किसान का नाम लेते ही फटे-पुराने कपड़े और मिटटी से लथपथ शरीर की तस्वीर याद आ जाती है. देश में किसाओं की हालात किसी से छिपी हुई नहीं है. पानी की कमी हो या अतिवृष्टि नुकसान किसान को ही झेलना पड़ता है. मजबूरी में कर्ज लेने के बाद आत्महत्या जैसे भयानक कदम भी उठा दिए जाते है.

लेकिन आज हम एक ऐसे किसान के बारे में बता रहे है जो ढाई एकड़ में फैले घर में रहता है. फार्च्यूनर और मर्सिडीज जैसी महँगी गाड़ियों में चलता है. घर में तालमेल इतना गजब का कि 30 लोगो के लिए खाना एक ही चूल्हे पर पकाया जाता है. इन करोड़पति किसान का नाम है रमेश चौधरी (Ramesh Choudhary).

राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा गांव में रहने वाले रमेश चौधरी ने खेती-किसानी से सालाना करोड़ रुपये कमाने का कारनामा कर दिखाया. इनके दिन की शुरुआत गाय-भैंसो को चारा देने से होती है और अंत खेतो में फसल की देखभाल के साथ. रमेश चौधरी अपने चार भाइयों के साथ सयुंक्त परिवार में रहते है और इनका घर एक कंपनी का मुख्यालय जैसा लगता है.

लगभग 300 बीघा जमीन पर खेतीबाड़ी करने वाले रमेश चौधरी ने केमिकल और कीटनाशकों की बजाय जैविक खेती पर ध्यान दिया. राजस्थान में पानी की कमी को देखते हुए इन्होने ड्रिप पद्धति से सिंचाई अपनायी तो जल स्वालम्बन के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग के साथ ही खेतों में ही छोटे-छोटे तालाब बनवाये. नलकूप और कुओं के लिए वाटर रिचार्ज की भी व्यवस्था की.

रमेश चौधरी चारों भाइयों के साथ रहते है जिसके चलते उनकी जमीन का बंटवारा नहीं हुआ और सारी जमीन पर एक फसल बौने के बजाय अलग-अलग फसल बैठे है जिससे कि एक फसल के नुकसान की भरपाई दूसरी फसल से हो सके. इसी के साथ एक ही फसल को वो तीनो मौसम में लेते है जिससे कि डिमांड बढ़ने पर अच्छी आय भी होती है. उदाहरण के तौर पर लौकी की खेती वो गर्मी, सर्दी और बारिश , तीनो मौसम में करते है. जिससे की अधिक मुनाफा कमाया जाता है.

इसी के साथ रमेश चौधरी जैविक खेती के साथ ही आधुनिक खेती में भी रूचि रखते है जिसके चलते उन्हें कई फैसले बौने का मौका मिल जाता है. एक ही जमीन पर वो साल में तीन फसल लेते है और गेहू और मक्का की परंपरागत खेती को छोड़कर फल एवं सब्जियों के साथ ही दालों की खेती करते है.

इनके परिवार में सब लोगो का काम बंटा हुआ है. रोज़ शाम को उनके बड़े भाई आगे की योजना के लिए मीटिंग करते है. एक साथ ही खाने के चलते परिवार में सौहार्द का वातावरण बना रहता है और पूरा परिवार खेतीबाड़ी में अपना योगदान देता है. खेती के साथ ही पशुपालन पर भी विशेष जोर दिया जाता है जिससे आमदनी बढ़ाने में सहायता मिलती है.

रमेश चौधरी के घर पर एक तरफ गाय-भेंसे बंधी रहती है तो दूसरी तरफ लग्जरी कारे खड़ी मिलती है. रमेश चौधरी कहते है कि आज हमारे पास जो कुछ भी है खेती से ही है. हम किसी की उम्मीदों के पीछे नहीं जाते, किसान अगर चाहे तो उसे मुनाफा मिलता है, लेकिन अच्छे से फसल की देखरेख जरूरी होती है. हम दिन में 14 घंटे खेतों में ही गुजारते हैं. फसल को तीन बार देखना चाहिए, सुबह, दोपहर और शाम. फसल के तीनों रूप अलग-अलग दिखते हैं.

Story Credits : Gaon Connection

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