गुजरात के एक गांव के छोटे से किसान परिवार में जन्मे बच्चे ने बचपन में सपना देखा, सपना आसमान की उंचाइयों को छूने का.

अपने सपने को पाने के लिए उसने दिन-रात मेहनत की और ना सिर्फ उसे हासिल किया बल्कि काबिल व्यक्ति बनने के बाद अपनी मिट्टी से जुड़े लोगों के लिए भी काम किया.

आज विमानन श्रेत्र में उनके अद्भुत कार्यो को देखते हुए उन्हें देश के राजकीय सम्मान पद्म श्री अवार्ड दिए जाने के लिए नॉमिनेट किया गया है.

57 साल के हो चुके अमृत माणिक (Amrut Manek) का जन्म गुजरात के सूरत जिले के एक छोटे से किसान परिवार में हुआ था. बता दें कि मानिक से पहले उनके सात पीढ़ियों में कोई स्कूल नहीं गया था, लेकिन उनके अंदर स्कूल जाने की ललक थी, वो पढ़- लिखकर खुद एक खास इंसान बनाना चाहते थे.

TOI की रिपोर्ट के मुताबिक मानिक अपने घर से रोजाना 7 किमी पैदल चलकर स्कूल जाया करते थे, फिर घर लौटकर रात में लैंप की रोशनी में मेहनत से पढ़ते थे और इसके साथ ही घर के लिए खेती में काम भी करते थे.

एक इंटरव्यू में माणिक ने बताया कि जब वो खेतों में काम करते थे तो अक्सर वो आसमान में उड़ते विमानों को देखकर सोचा करते थे कि एक दिन आएगा जब वह भी इस विमान को उड़ाएगे.

skyline aviation club
skyline aviation club

स्कूली पढ़ाई पूरी करने और छह साल तक खेतों में काम करने के बाद वह अपने गांव से मुंबई आ गए जहां उनके पिता ने उनकी एक प्राइवेट स्कूल में चपरासी की नौकरी लगवा दी.

इस नौकरी के साथ अन्य छोटे-छोटे भी काम करके उन्होंने पैसा कमाया और अपने सपना को पूरा करने के लिए सिद्धार्थ कॉलेज ऑफ कॉमर्स में दाखिला लिया.

NCC में उनके शानदार प्रदर्शन की बदौलत उन्हें 1983 में महाराष्ट्र के बेस्ट कैडेट का अवॉर्ड मिला.

उनके इस अद्भुत प्रदर्शन से खुश होकर सूरत के बिजनेमैन उनकी मदद के लिए आगे आए और उन्हें अपना सपना पूरा करने के लिए 5000 रुपए की आर्थिक मदद करी.

इन पैसों से उन्होंने गुजरात के फ्लाइंग क्लब में दाखिला लिया और साल 1985 में वहां से हवाई जहाज उड़ाने का लाइसेंस प्राप्त किया.

Awards to Amrut Manek
Awards to Amrut Manek

मानिक की खास बात यह थी कि उन्होंने सिर्फ अपने सपने को पूरा करने की कोशिश नहीं करी बल्कि वो उन छत्र-छात्राओं के सपनों को भी पूरा करने का जिम्मा उठाया जो उन्हीं की तरह पायलट बनना चाहते थे.

ऐसा करने के लिए उन्होंने सरकार की स्कीमों के तहत बैंक से लोन लेकर पिछड़े वर्ग के लोगों के लिए Skyline Aviation नाम से फ्लाइंग स्कूल खोला.

अच्छे लोगों की मदद अच्छे लोग करते हैं ऐसा ही साथ उन्हें एक बार फिर अमर सिंह चौधरी से मिला. उनकी मदद से माणिक को गुजरात सरकार की तरफ से 1,77,792 का लोन मिला जिसकी मदद से वो विमानन क्षेत्र में और बेहतर तकनीक हासिल करने के लिए अमेरिका चले गए.

वहा से लौटने के बाद माणिक ने एक और फ्लाइंग स्कूल खोला.बता दें कि अब तक माणिक लगभग 4200 पायलेट को ट्रेन कर चुके हैं और साथ ही वह यूएस के शिकागो में भी अपना प्लाइंग स्कूल चला रहे हैं.

आज भी हर साल शिवरात्रि के मौके पर माणिक हेलिकॉप्टर की मदद से अपने गांव बारदोली पर फूलों की बरसात करते हैं जो गांव की खुशी को और दुगना कर देती है

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