शिकायत का हिस्सा तो हम हर बार बनते है, चलिए एक बार निवारण का हिस्सा बनते है.

यह पंक्तिया झारखण्ड के धनबाद शहर के दो युवाओं पर सटीक बैठती है. हर समस्या के लिए सरकार और समाज को जिम्मेदार ठहराने के बजाय इन्होने समस्याओं को हल करने में योगदान देना उचित समझा. इन्होने अपने दोस्तों एवं सहपाठियों के साथ मिलकर धनबाद शहर में बसी झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाले मजदूरों के बच्चों को पढाने का काम शुरू किया. ‘पहल‘ के जरिये बच्चों के जीवन में शिक्षा की मशाल जला रहे है दीपक कुमार (Deepak Kumar) और दिव्यांशु मिश्रा (Divyanshu Mishra).

पहल’ (Pahal)‘ नाम के अपने संगठन के जरिए वो सैकड़ों ग्रामीण बच्चों की शिक्षा का स्तर शहरी छात्रों के बराबर ले आए हैं. इस काम में मदद करने के लिए 30 से ज्यादा आईआईटी-आईआईएम में पढ़ने वाले छात्र आगे आये. इन्होने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए डिजिटल तरीके से ‘पहल‘ द्वारा संचालित सेण्टर में पढ़ाई करवाते है. इसी के साथ वीडियो कांफ्रेसिंग के जरिए ग्रामीण छात्रों की शिक्षा का स्तर उठाने का काम भी कर रहे हैं.

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स्लम्स के बच्चों को पढ़ा रही है पहल संस्था | Photo Credits : Pehal’s Facebook Page

धनबाद के रहने वाले दीपक कुमार ने अपनी पढ़ाई गांव एवं शहर के विद्यालयों से की. इसके चलते वो ग्रामीण एवं शहर दोनों के विद्यालयों के शिक्षा के स्तर से परिचित थे. जब वो ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए धनबाद आये तो गरीब बच्चों के जीवन को देखकर मन विचलित हो गया. फुटपाथ पर भीख मांगने के साथ ही गुब्बारे बेचने का काम करने वाले बच्चों को देखकर उन्होंने इन्हे पढ़ाने के लिए योजना बनाई.

दीपक कुमार ने धनबाद के स्लम छाइगदा में बच्चों के माता-पिता से मिलकर उनको पढ़ाना शुरू किया. 2015 में उनकी मुलाकात आईआईटी रूड़की के अंतिम वर्ष में पढ़ाई कर रहे दिव्यांशु मिश्रा और आईआईटी धनबाद के छात्र विवेक सिंह से हुई. तीनों ने मिलकर अपने काम को बड़े स्तर पर ले जाने के लिए ‘पहल’ की स्थापना की.

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प्रोजेक्टर के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करती है पहल संस्था | Photo Credits : Pehal’s Facebook Page

दीपक कुमार के साथ मिलकर दिव्यांशु मिश्रा ने आईआईटी और आईआईएम के छात्रों को अपने साथ जोड़ा. बच्चों की पढ़ाई के खर्च के लिए इवेंट्स का आयोजन किया और देखते ही देखते उनसे आज 50 से ज्यादा लोग जुड़ गए. तकनीक का इस्तेमाल करते हुए इन्होने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बच्चों को पढ़ाना शुरू किया. अभियान के तहत इकट्ठा हुए फण्ड से वो बच्चों का न केवल प्राइवेट स्कूल्स में एडमिशन करवाते बल्कि पहल के द्वारा संचालित सेण्टर पर बच्चो को आधुनिक तकनीक से पढ़ा रहे है.

बी पॉजिटिव इंडिया से बातचीत के दौरान दीपक कुमार ने बताया कि मजदुर एवं पिछड़े वर्ग के बच्चों को संस्था द्वारा परम्परागत तरीके से हटकर पढ़ाई कराने का प्रयास किया जा रहा है. आजकल के बच्चों के मानसिक विकास को देखते हुए इन्हे टेक्नॉलजी के जरिए पढ़ा रहे है. नवाचार के कारण स्लम के बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं और उनके शिक्षा स्तर में भी परिवर्तन दिखता है.

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पहल संस्था द्वारा संचालित कम्युनिटी सेण्टर | Photo credit : Pehal’s Facebook Page

आधुनिक तकनीक व तरीके जैसे कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के साथ ही फन एंड लर्न, पर्सनालिटी डेवलपमेंट पर भी जोर दिया जाता है. कंप्यूटर एवं प्रोजेक्टर की मदद से ऑडियो व वीडियो के द्वारा भी पढ़ाई कराने का प्रयास किया जा रहा है. साथ ही पढ़ाई के लिए बच्चों को कॉपी-किताबों के अलावा टैबलेट की व्यवस्था की गयी है. जिसके जरिये बच्चे इंटरनेट के इस्तेमाल से किसी भी सवाल का जवाब ढूंढ सकते हैं. इन छोटे-छोटे लेकिन आधारभूत परिवर्तनों के जरिये गांव एवं शहर के शिक्षा-स्तर के बीच खाई को पाटने की कोशिश कर रहे है.

‘पहल’ संस्था से जुड़े आई.आई.टी धनबाद में जूनियर रिसर्च फेलो दिवाकर, हर्षवर्धन और पूनम चौहान बच्चों को नवोदय के साथ ही अन्य परीक्षाओं की तैयारी करवाते है. बच्चों के जीवन में सार्थक परिवर्तन लाने के लिए ‘पहल’ संस्था स्कूल खोलने की योजना बना रही है. जिससे इन बच्चों को पूरी तरह से पढ़ाई संस्था के माध्यम से ही हो सके.

दीपक कुमार आगे बताते है कि ‘पहल’ द्वारा संचालित प्ले स्कूल में आईआईटी धनबाद (IIT Dhanbad) में जूनियर रिसर्च फेलो विवेक सिंह , अंभस्त कुमार, मकशूर आलम, पूनम चौहान के साथ ही बी. टेक के छात्र हरिवर्धन, अनिमेष,अजीत, विजय, पंकज, पंकज साहू, कृष्णपाल, कौशल और बीआईटी सिंदरी (BIT Sindri) के दीपक कुमार एवं संतोष कुमार के साथ ही उमेश प्रसाद (IIT Kanpur), शनिव तिवारी (IIT BHU), सोनू पंडित (NIT Durgapur), रीमा रंधावा, निशांत रंधावा और रविंदर (IIT BHU), तन्मय हलदर, मयूर और अमन ( IIT kharagpur) और हरप्रीत कौर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग कर रहे है. इनके साथ ही कई स्वयंसेवियों के सहयोग से पहल संस्था का सुचारु रूप से संचालन हो पा रहा है.

दीपक कुमार कहते है कि पहल संस्था द्वारा संचालित सेण्टर पर आंगनवाड़ी जाने वाले बच्चों से लेकर नर्सरी और केजी तक के बच्चों को पढ़ाया जाता है, जिससे उनका पढ़ाई में बेस मजबूत हो. इन बच्चों के अलावा 5वीं से 8वीं तक के बच्चों को रोजाना 2 घंटे पढ़ाया जाता है. ‘पहल’ में 3 से 6 साल के बच्चों को पजल, क्ले और दूसरी गतिविधियों से अक्षर ज्ञान करवाया जाता है. बच्चों को स्कूल का पाठ्यक्रम ही पढ़ाया जाता है लेकिन उसका तरीका दूसरे स्कूलों से हट कर होता है. 

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बच्चो के विकास के लिए प्रयासरत पहल संस्था | Photo credits : Pehal’s Facebook Page

आगे क योजनाओं के बारे में बात करते हुए दीपक कुमार कहते है कि पहल संस्था के द्वारा धनबाद में स्कूल खोलने की योजना है जहाँ हर गरीब का बच्चा पढ़ाई कर सके,जिसके पास बुनियादी सुविधाओं का अभाव है. इन बच्चों में काफी टेलेंट हैं बस जरूरत है इनको माहौल और मार्गदर्शन देने की.

पहल संस्था ने मिलाप के साथ मिलकर अभी क्राउड फंडींग शुरू की है. अगर आप भी पहल संस्था की मदद करना चाहते है तो यहाँ क्लिक करे !

पहल संस्था से जुड़ने के लिए उनके फेसबुक पेज पर संपर्क करे !

बी पॉजिटिव इंडिया, दीपक कुमार और दिव्यांशु मिश्रा के साथ ही ‘पहल‘ संस्था से जुड़े सभी स्वयंसेवीयो के जज्बे और समाज में बदलाव लाने के प्रयास को सलाम करता है.

(ये कहानी बी पॉजिटिव इंडिया के साथी अजय कुमार पटेल ने की है.)

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