प्रो-कबड्डी 2017 का फाइनल मैच, पटना पाइरेट्स और गुजरात फार्च्यूनजायंट्स के बीच चेन्नई के जवाहर लाल नेहरू इंडोर स्टेडियम में मुकाबला चल रहा था । प्रदीप नरवाल के करिश्माई प्रदर्शन के कारण पटना की टीम लगातार तीसरे वर्ष प्रो-कबड्डी के फाइनल में पहुंची, लेकिन दूसरी ओर लीग में अपना पर्दापण करने वाली गुजरात टीम ने अपने खेल के दम पर सभी प्रशंसकों को दीवाना बना दिया ओर लीग जीतने की मजबूत दावेदार थी । मैच हुआ ओर प्रदीप के प्रदर्शन से पटना लगातार तीसरी बार प्रो-कबड्डी चैंपियन बन गयी ।

उस चकाचौंध भरी फाइनल की रात में एक 18 साल का नौजवान, जिसने अपने खेल से सभी को खासा प्रभावित किया लेकिन टीम को जिता नहीं पाने के गम में डूबा हुआ था । इस नौजवान की ज़िन्दगी बड़ी दिलचस्प है और यहाँ तक पहुँचने के लिए उन्हें काफी संघर्षों का सामना करना पड़ा । गांव की गलियों से निकल कर शहर के बड़े स्टेडियम में अपनी छाप छोड़ देना आसान काम नहीं होता है , जहाँ पर आपके खेल को लगभग पुरे भारत के साथ ही अन्य कबड्डी प्रेमी देशों में भी  देखा जाता है । अपने पहले ही सीजन में प्रो-कबड्डी – 2017  के फाइनल में खेलने वाले युवा प्लेयर है, सचिन तंवर (Sachin Tanwar)

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अपने खेल और प्रदर्शन के दम पर उन्होंने अपनी टीम गुजरात फार्च्यूनजायंट्स को फाइनल में पहुंचाने के साथ ही सचिन ने  प्रो-कबड्डी 2017 के बेस्ट नवोदित खिलाडी के ख़िताब पर भी कब्ज़ा किया । गुजरात फार्च्यूनजायंट्स के प्रो-कबड्डी में में जो चैंपियन जैसा प्रदर्शन रहा,  इसमें सचिन के खेल का बहुत बड़ा योगदान था ।

राजस्थान के झुंझुनू जिले के एक छोटे से गांव बड़बर से आने वाले सचिन ने अपने प्रदर्शन के दम पर कई दिग्गज खिलाडियों को प्रभावित किया है और ये दिग्गज खिलाडी सचिन को प्रो-कबड्डी का भविष्य बता रहे है । प्रो-कबड्डी के आंकड़े भी इस तथ्य को प्रमाणित करते है क्योंकि लीग की सबसे मजबूत डिफेन्स टीम गुजरात फार्च्यूनजायंट्स के रैडिंग डिपार्टमेंट की जिम्मेदारी सचिन के कन्धों पर थी जिसे उन्होंने बखूबी निभाया ।

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गुजरात की ओर से खेलते हुए इस खिलाड़ी ने न केवल राजस्थान प्रदेश, बल्कि देश का नाम भी कबड्डी पटल पर रोशन किया है। जिस उम्र में बच्चे अपनी स्कूल की पढाई खत्म करते है,  उस उम्र में सचिन आज एक स्टार कबड्डी प्लेयर बन गए है । 1999 में जन्मे सचिन अपनी टीम में सबसे कम उम्र के खिलाड़ी है लेकिन उन्होंने अपने खेल से सब को प्रभावित किया है ।

सचिन राजस्थान के उस क्षेत्र से आते है जो हरियाणा सीमा के पास है । सचिन को कबड्डी खेलने का शौक भी उन्हें अपने ननिहाल यानि महेंद्रगढ़ (हरियाणा) से मिला । उनके पहले गुरु और सचिन को कबड्डी खेलने के लिए प्रेरित करने वाले उनके मामा राकेश थे जो अपने समय के दिग्गज कबड्डी प्लेयर रह चुके है तथा वर्तमान में खेल कोटे से रेलवे में नौकरी कर रहे है ।

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जब 12 साल की उम्र में सचिन अपने मामा के पास हरियाणा के महेंद्रगढ़ गए तो उनके मामा ने सचिन को कबड्डी का प्लेयर बनाने की सोची। उन्हें जब भी समय मिलता वो घर पर ही सचिन को कबड्डी कोचिंग देते थे । धीरे-धीरे अपने ननिहाल के कबड्डी खिलाड़ियों में सचिन का नाम आने लगा। धीरे-धीरे उनकी कबड्डी प्लेयर के साथ मित्रता भी होने लगी  जिससे उन्हें अपने साथी खिलाडियों से कबड्डी की बारीकियां सीखने को मिली ।

हरियाणा में कबड्डी खेलने के दौरान ही उनकी मित्रता भूप सिंह से हुई, जो राजस्थान के चूरू जिले के जैतपुरा गांव से थे । भूप सिंह अपनी स्कूल की कबड्डी टीम को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न कबड्डी प्लेयर्स के संपर्क में थे । उन्होंने सचिन से भी उनकी टीम ज्वाइन करने का आग्रह किया जिसके फलस्वरूप सचिन हरियाणा से चूरू में कबड्डी खेलने के लिए शिफ्ट हो गए । एक साल चूरू में रहने के बाद सचिन ने वापस महेंद्रगढ़ का रुख किया क्योंकि चूरू में उन्हें कबड्डी के लिए पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे थे ।

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किसान परिवार में जन्मे सचिन के घर में पहले से ही कबड्डी का माहौल था , उनके मामा के आलावा  उनका बड़ा भाई दीपक तंवर भी अच्छा कबड्डी खिलाडी है और अभी CRPF में बतौर कबड्डी प्लेयर खेल कोटे से चयनित हुए है । अपने प्रदर्शन और प्रतिभा के दम पर सचिन ने धीरे-धीरे कबड्डी सर्किट में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी । इसी साल जनवरी में उन्होंने नेशनल ओपन जूनियर कबड्डी प्रतियोगिता में राजस्थान की टीम से हिस्सा लिया और टीम को कांस्य पदक दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

इस प्रदर्शन की बदौलत सचिन को प्रो-कबड्डी की नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया गया जहाँ पर उन्हें गुजरात फार्च्यूनजायंट्स ने 36 लाख जैसी भारी-भरकम रकम पर ख़रीदा । वो अपनी टीम के सबसे महंगे रेडर बन गए क्योंकि सुकेश हेगड़े जो कि गुजरात टीम के कप्तान थे , उन्हें भी नीलामी में सचिन से कम पैसे मिले । इस कीमत के साथ सचिन ने पूरा इंसाफ किया और प्रो-कबड्डी लीग के टॉप रेडर्स की सूची में अपना नाम दर्ज करवाया । सचिन ने 10 से ज्यादा बारे बेस्ट रेडर का ख़िताब अपने नाम किया और अपनी टीम को उपविजेता बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई ।

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अपनी मेहनत और लगन के दम पर सचिन ने प्रो-कबड्डी में अपना अलग ही मुकाम बना दिया है और आने वाली प्रो-कबड्डी सीजन में उनसे अब दर्शकों को ज्यादा उम्मीदे है । किसान परिवार से निकल कर सुविधाओं एवं संसाधनों की कमी के बावजूद सचिन में इतनी कम उम्र में सफलता के नए आयाम स्थापित कर दिए । अपने खेल -कौशल से वो दर्शकों के दिलों पर राज कर रहे है और कबड्डी के पटल में एक नए सितारे का प्रवेश हो गया है ।

Be Positive सचिन के हौसले और मेहनत के साथ ही कभी हार न मानने के जज्बे को सलाम करता है तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की ईश्वर से कामना करता है ।

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