मुश्किल नहीं है कुछ दुनियां में, तू जरा हिम्मत तो कर ।
ख्वाब बदलेंगे हकीकत में, तू जरा कोशिश तो कर ॥

यह पंक्तियाँ इस युवा पर सटीक बैठती है. परिस्थितियों से हारे बिना संघर्ष किया और देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी की प्रवेश परीक्षा पास की, जिसमे वो खुद सिक्योरिटी गार्ड के रूप में कार्यरत है. हालातों ने उन्हें बहुत छोटी उम्र में ही काम ढूँढने के लिए मजबूर कर दिया था लेकिन अब वो रशियन भाषा पढ़ेंगे. उनका सपना यूपीएससी पास करके आईएएस अधिकारी का है और अपने मजबूत इरादों से जरूर अपने मुकाम पर पहुंचेंगे. संघर्ष की पराकाष्ठा और कड़ी मेहनत का दूसरा नाम है रामजल मीणा.

रामजल मीणा जेएनयू (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी) में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं. इस साल उन्होंने जेएनयू से रशियन भाषा में ग्रेजुएशन करने के लिए प्रवेश परीक्षा दी थी. प्रवेश परीक्षा का परिणाम आ गया है और वो सफल हो चुके है. अब वह जेएनयू में प्रवेश ले कर वहाँ के छात्र बनने वाले हैं. वह जहाँ गार्ड की नौकरी करते हैं, अब वहीं के छात्र बनने जा रहे हैं.

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अपनी ड्यूटी के दौरान रामजल मीणा | साभार : इंटरनेट

रामजल मीणा की कहानी काफ़ी प्रेरणादायक है. पेट की भूख को मिटाना ज्यादा ज़रूरी होता है, इसलिए कम उम्र में ही रामजल जैसे गरीब छात्र पढ़ाई छोड़ कर मज़दूर बन जाते हैं. लेकिन जो गरीब युवा अपनी परिस्थितियों को बदलना चाहते हैं, उन्हें लंबा संघर्ष करना पड़ता है. उन्हें पेट के लिए मज़दूरी भी करनी पड़ती है और काम से समय निकाल कर पढ़ाई भी करनी पड़ती है.

रामजाल बताते हैं, “वह साल 2003 था, जब सिर्फ 18 साल की उम्र में मेरी शादी कर दी गयी थी. उस समय मैंने बीएससी में दाखिला करवाया था, लेकिन ब्याह के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी. पढ़ाई छोड़ने के दो कारण थे. एक, मां-बाप बूढ़े हो गए थे और अब वे लोग मुझे कमाकर खिला नहीं सकते थे. दूसरा, मेरी पत्नी की जिम्मेदारी भी मेरे सिर थी.

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अपनी ड्यूटी के बाद पढ़ाई करते हुए रामजल मीणा | साभार : इंटरनेट

राजस्थान के करौली जिले से आने वाले रामजल ने लगातार 2 साल तक इधर-उधर मज़दूरी की. इसके बाद साल 2005 में रामजल सिर्फ़ तीन हज़ार की तनख्वाह पर सिक्योरिटी गार्ड भर्ती हो गए और अपने परिवार का पेट पालने लगे. लेकिन रामजल के मन से पढ़ाई करने की लगन कभी कम नहीं हुई. वह कम पैसे में पुरानी किताबें खरीदते और पढ़ाई करते. ड्यूटी के दौरान पढ़ने के कारण उन्हें उनके अफसरों से डांट-फटकार भी लगती.

रामजल ने राजस्थान यूनिवर्सिटी से ओपन लर्निंग के फॉर्म भर ग्रैजुएशन भी पूरी की लेकिन उन्हें फ़िर भी संतुष्टि नहीं हुई. रामजल 1 नवंबर, 2014 से जेएनयू में सिक्योरिटी गार्ड के पद पर तैनात हैं. उनकी ड्यूटी रात के समय होती है. वह घर से किताबें साथ लेकर आते और ड्यूटी करते वक़्त ही थोड़ा-थोड़ा समय निकालकर पढ़ाई करते थे.

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अपने परिवार के साथ रामजल मीणा | साभार : इंटरनेट

वह बताते हैं, “मेरे तीन बच्चे हैं. मेरी पत्नी गृहिणी हैं. मैं भी घर के काम में उनका हाथ बंटाता हूँ. तीनों बच्चों की पढ़ाई पर भी ध्यान देता हूँ. हम जेएनयू के सामने वाले गाँव मुनिरका में एक कमरे में रहते हैं. मुझे अपनी पढ़ाई घर और नौकरी के बीच ही करनी थी. शुरुआत में थोड़ी मुश्किल भी हुई, लेकिन धीरे-धीरे मैंने समय निकालना सीख लिया.

अपनी आर्थिक स्थिति पर रामजल कहते हैं, “दिल्ली ऐसा शहर है कि जितना एक गरीब को देता है, उतना वापस ले भी लेता है. मुझे मिलने वाले 13 हज़ार में पांच हज़ार तो कमरे के किराए में ही चले जाते हैं. उसके बाद तीनों बच्चों की पढ़ाई, उनके लिए अच्छे खाने-पानी में लगभग सब खर्च कर देता हूँ. मेरी पत्नी और मैं बिल्कुल मुट्ठी बंद करके पैसे खर्च करते हैं. खैर, मेहनत पर मुझे यकीन है, इसलिए ये तंगी वाले दिन भी पलटेंगे.

रामजल यूपीएससी की परीक्षा पास कर आईएएस अफसर बनना चाहते हैं. इससे पहले भी वह राजस्थान सरकार द्वारा निकाली गयी दो भर्तियों में टेस्ट पास कर चुके हैं, लेकिन फाइनल मेरिट लिस्ट में नहीं आ सके.रामजल किसी भी परिस्थिति में हार मानने वाले नहीं हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया, पढ़ाई के लिए रामजल द्वारा किये गए संघर्ष के लिए उनको दिल से सलाम करता है और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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