ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले

ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

ये पंक्तियाँ इस युवा पर सटीक बैठती हैं. घर में आँगन में खेलते हुए दुर्घटना में दोनों हाथ गंवाने पड़े लेकिन कड़ी मेहनत और जज्बे के चलते आज डॉक्टर बनने वाले हैं. दिव्यांगजनों को सहायता के लिए परीक्षा में राइटर दिया जाता हैं लेकिन उन्होंने मुंह से पेन पकड़कर परीक्षा दी और मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की. असंभव को संभव बनाने वाले युवा का नाम हैं रजत कुमार.

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के आनी के रहने वाले रजत कुमार अब डॉक्टर बनेंगे. उनका चयन लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज नेरचौक में एमबीबीएस की पढाई के लिए हुआ हैं और शारीरिक दक्षता टेस्ट के बाद पढाई के लिए हरी झंडी मिलेगी.

मजबूत इरादों और कड़ी मेहनत से दिव्यांग रजत कुमार युवाओं के रोल मॉडल बन चुके हैं. उन लोगो के लिए आदर्श हैं जो हमेशा आर्थिक एवं शारीरिक कमियों को सफलता के लिए बाधक मानते हैं. दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद रजत मुंह से पेन पकड़कर खुद परीक्षा देते है. उन्होंने आज तक परीक्षा में सहायता के लिए राइटर नहीं लिया.

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कुल्लू स्थित लाल बहादुर शास्त्री मेडिकल कॉलेज जिसमे रजत का चयन हुआ

रजत ने राष्ट्रीय पात्रता प्रवेश परीक्षा (NEET) -2019 में 150 अंक हासिल कर अपने लिए मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की कर ली. रजत ने शारीरिक विकलांग स्टेट कोटे में 14वां रैंक हासिल की हैं.

आपको बता दे कि रजत पढ़ने-लिखने के अपने सारे काम पांव और मुंह के सहारे बिना किसी की मदद से करता है. रजत ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला द्वारा आयोजित परीक्षा में विज्ञान संकाय में 500 में से 404 अंक हासिल किए थे. रजत मुंह से पेंट ब्रश पकड़कर बेहतरीन चित्रकारी भी करते है.

पिता शारीरिक शिक्षक जयराम और माता दिनेश कुमारी ने हिमाचल नाउ न्यूज़ को बताया कि रजत जब चौथी कक्षा में पढ़ता था तो अपने पैतृक गांव रडू में घर के आंगन में खेल रहा था. उसी समय घर की छत के पास बिजली की एचटी लाइन से उसे जोरदार करंट लगा, जिससे उसके दोनों हाथ कंधे के बिलकुल पास से काटने पड़े थे.

इस दुर्घटना के बावजूद रजत ने हिम्मत नहीं हारी और मुंह और पांव से पेन पकड़कर लिखने का अपना कारवां जारी रखा. अब रजत डॉक्टर बनने के बाद पैरों से स्टेथेस्कोप पकड़कर मरीजों को चेक करेंगे.

बी पॉजिटिव इंडिया, रजत कुमार के साहस और ज़ज्बे को सलाम करता हैं और उम्मीद करता हैं कि आप से प्रेरणा लेकर दिव्यांगजन अपने जीवन में अच्छा करने के लिए प्रेरित होंगे.

( मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित )

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