जिनमें अकेले चलने का हौसले होते हैं, उनके पीछे काफिले होते हैं.

यह पंक्तियाँ झारखण्ड के एक तीरदांजी कोच के लिए सटीक बैठती हैं. तीरंदाजी खेल में राज्य एवं विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व किया लेकिन आर्थिक दिक्कतों के कारण देश के लिए पदक नहीं जीत पाए. झारखण्ड जैसे प्रदेश में जहाँ दो वक्त की रोटी जुटाना ही जीवन का लक्ष्य हैं, वहां पर तीरंदाजी जैसे खेल में करियर बनाना बहुत मुश्किल हैं लेकिन इस खिलाड़ी ने हार नहीं मानी और अपने सपने को अपने शिष्यों के जरिये पूरा करने की ठान ली.

ग्रामीण इलाकों में प्रतिभाओं को पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण देना शुरू किया और कोचिंग सेण्टर की स्थापना की. आज उनकी तीरंदाजी अकादमी से सैंकड़ों खिलाड़ी निकल चुके हैं जिन्होंने प्रदेश से बाहर निकलकर देश का मान-सम्मान बढ़ाया हैं. झारखण्ड के आदिवासी बहुल इलाके में तीरन्दाजी के जरिये बच्चों का भविष्य संवार रहे हैं प्रकाश राम.

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बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी से प्रशिक्षण प्राप्त करने वाली मधुमिता कुमारी के साथ प्रकाश राम

प्रकाश राम झारखण्ड में ‘बिरसा मुंडा तीरंदाजी एकेडमी‘ चलाते हैं और पुरे प्रदेश में छह ब्रांचेज हैं. एक वक्त पर दस लड़कों से शुरुआत करने वाले प्रकाश राम अब तक सैंकड़ों ग्रामीण बच्चों को तीरंदाजी प्रशिक्षण दिलवा चुके हैं. उनकी अकादमी से निकले खिलाड़ियों ने 500 से ज्यादा नेशनल स्तर पर मैडल जीते हैं जबकि 32 नेशनल चैंपियंस और 11 अंतराष्ट्रीय खिलाड़ी हैं. अकादमी की 13 साल की सिंपी कुमारी ने 1 साल में 5 गोल्ड मेडल जीत कर राष्ट्रपति पुरस्कार जीता जबकि मधुमिता इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में देश का प्रतिनिधित्व कर रही हैं.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत में प्रकाश राम बताते हैं कि बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी की स्थापना 10 फरवरी 2009 को हुई थी. तब से लेकर अब तक तीरंदाजी प्रशिक्षण बदूस्तर जारी हैं. पिछले 18 वर्षों से तीरंदाजी क्षेत्र में हूँ और प्रदेश एवं देश की कई प्रतियोगिताएं में प्रतिनिधित्व किया. अभी अकादमी के जरिये प्रशिक्षण दे रहा हूँ जो न केवल देश के लिए पदक ला रही हैं बल्कि तीरंदाजों के रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं. अब तक अकादमी से निकले दर्जनों तीरंदाज सेना, रेलवे और अन्य विभागों में कोच या खिलाड़ी के रूप में काम कर रहे हैं.

प्रकाश राम आगे बताते हैं कि 2002 में देश की पहली तीरंदाजी अकादमी (टाटा आर्चरी अकैडमी) मे मेरा चयन नहीं हो पाया. तब मन में ख्याल आया कि इस एकेडमी के तर्ज पर एक दूसरा एकेडमी खोलेंगे. खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिलेंगे तो जरूर वो अच्छा प्रदर्शन करेंगे. इसी के चलते अगले कुछ सालों के प्रयासों के बाद 2009 में बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकैडमी की स्थापना हुई.

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बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी में अभ्यास करती हुई  तीरंदाज 

लेकिन अकादमी के शुरू होने से पहले का सफर काफी संघर्षमय रहा. तीरंदाजी खेल में झारखण्ड का प्रतिनिधित्व किया तो 2003 में झारखंड तीरंदाजी संघ की तरफ से विद्या ज्योति स्कूल गम्हरिया में प्रशिक्षक के रूप में कार्य करना शुरू किया. बेहतर प्रशिक्षण के लिए बच्चों को रोजाना 70 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता था लेकिन प्रशिक्षण में कोई कमी नहीं रखी.

इसके बाद वर्ष 2005 में झारखंड तीरंदाजी संघ के सचिव श्री संजीव सिंह (द्रोणाचार्य अवॉर्डी ) के सान्निध्य में टाटा स्टील के ब्रांच वेस्ट बोकारो घटोटांड़ में फीडर सेंटर के कोच के रूप में कार्य करने का मौका मिला. यहाँ लगभग 100 तीरंदाज रोजाना प्रशिक्षण लेने के लिए आते थे. यहाँ से कई तीरंदाजों ने राष्ट्रीय स्तर और दो तीरंदाज भारतीय तीरंदाजी शिविर में चयनित हुए. 6 तीरंदाज को टाटा आर्चरी अकैडमी तथा मित्तल चैंपियंस ट्रस्ट और आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट में प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिला.

कुछ समय काम करने के बाद 2008 में जमशेदपुर आ गया. कुछ तीरंदाज खाद्य सामग्री लेकर के मेरे घर आए और बोले कि सर हम आपके यहीं रहकर के प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे. उनके लिए रहने की व्यवस्था की और उनकी लगन एवं मेहनत ने मुझे इन बच्चों के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित किया.

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बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी के खिलाड़ियों के साथ प्रकाश राम

करीब छह महीने के प्रशिक्षण के बाद मेरे मित्र शिशिर कुमार महतो जो कि सिल्ली के रहने वाले थे, से मिलकर तीरंदाजी प्रशिक्षण के लिए अकादमी खोलने के लिए विचार-विमर्श किया. तत्कालीन खेल मंत्री माननीय श्री सुदेश कुमार महतो ने अकादमी खोलने में मदद के लिए हाथ आगे बढ़ाये.

उन्होंने रहने एवं खाने की समुचित व्यवस्था की और 10 फरवरी 2009 को 10 तीरंदाजों को लेकर हमने बिरसा मुंडा तीरंदाजी प्रशिक्षण केंद्र शुरू किया. छोटी सी शुरुआत आज एक मुहिम का रूप ले चुकी हैं और आज बिरसा मुंडा तीरंदाजी एकेडमी के पूरे झारखंड राज्य में 6 सेण्टर चल रहे हैं तथा ढाई सौ तीरंदाज तीरंदाजी का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं.

बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी से निकली मधुमिता ने एशियाई चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन कुछ तकनीकी समस्या के चलते उन्हें आधुनिक धनुष मिलने में देरी हो रही थी तो सुदेश कुमार महतो ने बिना देरी किये एक ही दिन में लगभग तीन लाख कीमत वाला धनुष उपलब्ध करवाया जिससे मधुमिता ने पदक जीते.

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बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी के सफल सञ्चालन में सुदेश कुमार महतो का भी अभूतपूर्व योगदान हैं

प्रकाश राम आगे बताते हैं कि एक दिव्यांग तीरंदाजी एकेडमी खोलने की भी योजना है. इसके साथ ही अकैडमी को विश्व स्तर पर पहचान दिलाना भी लक्ष्य हैं. इस कार्य को करने के लिए हमारे अभिभावक स्वरूप श्री सुदेश कुमार महतो, मुख्य संरक्षक अध्यक्ष श्रीमती नेहा महतो और एकेडमी के पूरी टीम लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रही हैं

प्रकाश राम बताते हैं कि वर्तमान में दर्जनों तीरंदाज रोजगार से जुड़े हैं. सेना, रेलवे एवं कोच के रूप में राज्य और देश में अपनी सेवाए दे रहे हैं. ज्यादातर बच्चे आर्थिक रूप से पिछड़े घरों से आते हैं. किसी के अभिभावक नहीं हैं तो किसी के पास खाने के लिए दोनों समय रोटी नहीं हैं लेकिन मेहनत करने में यह बच्चे किसी से भी पीछे नहीं रहते हैं.

हम चाहते हैं कि हमारे देश व राज्य के वंचित प्रतिभा को एक उचित मंच देकर समाज की मुख्यधारा से जोड़ सके. जिस किसी तीरन्दाज को खेल में ज्यादा आगे बढ़ने के अवसर नहीं मिलते हैं तो उसे कोचिंग या खेल के ही क्षेत्र में रोजगार के अवसर प्रदान करवाए जाते हैं.

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भारतीय क्रिकेट स्टार महेंद्र सिंह धोनी के साथ प्रकाश राम

प्रकाश राम और बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी के कार्यों को कई मंचों पर सराहा जा चूका हैं जिनमे भारत के राष्ट्रपति से लेकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी शामिल हैं. भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाईचंग भूटिया भी अकादमी का दौरा कर चुके हैं.

अगर आप भी प्रकाश राम या बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी से जुड़ना चाहते हैं तो यहाँ क्लिक करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, प्रकाश राम और बिरसा मुंडा तीरंदाजी अकादमी के कार्यों की प्रशंसा करता हैं और भविष्य के लिए शुभकामनाए देता हैं.

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