जब तक किसी काम को किया नहीं जाता है तब तक वो असंम्भव लगता है.

नक्सल प्रभावित झारखण्ड राज्य के इस युवा ने जब शुरुआत की तो सब को उनका काम असंभव लग रहा था लेकिन पिछले 17 वर्षों से अनवरत रक्तदान की मुहिम चल रही है जो अब रोज़ 5-7 ब्लड यूनिट तक पहुँच चुकी है.

लोगो के जीवन कल्याण के लिए अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को भुला दिया और उनके द्वारा स्थापित ‘श्रेय ग्रुप (Shrey Group)‘ को 4000 से ज्यादा जीवन बचाने का श्रेय दिया जाता है. क्रिकेट क्लब से बना इनका ब्लड डोनेशन क्लब आज गिरिडीह के साथ ही रांची, धनबाद के अलावा पुरे देश में अपनी सेवाएं दे रहा है. असंभव को संभव करने वाले इस सामाजिक कार्यकर्त्ता का नाम है, रमेश कुमार यादव (Ramesh Kumar Yadav).

2002 में रमेश कुमार यादव ने क्रिकेट क्लब की टीम से रक्तदान के लिए ‘श्रेय ग्रुप‘ नाम से 15 सदस्यीय टीम बनाई. शुरुआत रक्त की कम जरूरत पड़ती थी जिसका चलते सब सामान्य था लेकिन ब्लड कैंसर, किडनी और थेलेसेमिया के मरीज बढ़ने पर उन्होंने कई लोगो को अपने साथ जोड़ा. 2016 में उन्होंने ‘श्रेय ग्रुप’ को रजिस्टर्ड करवाया और रक्तदान के साथ दिव्यांगजनों की मदद, शिक्षा, पर्यावरण और गरीबों की मदद के लिए लगातार काम कर रहे है.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में रमेश कुमार यादव ने बताया कि मेरा जन्म 31 दिसंबर 1981 को झारखण्ड के गिरिडीह जिले में हुआ. पिता किसान थे लेकिन पढाई के लिए बहुत ही ज्यादा सतर्क थे. कुल 7 बहने और 3 भाई में 5 बहने सरकारी नौकरियों में अपनी सेवा दे रही हैं.

campaign for liquor ban
सामाजिक मुद्दों पर भी जागरूकता अभियान चलाता है श्रेय ग्रुप

मेरे पिता एक गरीब किसान के बेटे थे लेकिन उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद पढाई की और यूनिवर्सिटी टॉप की. वकालत की लेकिन बन गए सरकारी शिक्षक. समाज सेवा में नौकरी आड़े आने लगी तो उन्होंने नौकरी को त्यागपत्र दे दिया. पिता और भाई से प्रेरणा लेकर मैंने भी समाज सेवा का काम शुरू किया.

रमेश कुमार आगे बताते है कि समाज के प्रति समर्पण का भाव परिवार से ही मिला. सरकारी कॉलेज एवं स्कूल से ही पढाई हुई. पढाई के साथ ही खेलकूद में अभी अच्छा था और कराटे में नेशनल लेवल तक खेला लेकिन क्रिकेट ने पहचान देनी शुरू की. कई लेवल पर क्रिकेट में प्रतिनिधित्व किया है और अब क्रिकेट के विकास के लिए गिरिडीह जिला क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव के रूप में कार्य कर रहा हूँ.

सरकारी नौकरी छोड़ने के बाद 2002 में प्रिंटिंग प्रेस और साइबर कैफे का काम शुरू किया. काम बहुत अच्छा चल भी रहा था. 2002-2003 से ही सामाजिक कार्यों में भी ज्यादा समय बीत रहा था और धीरे-धीरे काम को स्टाफ के भरोसे छोड़कर अपना पूरा समय समाज को समर्पित कर दिया.

cricket club
क्रिकेट क्लब टीम के साथ रमेश कुमार यादव

क्रिकेट में शौक के चलते 1997 में जूनियर स्टार क्लब के नाम से क्रिकेट टीम बनाई जिला क्रिकेट प्रतियोगिताएं में हिस्सा लिया करती थी और आज भी स्थापित है, इसी टीम से श्रेय ग्रुप बना जो 2002 से सामाजिक कार्य कर रही है जबकि श्रेय का रजिस्ट्रेशन 2016 में किया गया. 2002 से अबतक सबसे ज्यादा कार्य रक्तदान के क्षेत्र में किया गया।

उस समय में रक्त की आवश्यकता बहुत ज्यादा नहीं हुआ करती थी पर जैसे-जैसे थैलासीमिया, हीमोफीलिया, कैंसर आदि के रोगियों की संख्या बढ़ने लगी तो रक्त की आवश्यकता भी बढ़ने लगी. इन कार्यों को करते हुए 5-7 साल हुए थे कि क्लब के ही एक सदस्य ओम पांडेय की दोनों किडनी खराब हो गयी और उसे लगातार रक्त की आवश्यकता पड़ने लगी.

उनको रक्त देने के लिए शहर से 250 किमी दूर तक जाकर साथियों ने 40 यूनिट से ज्यादा रक्तदान किया, लेकिन उनकी मृत्यु हो गयी . इस घटना के बाद रक्तदान का सिलसिला और तेजी से बढ़ गया. आज ये आलम है कि श्रेय क्लब के द्वारा लगभग हर रोज औसतन 6-7 यूनिट रक्तदान करवाया जाता है.

blood donation at hospital
श्रेय ग्रुप की प्रेरणा से रक्तदान करते हुए आमजन

इन 17 वर्षों में 1200 से भी ज्यादा लोग जुड़कर रक्तदान कर रहे हैं. गिरिडीह शहर में ही लगभग 150 थैलासीमिया के बच्चे हैं जिनके परिजन सीधे हमसे जुड़े हुए हैं और लगभग हर रोज 5-6 बच्चे सुदूर इलाके से रक्त चढ़वाने आते हैं. इसके अलावे भी कई तरह के बेसहारा एनेमिक मरीज हर रोज ब्लड की आस में आते हैं. हर रोज इन जरूरतमंदों को रक्त मुहैया करवा भी दिया जाता है.

इन 17 वर्षों में रक्त की कमी से कोई भी मरीज शहर में नहीं मरा है, बल्कि दर्जनों बार दूसरे शहरों से भी जब रक्त की कमी होने लगती है तो लोग हमसे सम्पर्क कर हमारे शहर आते हैं और रक्त चढ़वाकर वापस लौट जाते हैं. अबतक 4000 मरीजों के लिए सीधे तौर पर रक्त की व्यवस्था करवाई जा चुकी है और ये सिलसिला लगातार जारी है. रक्तदान न केवल अपने शहर में बल्कि अन्य शहरों और राज्यों में भी लगातार करवाया जा रहा है. खुद भी अब तक 59 बार रक्तदान कर चुका हूँ.

रक्तदान के अलावा श्रेय क्लब के माध्यम से गिरिडीह शहर में 150 से ज्यादा लोगों का मरणोपरांत नेत्रदान के लिए संकल्प पत्र भरवाया जा चूका है. इसके साथ ‘जरूरत है तो ले जाएं, जरूरत नहीं तो दे जाएँ‘ के तर्ज पर पिछले तीन वर्षों से शहर से इकट्ठा किया पुराने पहनने लायक कपड़ों को दूर-दराज के ऐसे गाँवों में जहाँ लोगों को पहनने के लिए कपड़े नहीं होते उन्हें पहुँचाया जाता है। सर्दियों में इन क्षेत्रों में गर्म नए-पुराने कपड़ों का भी वितरण किया जाता है.

health camp at giridih
निशुल्क चिकित्सा शिविर का आयोजन करती है श्रेय ग्रुप टीम

इसके अलावा सैकड़ों गरीब-बेसहारा लोगों का ईलाज खुद के पैसे से या चंदा लेकर करवाया जा चुका है. सैकड़ों बेसहारा बच्चों के पढ़ाई की व्यवस्था भी खुद के खर्चे से करवाई जाती रही है. साथ ही कई इंस्टिट्यूट में सहायता राशि बॉक्स भी लगवाया है, जहाँ स्टूडेंट के द्वारा जमा की गयी राशि से उन बच्चों के पढ़ाई की खर्च की जा रही है जिनके पास पढ़ने के लिए पैसे नहीं हैं.

इसके साथ ही श्रेय क्लब सरकारी स्कूलों, वृद्धा आश्रम, नेत्रहीन विद्यालयों, मुख-बघिर विद्यालयों और गाँव-देहात में निःशुल्क मेडिकल कैम्प लगवाता है. इन कैंप के माध्यम से गरीब लोगों को फ्री में जाँच और दवाइयाँ उपलब्ध करवाई जाती है.

दिव्यांगजनों की मदद के लिए सरकारी योजनाओं और निजी सहयोग से विकलांग पेंशन, अपाहिजों को ट्राय साईकल, मजदूरों को मजदूरी किट, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन और ईलाज के खर्च की व्यवस्था करवाई जाती है. शहर में 8 वर्षों से खुद के खर्चे से एम्बुलेंस की सुविधा भी उपलब्ध करवाई गई है जिसमें सैकड़ों गरीबों को मुफ्त की सुविधा मिल चुकी है.

old people help
गरीब एवं बेसहारा लोगो की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते है रमेश कुमार यादव

पर्यावरण सरंक्षण के लिए वृक्षारोपण का कार्य भी किया जाता है. थैलासीमिया ग्रसित बच्चों और वृक्षों को साथ में जोड़ दिया है जिसके तहत मरीज बच्चों के घरवाले पेड़-पौधों की देखभाल भी अपने बच्चे की तरह करते है. अपनी पुश्तैनी जमीन पर अनाथ एवं वृद्धाश्रम का काम चल रहा है लेकिन समय और पैसों की वजह से काम रुका हुआ है.

इन सामाजिक कार्यों के दौरान रमेश कुमार यादव को अपना समय एवं कमाई खर्च करनी पड़ती है लेकिन मरीजों के चहरे पर एक मुस्कान उनकी सारी थकावट मिटा देती है. सामाजिक कार्यों के चलते घर-परिवार के साथ कहासुनी होती है लेकिन उनके साथ के बिना कुछ भी संभव नहीं होता.

रमेश कुमार कहते है कि अपने भविष्य के बारे में तो अब कुछ नहीं सोंचता हूँ. बस यही दिमाग में रहता है कि जब तक जीवन है, लोगों के काम आता रहूँ. दूसरों से इतनी ही अपेक्षाएँ है कि इन सारे कामों में लोगों का सहयोग जिस तरह से प्राप्त हो रहा है, ये निरंतर मिलता रहे.

ramesh kumar yadav award
रमेश कुमार यादव और श्रेय क्लब को कई मंचों से सम्मानित किया जा चूका है

रक्तदान के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए झारखंड राज्य एड्स कंट्रोल सोसाइटी से दर्जनों बार जिला स्तर पर तथा राज्य स्तर पर भी सम्मान प्राप्त हो चुका है। इसके अलावा 15 अगस्त के मौके पर भी उपायुक्त के द्वारा सम्मानित किया जा चुका है.

अगर आप भी रमेश कुमार यादव और श्रेय ग्रुप से संपर्क करना चाहते है तो यहाँ क्लिक करे!

बी पॉजिटिव इंडिया, रमेश कुमार यादव और ‘श्रेय ग्रुप‘ के सभी सदस्यों के कार्यों की सराहना करता है और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता है.

Comments

comments