मन में लगन हो और पंखों को उड़ान मिल जाए तो कोई आसमां ऊंचा नहीं

यह साबित कर दिखाया है आशाराम चौधरी (Asharam Chaudhary) नाम के इस होनहार बच्‍चे ने. अभाव में जीवन व्‍यतीत करने वाले आशाराम ने एम्‍स (AIIMS) के एंट्रेंस एग्‍जाम को पहले ही प्रयास में पास करके साबित कर दिया कि गरीबी सफलता में आड़े नहीं आ सकती.

आशाराम का ऑल इंडिया रैंक में 707वां स्‍थान है और ओबीसी कैटिगरी में उसे 141 वीं जगह मिली है. 18 वर्षीय आशाराम जोधपुर-एम्‍स में अपनी पढाई कर रहे है .

टूटी-फूटी झोपड़ी में रहता है परिवार, पिता ने की हरसंभव मदद . .

आशाराम अपने पिता के साथ मध्यप्रदेश के देवास जिले के एक छोटे से गांव विजयगंज मंडी में रहता है. ये लोग एक टूटी-फूटी झोपड़ी में रहते हैं और रंजीत कूड़ा बीनकर अपने परिवार के लिए दो वक्‍त की रोटी जुटा पाते हैं. वह इतने भी पढ़े-लिखे नहीं हैं कि यह समझ सकें कि उनके बेटे ने कौन सी परीक्षा पास की है.

आशाराम ने बताया, ‘हमें बेहतर शिक्षा मिल सके, इसके लिए मेरे पिता बहुत ही मेहनत से काम करते हैं. मुझे जो भी चाहिए होता है वह मुझे लाकर देते हैं.’

like facebook page
Subscribe our Telegram Channel

वह स्‍थानीय प्रशासन का भी शु्क्रगुजार है. उसका कहना है कि प्रशासन की मदद से ही उसे बीपीएल कार्ड मिला. इससे उसे अपनी पढ़ाई में काफी मदद मिली.

परीक्षा की तयारी में पुणे की संस्था ने की मदद, कई लोगों आगे आये मदद के लिए . .

इससे पहले आशाराम को पुणे की दक्षिणा फाउंडेशन ने स्‍कॉलरशिप के लिए चुना था। इसके तहत उसे पुणे में ही परीक्षा की तैयारी करवाई जा रही थी. आशाराम का कहना है कि उनकी सफलता में दक्षिणा का बहुत बड़ा योगदान है.

उन्‍होंने बताया, ‘मैं चाहता हूं कि एमबीबीएस की पढ़ाई में हर साल मुझे गोल्‍ड मैडल मिले. मेरे गांव ने जो मुझे इतना कुछ दिया है मुझे वह लौटाना भी है. यहां एक भी अच्‍छा डॉक्‍टर नहीं है.’

Comments

comments