एक IIT पास आउट अपनी एक यात्रा करने के लिए प्राइवेट टैक्सी बुक करता है । आधे सफर के बाद ही टैक्सी ड्राइवर उनसे अतिरिक्त पैसे मांगना शुरू करता है और जब बात आगे बढ़ जाती है तो टैक्सी ड्राइवर उस युवक को बीच सड़क में उतार कर चला जाता है । वो युवक बस के जरिये अपना सफर पूरा करता है लेकिन बस में यात्रा के दौरान उसने सोचा कि उसके साथ ऐसा क्यों हुआ । क्या उसके खुद के व्यवहार के कारण उसे बीच रास्ते में उतारा गया या ट्रेवल इंडस्ट्री में सब लोगों को यही परेशानी झेलनी पड़ती । इस सफर से लौटने के बाद उसने यह समस्या अपने दोस्तों एवं करीबियों के साथ सामने रखी तो सब ने इसे आम समस्या बताया ।

ट्रेवल इंडस्ट्री की इस समस्या को सुलझाने के लिए उसने अपने मित्र के साथ मिलकर एक कंपनी शुरू की । इस कंपनी ने अपनी स्थापना के आठ साल बाद देश के ट्रेवल इंडस्ट्री एवं अनुभव को बदल कर रख दिया और आज इनकी देश के 110 से ज्यादा शहरों में अपनी सेवाए मुहैया करवा रहे है । इस कंपनी का नाम है ओला कैब्स (OLA Cabs) और इसके संस्थापक है भाविश अग्रवाल (Bhavish Aggarwal)

एक छोटी सी समस्या से उपजे आईडिया ने देश की ट्रेवल इंडस्ट्री को बदल कर रख दिया है । आज OLA कैब्स का कुल टैक्सी इंडस्ट्री में 45 प्रतिशत से ज्यादा की हिस्सेदारी है और टैक्सी के साथ ही ऑटो, बस एवं हेलीकाप्टर तक की सुविधाए प्रदान कर रही है । आज OLA कैब्स ने भारतीय स्टार्टअप इंडस्ट्री में अपना अलग मुकाम बना लिया है ।आज कंपनी की वैल्यूएशन लगभग 40,000 करोड़ रुपये है जो कि भाविश और उनकी टीम की सफलता को दर्शाती है ।

भाविश की शुरुआत एक पंजाब के एक मध्यमवर्गीय परिवार से हुई । उनका जन्म 25 अगस्त 1985 को पंजाब के लुधियाना शहर में श्री नरेश कुमार अग्रवाल एवं श्रीमती उषा अग्रवाल के घर में हुआ । बचपन से ही पढ़ने में तेज भाविश ने मुबई के Indian Institute of Technology (IIT ) से कंप्यूटर साइंस में बीटेक इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की । पढाई के बाद उनकी प्रतिभा को देखते हुए माइक्रोसॉफ्ट ने उन्हें रिसर्च इंजीनियर की पोस्ट के लिए चुन लिया । भारी-भरकम सैलेरी और अपने पसंद के काम को करने में भाविश पूरी तरह से लग गए ।कंपनी में रिसर्च जॉब के दौरान ही उन्होंने अपनी प्रतिभा के बदौलत दो पेटेंट भी अपने नाम करवा लिए ।

काम करते-करते भाविश का मन अपनी सुरक्षित 9 से 5 जॉब से उठने लगा क्योंकि उनके अन्दर खुद के लिए काम करने का जूनून पैदा हो गया था । वे एक उद्यमी बनना चाहते थे लेकिन एक सुरक्षित जॉब ने उन्हें रोका हुआ था । साथ ही वे एक सोसायटी में हो रही छोटी-मोटी समस्याओं को लेकर उनके हल के लिए विकल्प देख रहे थे । जिससे की भविष्य में समाज की समस्याओं को लेकर कुछ किया जा सके ।

OLa_cabs
OLA Cabs | Image source

इसी बीच उन्हें एक बुरे यात्रा अनुभव से गुजरना पड़ा जिसने उनके लिए भविष्य के दरवाजे खोल दिए । उस अनुभव के बारे में भाविश अक्सर बात करते है और इसे अपनी ज़िन्दगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट मानते है । इसी कारण के चलते Indian Institute of Technology Bombay से Passout और Microsoft जैसी बड़ी Company में नौकरी के बावजूद उन्होंने अपनी खुद की कंपनी खड़ी की और आज हर एक व्यक्ति के जुबान पर OLA कैब का नाम रहता है।

भाविश ने अपनी कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए बैंगलोर की एक कंपनी TaxiForSure का भी अधिग्रहण किया है । इसके साथ ही पायलट प्रोजेक्ट के तहत महाराष्ट्र के नागपुर शहर में सोलर एनर्जी बेस्ड कैब, ऑटो एवं बस चलाने का सफल प्रयोग किया है । आज उनकी कंपनी ने केवल यात्रियों को सुगमता पूर्वक यात्रा करवा रही है बल्कि लाखों ड्राइवर्स को रोज़गार देने का काम किया है ।

भाविश अग्रवाल और उनकी पत्नी राजलक्ष्मी अग्रवाल ने एक फैसला लिया है कि वे कभी भी खुद की कार नहीं खरीदेंगे और वे हमेशा OLA Service का ही उपयोग करेंगे । एक अलग सोच से ही आदमी कामयाब बनता है इसका जीता जागता उदाहरण भाविश स्वयं है ।

चूँकि भाविश पहले से ही आईटी फील्ड से थे । इसलिए उन्होंने अपना बिजनेस मॉडल इस तरह से तैयार किया था कि कस्टमर को कार बुक करने के लिए या पेमेंट के लिए उनके ऑफिस न आना पड़े। हांलाकि शुरुआत में ही ऐसा नही हुआ। कैब सर्विस और तकनीकी का कॉम्बिनेशन बहुत ही बढ़िया रहा, क्योंकि इसके ऐप को इस तरह से बनाया गया था जिससे कस्टमर को अपने सुविधा की सारी जानकारी मिल सके । वे ऑनलाइन ही बुकिंग कर सकें, रेटिंग और रिव्यू देख सकें और अपने फोन के माध्यम से ही क्वालिटी की पूरी चेकिंग कर सकें।

ankit-bhati-and-bhavish-aggarwal-co-founders-ola
OLA के सह संस्थापक अंकित भाटी के साथ भाविश अग्रवाल | Image Source

भाविश जैसे ही हटकर सोचने वाले उनके दोस्त अंकित भाटी नवम्बर 2010 में कम्पनी में शामिल हुए। उन्होंने भी उसी कॉलेज से बी.टेक और एम् टेक की डिग्री प्राप्त की थी । दोनों ने कम्पनी साथ-साथ रन करने का सोचा और आगे बढ़ते गये। किसी भी बड़े कम्पनी की शुरुआत छोटे से ही होती है । जब कम्पनी शुरुआत करने की सोची तो दोस्त लोगों का मजाक उड़ाना स्वाभाविक है लेकिन जब आपके काम को पेरेंट्स भी न समझें तो दिक्कत महसूस होती है। लेकिन जब काम बढ़ने लगे और पैसे आने लगे तो सबका दिमाग क्लियर होते जाता है ।

शुरुआत में भाविश के माता-पिता को लग रहा था कि इतना पढ़ने और नौकरी छोड़ने के बाद कोई ट्रेवल एजेंट बनने का सोच रहा है। लेकिन उनको उस वक्त समझा पाना मुश्किल होता है क्योंकि कुछ हटकर करने से सभी लोगों की तरह घरवाले भी आपको पागल समझ सकते हैं । इसमें उनकी कोई गलती भी नहीं है लेकिन जैसे-जैसे पैसे आने लगे तो उनको भाविश के स्टार्टअप पर विश्वास होने लगा, और वे समझने लगे कि लड़का आगे जरूर कुछ बड़ा करेगा ।

आज भारत के सबसे बड़ी कम्पनी ओला देश में बहुत ही तेजी से बढ़ रही कैब एवं ऑटो बुकिंग सर्विस देने वाली कम्पनी बन चुकी है । ओला का स्मार्टफोन ऐप, कैब बुकिंग के लिए सबसे ज्यादा उपयोग किया जाने वाला ऐप है ।

भाविश अग्रवाल कहते हैं कि सपने तो हर कोई देखता है, लेकिन कुछ ही लोग जोखिम उठाने के लिए तैयार रहते हैं । जब आप जोखिम उठाने के लिए आगे बढ़ते हैं तो कई लोग कई सलाह भी देंगे । पर याद रखिये सपने उन्हीं के सच होते हैं जो सुनते सबकी हैं पर करते मन की हैं ।

Comments

comments