तू दीप जला राही, क्यों तूफ़ान से डरता है. चिंगारी जब जलेगी तो इतिहास रचे जायेंगे. prashant kumar lalak shiksha ki

देश के सबसे बड़े राज्य में से एक उत्तरप्रदेश का युवा, ग्रामीण और खासकर अति-पिछड़े इलाकों में शिक्षा की लौ जला रहा है. जिन बच्चों ने कभी स्कूल देखा तक नहीं, उन्हें बेसिक शिक्षा देने का काम कर रहा है. खुद अभी कॉलेज में पढ़ रहा है लेकिन बच्चों को पढ़ाने की ललक ऐसी की अपनी आमदनी का बड़ा हिस्सा गरीब बच्चों को पढ़ाने में खर्च कर देता है. बच्चों को शिक्षित करने के लिए ‘ललक शिक्षा की‘ की स्थापना और शिक्षा को अंतिम छोर पर ले जाने वाले युवा का नाम है : प्रशांत कुमार (Prashant Kumar) .

उत्तरप्रदेश के भदौही जिले के लोहरा खास गोपीगंज के रहने वाले प्रशांत कुमार न केवल गरीब बच्चों को मुफ्त में ट्यूशन देते है जबकि प्रत्येक रविवार इलाके के पिछड़े गांवों में घूम-घूम कर बच्चों को पढ़ाने के साथ ही शिक्षा सामग्री जैसे पेन, पेंसिल, किताबे, स्लेट और बैग देते है. अपनी कमाई का अधिकांश हिस्सा वो इसी काम में खर्च करते है.

3 फरवरी 2019 को उन्होंने साप्ताहिक ‘ललक शिक्षा की (Lalak Shiksha ki)‘ के नाम से जागृति अभियान चलाया है जो अनवरत जारी है. उनके गांव के आसपास रहने वाले वनवासी बच्चों को वो पढ़ा रहे है. इसके साथ ही ग्रामीणों को शिक्षा के महत्त्व और अपने बच्चों को स्कूल में भेजने के लिए प्रेरित भी कर रहे है. prashant kumar lalak shiksha ki

Prashant Kumar lalak shiksha ki
बच्चों के साथ प्रशांत कुमार

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में प्रशांत कुमार कहते है कि ‘मैंने खुद ने बचपन में पढ़ने के लिए संघर्ष किया है. अभी भी कॉलेज में पढाई के साथ ही निजी स्कूल में भी पढ़ाता हूँ. जिससे की मुझे घरवालों से सामाजिक एवं व्यक्तिगत कार्यो के लिए पैसे न लेने पड़े. हमारे इलाके में शिक्षा का स्तर काफी ख़राब है. गांव में कई ऐसे बच्चे मिल जायेंगे जिन्होंने स्कूल का मुंह तक नहीं देखा है.’

इन बच्चों एवं इनके माता-पिता को शिक्षा के महत्त्व के बारे में जानकारी के साथ ही फ्री में ट्यूशन देना शुरू किया. जब बच्चों को शिक्षा सामग्री की जरूरत पड़ी तो खुद की कमाई का बड़ा हिस्सा खर्च करके बच्चों के लिए व्यवस्था की. तीन महीनों के छोटे से समय में ही बच्चों में सकारात्मक परिवर्तन आ रहे है और ग्रामीण भी पूरा समर्थन करते है. prashant kumar lalak shiksha ki

प्रशांत कुमार शिक्षा को ही सबसे सशक्त हथियार मानते है क्योंकि उसी से दुनिया को बदला जा सकता है. प्रशांत खुद एक सामान्य परिवार से आते है. माता-पिता दोनों निजी स्कूल में पढ़ाते है जबकि बड़े भाई कमाने के लिए दूसरे राज्य में काम कर रहे है. 24 वर्ष के प्रशांत अभी अंग्रेजी में पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे है और निजी स्कूल में भी पढ़ाते है.

प्रशांत आगे बताते है कि गांवों में आजकल निजी स्कूलों का प्रचलन बढ़ा है लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता में खास फर्क नहीं पड़ा है. सरकारी स्कूलों ने शिक्षकों और व्यवस्थाओं की कमी के चलते मोहभंग हो चूका है. महँगी होने के कारण गरीब बच्चे इन प्राइवेट स्कूलों में नहीं जा पाते है. इसी समस्या के हल के लिए साप्ताहिक जागरूकता कार्यक्रम और मुफ्त में ट्यूशन देना शुरू किया है.

Prashant Kumar lalak shiksha ki
फ्री ट्यूशन के साथ ही शिक्षा सामग्री भी देते है प्रशांत कुमार

प्रशांत कहते है कि गांवों में खास तौर वनवासी और पिछड़े लोगो को शिक्षा के प्रति जागरूक कर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हमारा मकसद है. अपने कार्यक्रम के तहत नन्हे-मुन्हें बच्चो को बालपोथी की किताब और कॉपी, पेन, पेंसिल, रबड़, कटर देकर उन्हें “क” से “ज्ञ” तक पढ़ना और लिखना सींखा रहे है.

ये जातियाँ ऐसी है जो समाज से खुद को बहुत ही तुच्छ समझती है और समाज से भी गालियों के सिवाय इन्हें कुछ नही मिलता. बस एक छोटी सी ख्वाहिश है इन जातियों को शिक्षित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ कर समाज मे इनकी जातियों की खुद की पहचान बना सके.

प्रशांत कुमार से क्षेत्र के कई समाजसेवी और दानदाता भी इस मुहीम में अपना योगदान देते है. सोशल मीडिया और व्हाट्सअप के जरिये लोग उन्हें शिक्षण सामग्री दान देते है.

आप भी प्रशांत कुमार की इस मुहीम में अपना योगदान दे सकते है. प्रशांत कुमार से संपर्क करने के लिए इस नंबर पर 8896702330 कॉल करे.

बी पॉजिटिव इंडिया, प्रशांत कुमार और ‘ललक शिक्षा की‘ की पूरी टीम को शुभकामनाए देता है और उम्मीद करता है कि आप से प्रेरणा लेकर ग्रामीण भारत में शिक्षा के स्तर में वृद्धि होगी.

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