केरल देश का सबसे ज्यादा शिक्षित राज्य है और नवाचार के मामले में भी देश को नयी राह दिखाता है. देश का पहला भुखमुक्त जिला हो या रोबोट पुलिस वाला , केरल हमेशा से ही देश के सामने सकारात्मक पहल करता है. इसी क्रम में गरीबों की मदद के लिए एक नयी पहल शुरू हुई है.

केरल में कन्नूर जिले में एक ऐसी दुकान है जहां कोई दुकानदार नहीं बैठता. ग्राहक आते हैं सामान खरीदते हैं और उस पर लिखी कीमत के हिसाब से पैसे एक बॉक्स में डालकर चले जाते हैं. उन्होंने कितने पैसे रखे है, इसकी कोई निगरानी नहीं करता. इस दूकान की शुरुआत जनशक्ति नाम के एनजीओ ने 2019 की शुरुआत में की थी. आपको बता दे कि ऐसा ही एक स्टोर स्विटजरलैंड में है जिसे ऑनेस्टी शॉप के नाम से जाना जाता है.

कन्नूर की दुकान को एक स्टॉल में तब्दील करने का आइडिया खलील नाम के शख्स की वजह से आया. वे 23 साल तक खाड़ी के देशों में बतौर पेंटर काम कर चुके हैं. एक दुर्घटना में उनकी पीठ में गंभीर चोट आई थी और इसी एनजीओ के माध्यम से उनका इलाज कराया गया था.

कई वर्षों तक बिस्तर पर बिताने के दौरान वह रोजमर्रा की जरूरतों की चीजें तैयार करते थे. जिसे गांव वाले खरीदने आते थे. खलील को ऐसी दुकान खोलने का विचार यहीं से आया. उन्होंने अपने इस आयडिया को जनशक्ति से साझा किया तो यह दुकान शुरू की गई.

घरेलु इस्तेमाल के लिए आने वाले उत्पाद मिले है दुकान पर | PC : Internet

यह दुकान कन्नूर के गांव वन्कुलाठुवायल में है. यहां आने वाले ज्यादातर लोग इस दुकान के नियमाें से वाकिफ हैं. दुकान में साबुन, मोमबत्तियां जैसे दैनिक दिनचर्या का सामान बेचा जाता है. खास बात है सामान ऐसे लोग तैयार करते हैं जो असहाय हैं और किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण बिस्तर से नहीं उठ पाते हैं.

दुकान का नाम प्रतीक्षा रखा गया है. अब तक यहां कोई भी चोरी नहीं हुई है. जनवरी में जब स्टॉल की शुरुआत हुई थी तो रोजाना 1 हजार रुपए की कमाई होती थी. अभी रोजाना औसतन 750 रुपए की कमाई होती है. हर 10 दिन में बॉक्स में रखे पैसे गिने जाते हैं.

जनशक्ति नाम का यह एनजीओ काफी समय से बीमार लोगों को दवा उपलब्ध कराने का काम भी कर रहा है. हर माह करीब एक हजार रुपए की दवाएं ऐसे मरीजों को बांटी जाती हैं जो बिस्तर से नहीं उठ पाते. इन लोगो को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए घरेलु उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग दी जाती है जिससे वो अपनी बीमारी पर हो रहे खर्च के लिए पैसे जुटा सके.

आगे ऐसे कई स्टोर खोलने की योजना है जिससे कि असहाय लोगों के बनाये हुए प्रोडक्ट्स लोगो तक पहुँच सके. गरीब एवं असहाय लोगो को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह एनजीओ कई वर्षों से प्रयासरत है.

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