पर राशिद को एंट्री दिलवाई। और 3 साल तक उस पर कड़ी मेहनत की।

30 किमी तक जाना पड़ता था पैदल

अहमदजई से कोचिंग लेने के अलावा राशिद घर से 30 किमी दूर बने नानगरहर क्रिकेट एकेडमी में भी प्रैक्टिस करता था। घर से पैदल जाना पड़ता था। पूर्व अफगानी खिलाड़ी हस्ती गुल इस एकेडमी के हेड थे। गुल और राशिद के भाई जलिल दोनों अच्छे दोस्त थे।

गुल ने एक इंटरव्यू में बताया कि एक बार देर रात सारे बैट्समैन के जाने के बाद राशिद सिंगल स्टम्प के साथ बॉलिंग कर रहा था। उनकी स्पिन होती बॉल को देखकर वो आश्चर्यचकित हो गए। इसके बाद गुल रोज राशिद से बॉलिंग करवाने लगे। गुल ने ही ऑफिशियल कोच अहमदजई को राशिद की आल राउंडर प्रतिभा के बारे में पहले बताया था। इसके बाद दोनों ने मिलकर राशिद की बॉलिंग क्वालिटी को इतना तरासा कि 2015 आते-आते उन्हें बॉलिंग के लिए पहचाना जाने लगा।

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राशिद खान का 2017 में शानदार प्रदर्शन
 इंजमाम उल हक ने  दिया था पहला नेशनल ब्रेक

अहमदजई ने बताया, 2015 में पाकिस्तानी क्रिकेटर इंजमाम उल हक अफगानिस्तान के हेड कोच बने। उन्हें जिम्बाब्वे के लिए टीम चुननी थी। तब राशिद का नाम अहमदजई ने इंजमाम के सामने रखा गया। लेकिन इंजी नहीं माने। उसके बाद राशिद से उस समय के अफगानिस्तान नेशनल टीम कप्तान अश्गर स्टैनिकजई को बॉलिंग कराने को कहा गया। राशिद की बॉलिंग देखकर कैप्टन आश्चर्यचकित हो गए। फिर कप्तान और अहमदजई के कहने पर इंजमाम ने राशिद को पहला नेशनल मैच खेलने का मौका मिला।

बांग्लादेश में तैयार हुई स्क्रिप्ट

राशिद की IPL में एंट्री की स्क्रिप्ट बांग्लादेश T-20 के टाइम से लिखी जाने लगी थी। राशिद के कोच अहमदजई के मुताबिक, 2015 में जिम्बाब्वे दौरे के बाद 2016 में राशिद ने बांग्लादेश T-20 लीग में कोमिला विक्टोरियन्स टीम की तरफ से खेलना स्टार्ट किया।

यहां के अच्छे प्रदर्शन के बाद 2017 में आयरलैंड के साथ हुए T-20 मैच में राशिद के 2 ओवर में 5 विकेट ने उसे सेलेक्टर्स की नजरों में पूरी तरह से ला दिया। ऐसा करने वाला वो इस फॉर्मेट का इकलौता खिलाड़ी था। बांग्लादेश लीग के दौरान ही श्रीलंकाई प्लेयर कुमारा संगकारा की नजरें राशिद पर पड़ी। संगकारा ने इस बारे में मुथ्थैया मुरलीधरन से जिक्र किया। मुरलीधरन और टॉम मूडी दोनों तभी से इस खिलाड़ी को फॉलो कर रहे थे।

मुरलीधरन और टॉम मूडी के जरिये हुई एंट्री

इसी बेहतर परफॉर्मेंस के दम पर हैदराबाद टीम के कोच टॉम मूडी ने 2017 में पहली बार 4 करोड़ में और 2018 में 9 करोड़ में राशिद को खरीदा था। अहमदजई का कहना है कि राशिद को IPL में भी जब जरूरत पड़ती है तो वो उनसे स्ट्रैटजी पर डिस्कस करता रहता है। लगभग डेली बात करता है। पिछले दिनों उसने धोनी के खिलाफ भी बॉलिंग को लेकर टिप्स मांगे थे। मौजूदा समय में राशिद आईपीएल समेत 7 इंटरनेशनल लीग में खेल रहे हैं। इनमें ऑस्ट्रेलियाई लीग और इंग्लैंड काउंटी जैसी लीग शामिल हैं।

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