प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भव्य कार्यक्रम में सरदार पटेल की मूर्ति को सरदार पटेल की जन्मजयंती के अवसर पर देश को समर्पित कर दिया. रन ऑफ़ यूनिटी और कई अन्य आयोजनों के साथ ही पूरा देश आज राष्ट्रीय एकता दिवस मना रहा है.

आज ही के दिन भारत को स्टेचू ऑफ़ यूनिटी (Statue of Unity) के रूप में विश्व की सबसे बड़ी मूर्ति मिली. 3000 के आसपास मजदूरों और कारीगरों ने मिशन स्तर पर कार्य करके इस पुनीत कार्य को अंजाम दिया. इन्ही में से एक है सरदार पटेल की मूर्ति के मुख्य शिल्पकार है राम वी. सुतार (Ram Sutar).

कला के कई वादों से कई दशकों तक राम वी. सुतार की लड़ाई लगभग एकाकी ही रही, लेकिन 93 वर्ष का यह मूर्ति-शिल्पकार आकार की दुनिया में अपनी विशालतम मौजूदगी को बनाए रखने के लिए आज भी कटिबद्ध दिखता है। कभी गांधी के जरिए तो कभी अंबेडकर के साथ। कभी सरदार पटेल के माध्यम से तो कभी दीन दयाल उपाध्याय के साथ।

ढेर सारे महापुरुष, ढेर सारे पौराणिक पात्र, अनगिनत इतिहास पुरुष और दर्जनों विज्ञान पुरुष…लेकिन आकारों को रचने, ढालने और उन्हें स्थापित करने की इस यात्रा को, इतिहास के जिस नायक ने विश्वयात्रा बनाने में सबसे ज्यादा मदद की, वह गांधी ही थे और आज भी हैं। हालांकि अब वह पूरे विश्व में सरदार पटेल की प्रतिमा के लिए जाने जाएंगे।

राम वी. सुतार ही वह शख्स हैं जिन्होंने विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टेच्यू ऑफ यूनिटी बनाई है।

शुरुआती जीवन

1925 में महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव गोंडूर में पैदा हुए राम वी. सुतार ने स्कूल के दिनों में ही पहली बार जिस गांधी को बनाया था, वह हंसते हुए गांधी थे। एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि -“मेरे पास गांधी की एक तस्वीर थी। उसमें वे हंस रहे थे। मेरे एक टीचर को गांधी का बस्ट चाहिए था। मैंने बनाया। फिर उस बस्ट की एक और कॉपी भी बनाई। उस समय मुझे 300 रुपये मिले थे।”

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की तैयारी करते राम सुतार

स्कूल के बाद जब वे मुंबई के ‘जे.जे.स्कूल ऑफ आर्ट’ में मूर्तिशिल्प के छात्र हुए तो उनकी कला की दुनिया बड़ी होती गई। उनकी कला का आकार भी बड़ा होता गया। कुछ छोटे-बड़े काम और एलोरा में पुरातत्व विभाग की नौकरी के बाद लगभग 1959 में सुतारजी दिल्ली आए.

अब तक बना चुके है 8000 से ज्यादा मुर्तिया ..

2014 में सरदार पटेल की इस प्रतिमा के निर्माण का काम मिलने से काफी पहले से राम सुतार देश-दुनिया के जानेमाने मूर्तिकार थे. एक मूर्तिकार के रूप में करीब 70 सालों से काम कर रहे राम सुतार अब तक 8 हजार से अधिक मूर्तियां बना चुके हैं, जिसमें से अधिकतर कांसे की हैं.

मानव इतिहास के बड़े मूर्तिकारों के बारे में विस्तृत अध्ययन उपलब्ध नहीं होने के कारण इनकी किसी से तुलना नहीं जा सकती लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि बीते 100 सालों में वह दुनिया के एक सबसे महान मूर्तिकार हैं. अमेरिका के प्रसिद्ध अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने राम सुतार के बारे में कुछ ऐसी ही टिप्पणी की थी.

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी का संघर्ष

द स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के बारे में राम सुतार कहते हैं कि अब तक उन्होंने जितनी भी परियोजनाओं पर काम किया उसमें सबसे चुनौती भरी परियोजना यही थी. इससे पहले उन्होंने 1959 में मध्य प्रदेश के गांधी सागर बांध में देवी चंबल की 45 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण करवाया था.

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स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

उनका कहना है कि जब आप 522 फीट ऊंची किसी प्रतिमा का निर्माण करते हैं तो उसका व्यक्तित्व, पोज, चेहरे का एक्प्रेशन जैसी कई चीजें होती हैं, जिनको डिजाइन करना काफी चुनौतीपूर्ण कार्य है. हर चीज को आपको उचित टेक्स्चर के साथ सृजित करना पड़ता है. सरदार पटेल की प्रतिमा का अंतिम मॉडल तैयार करने में उनको एक साल से अधिक समय लगा.

बेटा भी लगा है पिता के सपने पुरे करने में

उनके बेटे अनिल सुतार (Anil Sutar) जो खुद एक आर्टिटेक्ट और मूर्तिकार हैं, ने बताया कि शुरू में उनके स्टूडियो में पहले 3 फीट की प्रतिमा का निर्माण किया गया, जिसे मिट्टी से पहले 18 फीट और फिर 30 फीट का बनाया गया. इसके बाद इसे 3D इमैज की सहायता से थर्मोकॉल में पूरे 522 फीट का बनाया गया.

इस स्टैच्यू को राम सुतार के नोएडा स्थित स्टूडियो में डिजाइन किया गया, लेकिन इसे चीन के नानचंग में कांसे में ढाला गया. इस स्टैच्यू को बनाने में 177 टन कांसे का इस्तेमाल किया गया. इसके लिए उन्हें और उनके बेटे को कई बार चीन जाना पड़ा. इस प्रतिमा को टुकड़ों में गुजरात लाया गया और वहां उसको एसेम्बल किया गया.

अब तक मिल चुके है कई सम्मान …

अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधानमन्त्रित्व काल में भारत सरकार ने आपकी कलात्मक शिल्प साधना को सम्मानित करते हुए 1999 में पद्मश्री से अलंकृत किया। इन्हें पद्म भूषण पुरस्कार भी मिला। 2018 में टैगोर कल्चरल अवॉर्ड भी मिलेगा।

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