शेयर मार्केट में दिलचस्पी नहीं होने के बावजूद भी अपने पिता की मृत्यु के बाद बड़े भाई की मदद करने के लिए शेयर मार्केट में बिना कोई अनुभव के शेयर मार्केट में कूद पड़ते है । बाल बिअरिंग के बिज़नेस में आशातीत सफलता नहीं मिलने के बाद उन्होंने 32 वर्ष की उम्र में शेयर मार्केट में जाने का निश्चय किया । रिस्क लेने की क्षमता और अपनी व्यापारिक कुशलता के बलबूते जल्द ही वो दलाल स्ट्रीट के जाने-माने निवेशक बन जाते है ।

शेयर मार्केट में काम करते हुए वो एक रिटेल चैन की शुरुआत करते है जिसने अभी तक के अपने हर व्यापारिक वर्ष में मुनाफा कमाया है । अपनी कंपनी का आईपीओ लाने के बाद उनकी कुल सम्पति देश के कई जाने-माने उद्योगपतियों से ज्यादा हो जाती है । मीडिया से हमेशा दूर रहने वाले इस उद्योगपति का नाम है राधाकिशन दमानी (Radhakishan Damani ) और उनकी प्रसिद्ध रिटेल चैन का नाम है –DMart

20 मार्च 2017 तक दमानी सिर्फ एक रिटेल चैन के मालिक हुआ करते थे लेकिन अगले दिन शेयर मार्केट में आईपीओ शेयर बाजार में लिस्ट हुआ वो अनिल अंबानी से भी अमीर हो गए। जानकारी के मुताबिक बीते 13 साल में किसी कंपनी के आईपीओ की इतनी शानदार लिस्टिंग नहीं हुई। दमानी की वेल्थ अनिल अग्रवाल, अनिल अंबानी, गोदरेज परिवार और राहुल बजाज से भी ज्यादा हो गई है। एवेन्यू के पहले दिन के प्रदर्शन को देखें तो वह देश के 11वें सबसे अमीर बिजनसमैन बन गए। गौरतलब है कि देश की सबसे प्रॉफिटेबल रिटेल चेन डीमार्ट पर एवेन्यू का मालिकाना हक है।

डीमार्ट का शेयर 604.40 रुपये पर लिस्ट हुआ, जबकि इश्यू प्राइस 299 रुपये रखा गया था। यह 102 फीसद का रिटर्न है। पिछले 13 साल में लिस्टिंग के दिन किसी शेयर की कीमत में इतनी बढ़ोतरी नहीं हुई थी। कंपनी का शेयर 117 फीसद चढ़कर इंट्राडे में 650 रुपये तक पहुंच गया। तब इसका मार्केट कैप 40,000 करोड़ रुपये हो गया था।

राधाकिशन दमानी बहुत ही अन्तर्मुखी स्वभाव के व्यक्ति है । वो बहुत कम बोलने और ज्यादा सुनने में विश्वास रखते है। दमानी दुनिया के सबसे ज्यादा अमीरों की 500 तक अमीरों की फोर्ब्स सूची में 98 वे नम्बर पर अपनी जगह बना चुके है। उनकी कंपनी में उनकी पत्नी और उनके भाई की हिस्सेदारी लभभग 82.2 % है, जिनकी बाजार में कीमत 50,000 हजार करोड़ रूपये तक है। वह अपने आपको मीडिया या किसी भी जगह पर ज्यादा प्रसारित नहीं करते है वह अपने काम में ज्यादा विश्वास करते है।

राधाकिशन दमानी हमेशा सुर्खियों से दूर रहते हैं। वह हमेशा सफेद कपड़े पहनते हैं और शेयर बाजार के दिग्गज निवेशकों के बीच ‘मिस्टर वाइट एंड वाइट‘ के नाम से मशहूर हैं। उन्होंने 1999 में रिटेल बिजनस शुरू किया था, ये वो वक्त था जब अंबानी, कुमार मंगलम बिड़ला और फ्यूचर ग्रुप के किशोर बियानी के कदम इस सेक्टर में आए भी नहीं थे।

राधाकिशन दमानी अपने विशेष व्यापारिक कौशल के साथ ही लम्बी अवधि के लिए निवेश करने के लिए जाने जाते है । अमेरिका के प्रसिद्ध निवेशक वारेन बफेट की ही तरह दमानी भी एक वैल्यू इन्वेस्टर हैं जो लंबी अवधि के निवेश पर दूरदृष्टि रखते हैं। वो जब उद्यमी बने थे, तब भी उन्होंने अपना यह नजरिया बरकरार रखा और उन्होंने बिना किसी शार्टकट का इस्तेमाल किए डी-मार्ट का निर्माण किया।

Radhakishan-Damani-Portfolio-2
Image Source

दमानी ने छोटे से शुरुआत की और विस्तार के लिए कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। छोटे स्तर के कारण ही उन्हें सप्लाई चेन पर नियंत्रण करने में आसानी रही और वो शुरुआत से ही मुनाफे में ध्यान केंद्रित कर पाए। इसिलए उनकी कंपनी DMart ने अस्तित्व के 16 वर्षों में प्रत्येक वर्ष लाभ कमाया है। शुरुआत छोटे स्तर पर करने के कारण उनको अपनी भविष्य की योजनाए बनाने के लिए पर्याप्त समय मिल गया ।

दमानी ने बॉम्बे यूनिवर्सिटी से कॉमर्स में स्नातक पढाई करने का निश्चय किया, लेकिन परिवार के हालातों की वजह से अपनी पढाई पूरी नहीं कर पाए । शानदार दिमाग के धनी राधा किशन दमानी को शुरू से ही एकाउंटिंग की पढाई में रूचि थी । उनकी भाषाओँ पर भी अच्छी पकड़ थी जिसके कारण उन्हें लोगो से वार्तालाप में ज्यादा दिक्कते नहीं आती । दमानी को हिंदी , अंग्रेजी एवं मराठी भाषा का अच्छा ज्ञान है। अपनी पढाई पूरी नहीं करने के बावजूद आज उन्होंने यह दिखा दिया कि डिग्री से ज्यादा जरुरी नये विचार है. जिसके बल पर अपनी पहचान बनाई जा सकती है।

राधा किशन दमानी ने अपने करियर की शुरुआत बल बेअरिंग के व्यापार से की । लेकिन इस व्यापार में उन्हें आशातीत सफलता नहीं मिली । अपने पिता की मृत्यु के बाद अपने भाई के कहने पर शेयर मार्केट की इच्छा न होते हुए भी स्टॉक ब्रोकिंग के बिजनेस में लग गये। आर के को पहले इक्विटी निवेशक के रूप में जाना जाता था। उस वक्त वह 32 वर्ष के थे। उनकों स्टॉक के बारे में कोई ज्ञान नहीं था, उन्होंने निवेशक चंद्रकांत संपत के कार्यों से प्रेरणा ली और शेयर मार्केट के बाजार में पूरी तरह से अपने किस्मत को आजमाने उतर गए।

आर के अपनी शुरुआती दौर के दाव पेंच ज्यादा नहीं चलते हुए दिखे, उनकी रणनीति बहुत समान्य थी। वह पहले 5 से 10 साल तक अपने उत्पादों को बढ़ते हुए देखना चाहते थे, और धीरे धीरे अपनी उत्पाद की क्षमता को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। फिर अगले ही कुछ वर्ष में दलाल स्ट्रीट में उनका कारोबार निकल पड़ा और अन्य लोगों की तरह उनमे कभी भी सफल होने के बाद अहम् नहीं आया।

डी मार्ट राधा किशन दमानी की पहचान बन गई है, यह उनकी सूझ बुझ और मेहनत का नतीजा है। यह एवेन्यू सुपरमार्ट की ही एक दूसरी नई श्रृंखला है डी मार्ट जिसको आर के दमानी द्वारा मुम्बई में स्थापित किया गया था। यह इसलिए सबसे ज्यादा जाना जाता है, क्योंकि यह एक ही छत के नीचे एक ही स्थान पर औरत, पुरुष परिवार को चलाने वाले सभी घरेलू उत्पाद आसानी से उपलब्ध कराता है।

घर के उपयोग की सारी वस्तुओं, खाने वाले भोज्य पदार्थ, कपडा, बरतन, सौन्दर्य प्रसाधन, बच्चों की जरूरतों के लिए टॉयज और गेम, स्टेशनरी, जुते, बिस्तर और नहाने के साबुन से लेकर लिनन के कपड़े तक सब कुछ डी मार्ट के भंडार में आसानी से मिल जाता है। बाजार में उपस्थित दुकानों की अपेक्षा सस्ते में मिल जाने के साथ ही पूरी गुणवता के साथ मिल जाता है। ग्राहकों को ध्यान में रख कर यह कंपनी अपने सभी छोटे बड़े निर्णय लेती है ।

दमानी ने अपना बिजनेस अपना बाजार की फ्रेंचाइजी लेकर शुरु किया। उस वक्त से ही उन्होंने विक्रेताओं और आपूर्तिकर्ताओं के साथ निजी संबंधों का निर्माण करना शुरू कर दिया था। उन्होंने दोनों को तवज्जो दी और उन्होंने इन दोनों को कभी भी हतोत्साहित नहीं होने दिया और उनके स्टोर्स में आउट ऑफ स्टॉक वाली स्थिति कभी नहीं आई।

दमानी यह बात अच्छे से जानते हैं कि वो क्या कर रहे हैं। वो भारी छूट पर दैनिक उपयोग के उत्पाद उपभोक्ता को पेश करते हैं। उनके काम करने के तरीकों में से एक यह है कि वो आपूर्तिकर्ताओं और विक्रेताओं को भुगतान एक दिन के भीतर करने की कोशिश करते हैं, जबकि इंडस्ट्री के नॉर्म्स के मुताबिक यह अवधि करीब एक हफ्ते की है। शुरुआती भुगतान के कारण ये लोग इन्हें माल सस्ती दर पर उपलब्ध करवाते हैं।

DMart
राधाकिशन दमानी के DMart स्टोर की झलक | Image Source

हालांकि डी-मार्ट देश की सबसे सफल किराने की रिटेल श्रृंखला है, दमानी ने इसे पश्चिमी राज्यों तक ही सीमित रखा है। इसका एक कारण व्यापक आपूर्ति श्रृंखलाओं के बजाए स्थानीय आपूर्ति पर निर्भरता है। डी-मार्ट ने अपना बिजनेस 16 साल पहले शुरू किया था फिर भी इसके कुछ राज्यों में सिर्फ 119 स्टोर ही हैं। यह अंबानी और बियानी के स्वामित्व वाली कंपनियों की तुलना में एक छोटी संख्या है। तेजी से विस्तार के बजाय, दमानी ने धीमी गति से चलने का रास्ता अपनाया, जिससे उन्हें लाभप्रदता के रास्ते पर अग्रसर होने दिया।

दमानी को अच्छे से पता है कि उनके उद्यम के पीछे का उद्देश्य कम कीमतों पर उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति करना है और वो तामाझाम में अपना समय बरबाद किए बगैर ऐसा ही करते हैं। उनके स्टोर्स में सीमित श्रेणी के उत्पाद बस करीने से सजे होते हैं। दमानी ने यह बात अच्छे से सीखी और परखी है कि एक निवेशक के तौर पर कभी भी झुंड का पीछा नहीं करना चाहिए। एक उद्यमी के तौर पर भी उनका यही नजरिया है।

खुदरा व्यापार में क्रेडिट और देरी से भुगतान जोखिम भरा है, क्योंकि वो बुरी तरह से आपकी आपूर्ति और लागत को प्रभावित कर सकते हैं। दमानी क्रेडिट से दूरी रखते हैं और कोशिश करते हैं कि वो अपने आपूर्तिकर्ताओं की अपेक्षा मुताबिक जल्द से जल्द भुगतान कर दें।

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दमानी ने अपनी कंपनी के विज्ञापन के लिए न के बराबर पैसा खर्च किया है लेकिन फिर भी उनके स्टोर्स पर बढाती भीड़ उनके सफल बिज़नेस कौशल को दर्शाती है ।

Comments

comments