हर छोटा बदलाव बड़ी कामयाबी का हिस्सा होता है.  pink ladder Kerala

समाज में बदलाव एक सतत प्रक्रिया है और इसी बदलाव के तहत महिलाये अब पुरुष प्रधान क्षेत्र में सफलता के झंडे गाड़ रही है. कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी मजदूरी तक सीमित थी. उन्हें कंस्ट्रक्शन सामग्री ढ़ोने का काम दिया जाता है लेकिन केरल में एक ऐसा स्वयंसेवी समूह है जिसमें राजमिस्त्री, कारीगर, आर्किटेक्ट और फ्लोरिंग से लेकर ईंटे ढ़ोने वाली सब महिलाये है. छह महीने पहले शुरू हुए इस ग्रुप ने दो मकान बनाकर डिलीवर भी कर दिए और अभी कई प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.

केरल के कोझीकोड़ शहर में ‘पिंक लैडर (Pink Ladder)‘ नाम के 30 महिलाओं के संगठन ने कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के ट्रेंड को बदल कर रख दिया है. पिंक लैडर जिस भी कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करती है, वहां एक भी पुरुष नजर नहीं आता. बिल्डिंग के डिजाइन से लेकर पेंटिंग तक सारा काम महिलाएं करती हैं.

house construction work
कंस्ट्रक्शन का काम करती हुई पिंक लैडर की टीम

1 नवंबर 2018 को शुरू पिंक लैडर कंपनी दो मकान बना चुकी है, अभी कई मकानों पर काम भी चल रहा है. प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत चार लाख रुपये में बनाये 400 स्क्वायर फ़ीट के मकान में किचन, हॉल, बैडरूम और बाथरूम का निर्माण केवल 53 दिन में कर दिया. पिंक लैडर 15-15 के दो ग्रुप में काम करता है. जन-सहयोग से इन घरों में सोलर पैनल भी लगाए है जो घर की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में सक्षम है.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिंक लैडर की संयोजक नीतू राजन ने बताया, ‘पहले हमने एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में आर्किटेक्चर, फ्लोरिंग, पेंटिंग करने वाली टीमों से छह महीने की ट्रेनिंग ली. उसके बाद हमें प्रधानमंत्री आवास योजना और LIFE प्रोजेक्ट के तहत काम मिला. हमने समय से पहले गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखते हुए काम किया. इसके बाद हमें और प्रोजेक्ट मिलने शुरू हो गए.’

pink ladder home
पिंक लैडर द्वारा बनाया गया मकान

पिंक लैडर के प्रोजेक्ट्स में फ्लोरिंग का काम करने वाली 5 महिलाओं की टीम लीडर श्रीजा बताती हैं कि अब तक महिलाएं सिर्फ मजदूरी करती थीं. हमने इस सोच को गलत साबित किया है. मैं राजमिस्त्री हूं. हमें केरल में आयी भयानक बाढ़ के बाद नए घर बनाने की परियोजनाओं को शुरू करने के लिए बुलाया गया था.

पिंक लैडर सरकार के सहयोग से कुदुम्बश्री मिशन (महिला सशक्तिकरण आंदोलन) के तहत शुरू की गई कंपनी है. महिलाओं में ट्रेनिंग की कमी के अलावा, असमान वेतन, काम का अनिश्चित समय और काम के दौरान यौन उत्पीड़न जैसी समस्याएं भी आम बात है. इन बातों को ध्यान में रखकर कुदुम्बश्री की महिलाओं ने एक अलग पहल की है. महिलाओं को Eksat इंस्टिट्यूट के द्वारा ट्रेनिंग देकर कंस्ट्रक्शन वर्क में निपुण बनाया है.

बी पॉजिटिव इंडिया, पिंक लैडर ग्रुप और कुदुम्बश्री मिशन के प्रयासों की सराहना करता है और हम उम्मीद करते है कि आप से प्रेरणा लेकर देश की महिलाये आत्मनिर्भर बनेगी.

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